दुनिया का कोई भी गंभीर अर्थशास्त्री भारत की मौजूदा कथित GDP ग्रोथ 7.8% के दावे पर सिर्फ चकित है. भारतीय अर्थव्यवस्था के जानकार देश या विदेश में रहने वाले कई बडे भारतीय अर्थशास्त्री इसे अविश्वसनीय बता चुके हैं. सच सामने लाने के लिए भारत के पूर्व वित्त सचिव Subhadh Chandra Garg और पूर्व रिजर्व बैंक गवर्नर Raghuram Rajan जैसे बड़े विद्वान खुलकर बोल रहे हैं और सरकारी दावे को वास्तविकता से दूर बता रहे हैं.ऐसे में सवाल उठता है, हमारी सरकार आंकड़ो में ऐसा गडबडझाला करके क्या हासिल कर लेगी? ग्रोथ रेट इस कदर ऊपर जा रही है तो अच्छा रोजगार क्यों नहीं सृजित हो रहा है? पूंजी निवेश गुणात्मक रूप से क्यों नहीं बढ़ रहा है, खासतौर पर FDI का ऐसा बुरा हाल क्यों है? बाजार में इतनी निराशा क्यों है?
ग़ज़ब की वक्ता है ये लड़की नेहा वोरा।
पारदर्शी समझ और समझाने के लिए तरल भाषा।
सधी हुई आक्रामकता उस पर चार चांद लगा देती है।
ये साढ़े छह मिनट मोदी सरकार के फासीवाद को उजागर करने के लिए काफ़ी हैं।
▪️10 अगस्त
गौतम अडानी ने उज्बेकिस्तान के निवेश मंत्री लाजिज कुद्रतोव से मुलाकात करके
हाइड्रोपावर प्लांट में निवेश पर चर्चा की
▪️29 अगस्त
नरेंद्र मोदी उज्बेकिस्तान पहुंच गए
Chief Sales and Marketing Officer हो तो ऐसा हो!
दुनिया में पहली बार ऐसी सरकार आई है जो लूटने के लिए नियम-कानून तक बनाती है। इलेक्टोरल बॉन्ड को कोर्ट ने रद्द कर दिया था। इन्सॉल्वेंसी नाम का फ्रॉड अभी चल रहा है।
सरकार का कोई प्रिय बिजनेसमैन हजारों करोड़ रुपये बैंकों से उठाता है। फिर वापस नहीं करता। फिर सरकार उसे 99% माफ कर देती है।
आपको उलझा दिया गया है कि मुसलमानों से डरकर जिंदा रहो और ये सोचते रहो कि बीजेपी न होगी तो मुसलमान आपको लील जाएंगे।
इस डर में जी रही जनता का पैसा मोडानी नाम का नेक्सस लील रहा है। जनता लुट रही है और बदले में थैंक यू भी बोल रही है।
सुभाष चंद्रा ने क्या खेल खेला है…
सरल शब्दों में समझिए…
सुभाष चंद्रा की दो कम्पनियाँ है…
Zee और Essel group
Essel group ने अलग अलग बैंकों, फ़ाइनेंशियल ग्रूप से 22,000 करोड़ का लोन लिया…
इस पूरे लोन की पर्सनल गारंटी दी सुभाष चंद्रा ने…
गारंटी के वक़्त कहा गया कि मेरी नेट वर्थ है 40,000 करोड़…
जब लोन चुकाने का वक़्त आया तो सुभाष चंद्रा पलटी मार गए…
कहने लगे मेरी संपत्ति केवल 31 करोड़ ही है…
मैं केवल 6 करोड़ चुका सकता हूँ… चाहो तो 6 करोड़ मे लोन सेटल कर लो….
अब सुनिए नियम क्या कहता है…??
लोन देने वाली अलग अलग बैंक और फ़ाइनेंशियल ग्रूप में से 75% ग्रूप अगर कोई आपत्ति दर्ज नहीं करवाते हैं…
तो लोन 6 करोड़ में सेटल हो जाएगा…
अब यहीं सुभाष चंद्रा ने सबसे बड़ा खेल किया हैं…
22,000 करोड़ के लोन में 4223 करोड़ रुपये…
LIC, HDFC, Axis bank, Canara bank इत्यादि बैंकों से लिया गया था…
बाक़ी 17783 करोड़ रुपये अपनी ही फ़ाइनेंशियल कम्पनियों और कुछ पर्सनल लोगों से लिया गया था…
अब जो अपनी खुद की फ़ाइनेंशियल कम्पनियाँ और व्यक्तिगत स्तर पर लोगों से लोन लिया गया था…
ये बनता है 80%
इन सबको व्यक्तिगत स्तर पर लोन चुका दिया…
और कोर्ट में इन सब फ़ाइनेंशियल ग्रूप ने कह दिया कि हमें 6 करोड़ के सेटलमेंट से कोई आपत्ति नहीं है…
बैंक वाले केवल 20% थे… वो बेचारे मुँह ताक़तें रहे…
मतलब कुल मिलकर नियमों में उलझाकर, सुभाष चंद्रा ने बैंकों के 4223 रुपये डकार लिए…
ग़ज़ब का खिलाड़ी निकले ये सुभाष चंद्रा…
और रही सरकार के सपोर्ट की… तो पिछले दस सालों में इतनी चाटुकारिता तो की है
कि सरकार का फ़ुल सपोर्ट है चंद्रा साहब को…!!!