उधर मैनपुरी में समाजवादी नेता विजेंद्र यादव ने एक दलित महिला को जूते में peशाब पिलाया ।
किधर छुपे हो सालों !!!!
किसी दोगले ने कुछ लिखा देखा बोला ??
🤬🤬🤬
लेकिन कोविड महामारी के दौरान उन्हें कुछ समय के लिए जेल से जमानत मिल गई और वह गुमनामी में अजमेर चली गईं और फिर खबर आई कि माधुरी गुप्ता की गुमनामी में मौत हो गई, उन्हें कोविड, डायबिटीज और कई अन्य बीमारियां एक साथ हो गईं.
उनका अंतिम संस्कार भी मोहल्ले के लोगों और नगर निगम ने किया। उसकी मौत के बाद न तो कोई रोने वाला था और न ही अंतिम संस्कार करने वाला कोई था।
इस सच्ची और बीती हुई कहानी को साझा करने की बात और सोचने वाली बात यह है कि इतने वरिष्ठ पद पर इतनी पढ़ी-लिखी और तैनात 52 वर्षीय परिपक्व महिला भी लव जिहाद में फंस जाती है,
फिर हम चौदह, पंद्रह, सोलह साल की मासूम लड़कियों से कैसे उम्मीद कर सकते हैं कि वे किसी जाल में न फंसें...?
हिंदुओं को हिंसक बताने वाले क्या किसी और मजहब के लिए ऐसे शब्दों का इस्तेमाल कर सकते हैं ?
यह सवाल #DoTook में समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता से 13 - 14 बार पूछा लेकिन एक बार भी उनके मुंह से दूसरे मजहब को लेकर कुछ नहीं निकला। हिंदुओं को गाली देना इनकी फितरत बन गई है क्योंकि हिन्दू हिंसक नहीं सहनशील होता है।
लिखा है दिल्ली पंजाब में हर गारंटी पूरी कर दी है। तो फिर दिल्ली में LG और अधिकारी काम नहीं करने देते का हंगामा क्यों? फिर दिल्ली सेवा बिल पर हंगामा क्यों अगर मौजूदा सिस्टम में सारे काम और गारंटी पूरी कर ही दे रहे हैं? फिर मोदी जी काम नहीं करने दे रहे का रोना क्यों? और अगर सब काम कर ही दिया तो नल में नाले का पानी और अस्पताल न बनने की शिकायतें कहां से आ रही हैं?