"मैंने उन्हें रोड़ की हालत दिखाई, उन्होंने मुझे थप्पड़ मार दिया"
◆ शख्स ने कहा-"मंत्री जी इसे बर्दाश्त नहीं कर पाए"...
#ParveshVerma | Parvesh Verma | Delhi Minister
बैंक कर्मचारी हड़ताल पर हैं। कारण पूछने पर यही लगा कि जिस बैंक की नौकरी को अच्छी नौकरी में गिना जाता था, उसकी हालत बदतर हो गई है। टारगेट के नाम पर कर्मचारी देर शाम तक रोके जाते हैं, छुट्टी नहीं दी जाती है,
तनाव रोज़ का हिस्सा है। काम करने की जगह भी अच्छी नहीं है। ऐसा लगता है कि बैंकर को सज़ा दी जा रही है कि उन्होंने बैंक की नौकरी क्यों की। लोगों ने बताया कि अत्यधिक तनाव के कारण बीमारियाँ होने लगी हैं।
एक बैंकर ने यह भी बताया-
सुबह 8:00 बजे घर से निकलने वाला बैंकर रात को 8:00 या 9:00 बजे के बाद ही घर लौट पाता है, क्योंकि एनपीए (NPA - गैर-निष्पादित परिसंपत्ति) को रोकने का भारी दबाव होता है। हर खाते की मंथली ईएमआई (EMI) होती है, और यदि वह 90 दिनों तक जमा न हो, तो खाता एनपीए हो जाता है। ऐसे में रीजनल ऑफिस से ब्रांच हेड पर दबाव आता है कि यह खाता आज किसी भी हाल में एनपीए नहीं होना चाहिए। पहले केवल महीने की आखिरी तारीख को एनपीए रोकने का दबाव होता था, लेकिन अब हर सिंगल डे (प्रतिदिन) यह प्रेशर रहता है।
रात के 9:00 बज रहे होते हैं और रीजनल ऑफिस से फोन आता है कि "किसी भी तरह इस खाते को बचाइए।" थक-हारकर जब ब्रांच हेड को लगता है कि उसे अब घर जाना चाहिए, तो वह अपनी जेब से 2,000, 4,000 या 10,000 रुपये तक की ईएमआई खुद भर देता है। बाद में ग्राहक वह पैसा लौटाता नहीं है, जिससे बैंक मैनेजर के अपने पैसे डूब जाते हैं।
बैंक में दिनभर कई तरह के मानसिक तनाव झेलने पड़ते हैं। आपको रिकवरी के लिए फील्ड में निकलना होता है। वहाँ कोई ग्राहक आपको ब्लैकमेल करता है कि "मेरे घर मत आओ, नहीं तो मैं पैसा जमा नहीं करूँगा, सिर्फ़ फोन पर बात करो।" फोन पर बात करने के दौरान ग्राहक कभी-कभी अभद्र और गाली-गलौज वाली भाषा का प्रयोग करते हैं। उस तनाव में यदि मैनेजर के मुँह से गलती से भी कोई गलत बात निकल गई, तो ग्राहक उसकी कॉल रिकॉर्डिंग करके ब्लैकमेल करने लगता है।
कृपया बैंकर की बात सुनें । कोई रास्ता निकालें।
नेपाल की तबाही ने साफ़ दिखा दिया कि कुदरत के आगे पैसा ज़ीरो है! लेकिन इंसानियत इस हद तक गिर चुकी है कि आज भी चंद पैसों के लिए मिर्च में ईंट पीसकर लोगों को ज़हर परोसा जा रहा है।
जब कुदरत हिसाब मांगती है तो कोई दौलत काम नहीं आती, फिर भी यह अंधी हवस थमने का नाम क्यों नहीं लेती? 💔😡
सरकारी कर्मचारियों के लिए #parents_care_leave पर बड़ा update: 45 दिन सवैतनिक छुट्टी का प्रस्ताव: राज्य सभा में बिल पेश : मंजूर
*"माता-पिता की सेवा अब अधिकार: ‘पवित्र बंधन अवकाश विधेयक 2026’ से कर्मचारियों को मिलेगा 45 दिन का सवेतन अवकाश मिलेगा*। **********************************
*"पवित्र बंधन (माता-पिता देखभाल अवकाश) विधेयक, 2026" (The Sacred Bond (Parent Care Leave) Act, 2026)* का संक्षिप्त विवरण निम्न हैं:-
*विधेयक का मुख्य उद्देश्य*
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यह विधेयक कर्मचारियों को अपने वृद्ध माता-पिता के स्वास्थ्य, चिकित्सा और भलाई की देखभाल के लिए विशेष सवेतन अवकाश (Paid Leave) प्रदान करने के लिए तैयार किया गया है।
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*विधेयक के मुख्य प्रावधान* (Key Provisions)
*अवकाश की अवधि*: किसी भी कर्मचारी को अपने पूरे सेवाकाल (Entire Service Period) में कुल मिलाकर अधिकतम 45 दिनों का 'पेरेंट केयर लीव' (Parent Care Leave) मिलेगा।
*माता-पिता की परिभाषा*: इसमें जैविक (Biological), सौतेले, दत्तक (Adoptive) माता-पिता के साथ-साथ सास-ससुर भी शामिल हैं, बशर्ते उनकी आयु 60 वर्ष या उससे अधिक हो।
*किस पर लागू होगा*: यह नियम केंद्र व राज्य सरकार के विभागों, सार्वजनिक उपक्रमों और ऐसे निजी संस्थानों पर लागू होगा जहां 10 या उससे अधिक कर्मचारी काम करते हैं।
*वेतन और शर्तें*: *
(१)यह पूरी तरह से सवेतन (Full Pay) अवकाश होगा।
(२))इसे कर्मचारी की किसी अन्य जमा छुट्टी (जैसे- कैजुअल या अर्न लीव) से नहीं काटा जाएगा।
(३)बची हुई छुट्टियों के बदले नकद भुगतान (Encashment) नहीं मिलेगा।
*आवेदन की प्रक्रिया*: छुट्टी के लिए मेडिकल सर्टिफिकेट या अस्पताल में भर्ती होने के दस्तावेज देने होंगे। आपात स्थिति (Emergency) में बिना पूर्व अनुमति के भी छुट्टी ली जा सकती है, लेकिन 7 कार्य दिवसों के भीतर दस्तावेज जमा करने होंगे।
*कर्मचारी संरक्षण और दंड* (Protection & Penalties)
(१)कर्मचारियों की सुरक्षा: इस छुट्टी का लाभ उठाने वाले किसी भी कर्मचारी को प्रमोशन, इंक्रीमेंट या ट्रांसफर के मामले में किसी भी तरह के भेदभाव का सामना नहीं करना पड़ेगा।
*नियोक्ता पर जुर्माना*: यदि कोई कंपनी या नियोक्ता बिना किसी ठोस कारण के यह छुट्टी देने से मना करता है या कर्मचारी को परेशान करता है, तो उस पर ₹50,000 से लेकर ₹2,00,000 तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
*फर्जीवाड़े पर कार्रवाई*: यदि कोई कर्मचारी जाली मेडिकल दस्तावेज देकर छुट्टी लेता है, तो उस पर अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी और उसे छुट्टी के दौरान मिला वेतन वापस करना पड़ सकता है।
*विधेयक लाने के कारण* (Objects and Reasons)
बढ़ती बुजुर्ग आबादी: भारत में बुजुर्गों की आबादी तेजी से बढ़ रही है और काम के सिलसिले में युवाओं के बाहर रहने के कारण देखभाल की कमी हो रही है।
*सैंडविच जनरेशन' पर दबाव* 35 से 55 वर्ष के वे कर्मचारी जो एक साथ अपने बच्चों और बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल कर रहे हैं, उन पर अत्यधिक मानसिक और आर्थिक दबाव है।
*सांस्कृतिक मूल्यों का संरक्षण*: भारतीय संस्कृति के 'मातृ देवो भव, पितृ देवो भव' और 'पुत्र धर्म' के सिद्धांतों को कानूनी और व्यावहारिक रूप से समर्थन देना ताकि नौकरी और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाया जा सके।
संक्षेप में, *यह एक कल्याणकारी विधेयक है जो यह सुनिश्चित करता है कि कर्मचारियों को बीमारी के समय अपने वृद्ध माता-पिता की देखभाल करने के लिए अपनी नौकरी या वेतन का नुकसान न उठाए*।
Kya Uttrakhand Police Itni Lalchi Hogayi Hai Ki Ghoos khane Ke Liye Itna Neeche Gir Sakti Hai.
Is Adhikari Ko Sabak Sikhaiye.
Uttarakhand Police Par Poora Bharosa Hai Hame.
@uttarakhandcops@pushkardhami@ANINewsUP
एक बर्तन में सोया ऑयल और डिटर्जेंट पेस्ट लेकर हाथों से रगड़ें। इस सफेद पेस्ट को 60 लीटर पानी में मिलाएं। ऊपर से 20 लीटर शुद्ध दूध, 2 किलो शीरा पाउडर या ग्लूकोज मिलाएं। गाढ़ा करने के लिए स्किम्ड मिल्क पाउडर मिलाएं। लीजिए 80 लीटर सिंथेटिक दूध तैयार है। एक लीटर नकली दूध 25 रुपए में तैयार हो जाता है, जिस पर यह गिरोह 25 से 30 रुपए तक मुनाफा कमा रहा है।
यूपी से सटे मध्यप्रदेश-राजस्थान के इलाकों में इसी मुनाफे के लिए नकली दूध बनाने की फैक्ट्रियां खड़ी हो गई हैं।
पूरी रिपोर्ट भास्कर पर देखिए: https://t.co/YIgnHwIioN
El tema musical de Kurapika del 99 es sencillamente perfecto.
Es una melodía que encaja en un RPG clásico, pero que también encapsula la esencia de Kurapika: un pacto bañado en sangre, una vida atada a una promesa, una tragedia que debe descansar en paz