फूलों से सीखिए सबके जीवन में रंग भरना…पेड़ों से सीखिए ऊँचाईयों को छूना…कलियों से सीखिए मुस्कुरा कर जीना…काँटों से सीखिए कष्टों से उबरना…पत्तों से सीखिए मस्ती में झूमते रहना… टहनियों से सीखिए दूसरों को सहारा देना…
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आज प्रकृति का भी कहर देखा है,अपनो को अपनो से अलग होते देखा है इंसान को घर में कैद होते देखा है, और पशु पक्षी को आज़ाद घूमता देखा है खेल रहे थे इंसान प्रकृति के साथ आज प्रकृति को इंसान के साथ खेलते देखा है.