यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और शर्मनाक है। कल और आज का दिन भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में काले दिवस के रूप में याद किया जाएगा।
जिस तरह से मोदी सरकार के इशारे पर दिल्ली पुलिस ने माननीय "राहुल गांधी" जी के साथ बर्बरतापूर्वक व्यवहार किया, उन्हें सड़क पर घसीटा और गिराया, यह लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक मर्यादाओं पर सीधा प्रहार है। इस दौरान उन्हें चोट भी आई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी, लोकतंत्र में असहमति की आवाज़ को कुचलने की नहीं, सुनने की परंपरा होती है। राहुल गांधी जी, और देश के युवाओं के साथ हुए इस अमानवीय व्यवहार के लिए देश से माफी मांगिए।
याद रखिए, सत्ता का अहंकार स्थायी नहीं होता, लेकिन लोकतंत्र की आवाज़ हमेशा ज़िंदा रहती है। देश इस बर्बरता को कभी नहीं भूलेगा और न ही आपको माफ करेगा।
#RahulGandhi
प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के इशारे पर दिल्ली पुलिस ने कायरता के साथ हमारे नेता राहुल गांधी जी को घसीटा। प्रियंका गांधी जी के साथ बदतमीजी की गई और उन्हें भी जबरन बस में ठूंस दिया।
हमारी मांग साफ है:
• छात्रों पर लाठियां और केस नहीं चलने देंगे
• धर्मेंद्र प्रधान को उनकी कुर्सी पर नहीं रहने देंगे
• प्रधानमंत्री-गृह मंत्री को छात्रों और उनके परिवारों से माफी मांगनी होगी, इस्तीफा देना होगा
जय हिंद, जय कांग्रेस ✊
: @Pawankhera जी
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे जी, नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी जी, प्रियंका गांधी जी और सम्मानित सांसद प्रधानमंत्री मोदी के घर के बाहर सड़क पर धरने पर बैठे.!
किसान विरोधी-मोदी सरकार
देश के अन्नदाता भारत-अमेरिका ट्रेड डील के विरोध में महापंचायत के लिए दिल्ली आ रहे थे, लेकिन BJP सरकार ने अपनी पुलिस से शंभू बॉर्डर पर कंक्रीट के बैरिकेड लगवा दिए।
ये साफ तौर पर तानाशाही भरा रवैया है, जिसमें किसानों की आवाज दबाई जा रही है।
मोदी सरकार ने ट्रेड डील में भारत के बाजारों को अमेरिकी प्रोडक्ट्स के लिए खोल दिया है और ये फैसला हमारे किसानों के लिए घातक साबित होगा।
मगर मोदी सरकार यह याद रखे कि कांग्रेस पार्टी किसानों के साथ खड़ी है और उनके हक की आवाज बुलंद करती रहेगी।
भाजपा सरकार को बच्चों पर लाठी चलाने की जगह अपनी नीतियों और अक्षमताओं की समीक्षा करनी चाहिए। पहले NEET का पेपर लीक हुआ, परीक्षा रद्द हुई और Re-NEET में भी गड़बड़ी की खबरें आई हैं। कहा गया था कि प्रधानमंत्री खुद निगरानी करेंगे, इसके बावजूद यह सब क्यों और कैसे हो रहा है? बार-बार इतने पेपर लीक कैसे हो रहे हैं?
संसद में इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा होनी चाहिए और प्रधानमंत्री को देश के करोड़ों युवाओं की बात सुननी चाहिए, उन्हें जवाब देना चाहिए।