@ManishPandeyLKW मेरे पिताजी लोहिया में ही एडमिट है । ३ दिन cardiology में रहे और अब मेडिसिन में है , कल सुबह उनकी डायलिसिस होगी । हर काम हो रहा है, बस समय लगता है । सिफारिश वालों को लगता है कि उनका काम पहले हो , ये गलत है ।
और डॉक्टर्स, स्टाफ की कमी बहुत ज्यादा है । कई को तो २५ घंटे से ज्यादा
@VishuYadav01 क्योंकि मजबूर और कमजोर का शोषण करने के लिए दोनों को एक दूसरे की जरूरत होती है । एक को कुचक्री बुद्धि की जरूरत है तो एक को सांड जैसे बल की ।
@Shubhamshuklamp ऐसे लोगों के लिए ही EWS आरक्षण दिया गया है जो कि 10% है, जबकि ऐसे गरीब सामान्य लोगों की संख्या 2% भी नहीं है । फिर भी रोते हो तो मानसिक बीमारी भी हो सकती है ।
@ippatel इस द्वन्द्वयुद्ध में धर्म की धज्जियाँ उड़ेगी और संतों पर से आम जन मानस का विश्वास उठ जाएगा । बाकी हजारों कुरीतियां सामने आएगी क्योंकि जेन जी आसानी पर आपके मिथ को सच नहीं मानेगी ।