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टूटा नहीं पर तोड़ा गया हूँ
रहा ना किसी काम का अब
कह कर छोड़ा गया हूँ
था जो कभी नजरो में सबों के
अब बेकार समझ के फेका गया हूँ
था जिस डाल पे कभी घर मेरा
मैं उस पेड़ से निकाला गया हूँ
- विनय
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