*नदी जब निकलती है,*
*उसके पास कोई नक्शा नहीं होता,*
*की "सागर" कहां है।*
*बिना नक्शे के सागर तक पहुंच जाती है।*
*इसलिए "कर्म" करते रहिये,*
*नक्शा तो भगवान् पहले ही बनाकर बैठे है।*
*हमको तो सिर्फ "बहना" ही है ।।* 🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸
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*तकदीर ने चाहा जैसे*
*ढल गये हम..!*
*बहुत संभल के चले*
*फिर भी फिसल गये हम..!*
*किसी ने विश्वास तोड़ा*
*किसी ने दिल...*
*और लोगों को लगता है*
*कि बदल गये हम.!!*
*🙏 💔🙏*
*🌹💔+es💔🌹*