झूठ की कमाई है
झूठ की बड़ाई है
खेतों में सूखा है
नदियां उफनायी है ।
झूठे हैं प्रश्न यहां
झूठ ही रेप्लाई है
झूठ के विस्तार के लिए
डाटा है
वाई फाई है ।
झूठों की महफिल में
हुक्का है , पानी है ।
सत्य मौन साधे है
आज की कहानी है ।
- अरुणेश मिश्र
कुंभक साधना एक अद्वैत आध्यात्मिक प्रयास है जो योगी साधकों द्वारा प्रदत्त किया जाता है। इस साधना का मुख्य उद्देश्य स्वयं को ब्रह्म स्वरूप में पहचानने और आत्मज्ञान को प्राप्त करने का है। कुंभक साधना के द्वारा साधक अच्छी संयमित वायु को श्वास के माध्यम से शरीर में प्रवेश देते हैं ताकि उन्हें मानसिक और शारीरिक ध्यान में स्थिरता की प्राप्ति हो सके। इस साधना के दौरान साधक को ध्यान केंद्रित एकाग्रता को स्थायी रूप से बनाए रखना चाहिए और विभिन्न मानसिक और शारीरिक अवस्थाओं के प्रति सामर्थ्य विकसित करने की आवश्यकता होती है।
कुंभक साधना के दौरान योगी साधक बृह्मरंध्र क्षेत्र और सुषुम्ना नाड़ी की अंतर्दृष्टि को जागृत करने का प्रयास करते हैं। इसमें साधक को अपनी सांस को गंभीरता के साथ नियंत्रित करना, शरीर की प्रत्येक श्वास के दौरान उच्च स्थिरता और एकाग्रता में रहने का प्रयास करना पड़ता है। यह कुंभक साधना ध्यान की एक विशेष प्रकार है जो मानसिक और शारीरिक सौम्यता और स्थैर्य को प्राप्त करने में मदद करती है।
कुंभक साधना विभिन्न प्राणायाम तकनीकों के साथ की जा सकती है, जैसे कि उच्च कुंभक, निष्ठी कुंभक, बाह्य कुंभक, शान्त कुंभक, शितकूंभक, आदि। ये तकनीकें साधक को अपने श्वास को नियंत्रित करने में सहायता करती हैं और उन्हे आत्मसात्कता और आत्मज्ञान की अनुभूति के लिए तैयार करती हैं।
कुंभक साधना को नियमित रूप से, अचानक वातावरणीय रूप से और दूसरे प्राणायाम तकनीकों के साथ योगाभ्यास के रूप में किया जा सकता है। साधक, जो कुंभक साधना कर रहा है, अपने अनुभवों पर ध्यान केंद्रित करता है और आंतरिक अनुभव को महसूस करने की कोशिश करता है।
कुंभक साधना अत्यंत महत्वपूर्ण हो सकती है क्योंकि इसके माध्यम से साधक अपनी मनःकांशी और भावनाएं वश में कर सकता है, मानसिक चंचलता को शांत कर सकता है और ध्यान की प्राकृतिक स्थिति को प्राप्त कर सकता है।
कुम्भक साधना योगिक प्राणायाम (श्वास नियंत्रण) का एक प्रकार है, इसे करने के लिए आप निम्नलिखित चरणों का अनुसरण कर सकते हैं:
1. स्थिति और स्थान: सबसे पहले, एक सुखासन या पादमासन (मैदान या योगआसन) में आराम से बैठें। यदि आप नये हैं, तो यह आरामदायक और आसान स्थिति में बैठने का प्रयास करें।
2. श्वास की प्रक्रिया: चेतन रहें कि कुम्भक तक बारीकी से श्वास को लंबा और गहरा बनाने की जरूरत होती है। अपनी सांस को धीरे धीरे छोड़ें और फिर धीरे से इसे अवशोषित करें।
3. कुम्भक का अवधारणा: श्वास छोड़ने के बाद, अपने पेट, छाती और गले को स्थिर और अवधारण करें। सांस को जमा करें और इसे कम से कम समय तक संचित करें।
4. श्वास-नियंत्रण: कुम्भक स्थिति में रहते हुए, श्वास को गले से छोड़ें। इसके बाद अपने स्वास्थ्य को संसोधित करने के लिए श्वास को धीरे धीरे अवशोषित करें।
5. समय: जब शुरुआत करें, एकमात्र एक कुम्भक सांस रखने का प्रयास करें। धीरे-धीरे, आप अपने समय को बढ़ा सकते हैं और अधिक कुम्भक साधना कर सकते हैं।
6. अभ्यास: शुरू में, आप केवल 1-2 मिनट तक कुम्भक साधना कर सकते हैं। धीरे-धीरे, आप अभ्यास को बढ़ा सकते हैं और अधिक समय तक कुम्भक साधना कर सकते हैं। यह साधना नियमित रूप से करने से आपको अधिक स्थिरता, मनोशांति और शरीरिक लाभ मिल सकता है।
भज मन 🙏
ओ३म् शान्तिश् शान्तिश् शान्तिः
#sumarti
@arunesamisra1 कभी कभी तो प्राचीन कहावतें भी सत्य स्वरूप दिखतीं है 🙏
"ढाक के वहीं तीन पात"
धन्य है आपके मार्गदर्शन को 🙏
#सनातन_धर्म_सर्वश्रेष्ठ_है
जय श्री कृष्ण राध्ध्ध्ध्ध्ध्य्य्य्य्यै राध्ध्ध्ध्ध्ध्य्य्य्य्यैll꧂
मस्तक पर जितनी रेखाएं
उतनी चिंता , उतना चिंतन ।
अधरो पर फिर भी हंसी निहित
अप्रतिम सनेह , रसपूरित मन ।
माँ अतुल दीप्ति से युक्त सदा
व्रत , नेम , त्याग , दानी , ज्ञानी ।
मां के ऋण से यह सृष्टि चले
मां से जीवन की गति जानी ।
- अरुणेश मिश्र
हम एक झूठ क्या बोले
भीड़ ने तालियां बजायीं
ज़िंदाबाद के नारे लगाए
मीडिया ने कहा-यह महापुरुष हैं
जिन्होंने सत्य को धरतीं पर
उतार कर तारे लगाए
हम लगातार झूठ बोलते गए
उपलब्धियों के द्वार खोलते गए
सत्य पीछे खड़े होकर
आत्मा को खोखला कर गया
झूठ तो जिंदा रहा
आदमी मर गया।
-अरुणेश मिश्र
और इन सभी पर "ठीक हूँ" की ओढ़ाई गयी चादर मिलेंगी!
*इतनी चिंता करनेवाले बधु 🙏भले ही नाटकीय घटनाक्रम नियोजित अपनापन महसूस करते तों हे?*🙏
जय श्री कृष्ण राध्ध्ध्ध्ध्ध्य्य्य्य्यै राध्ध्ध्ध्ध्ध्य्य्य्य्यैll꧂
कैसे हो..? ठीक हूँ..!
आप कैसे हो..? मैं भी ठीक हूँ..!
उपर की दो लाइनो का सिटी स्कैन किया जाए
तो हजारों गम,लाखो ख्वाहिशे और बेहिसाब अंत किये गए सपने मिलेंगे!
क्या हुआ?
क्यों हुआ?
कैसे हुआ?
ओर!
कब हुआ?
जैसें अनेकानेक प्रश्न???
हमारे देश की संस्कृति सबको माफ़ कर देने की है - हमलावर भी माफ़ किये गए चोर उचक्के भी । राजनीति इसे भारतीय संस्कृति मानकर फल फूल रही है ।
- अरुणेश मिश्र