@heyshreyaaa Every true Bhartiya will stand with India and @narendramodi and NDA government. @AmitShah@myogiadityanath - We, as Indians, will not tolerate cockroaches and anti-Indians who undermine our nation. We expect firm, decisive, and uncompromising action against those culprits.
#This. But if you point this bitter truth out, YOU are the one they call communal, not the guys actually kiIIing, r@ping, looting and destroying. @Vishnu_Jain1
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस शाह कौन होते हैं हमें आदेश देने वाले ? क्या सुप्रीम कोर्ट संसद को डायरेक्शन देगा ? क्या हम देश की अर्थव्यवस्था को चंद फैसलों की वजह से बर्बाद होने दें
इंदिरा गांधी ने भारत के सुप्रीम कोर्ट और जज लोगों को क्या जबरदस्त आईना दिखाया था
@kunal492001 शुक्ला जी आप बड़ी ही अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिसको देखकर ऐसा लग रहा है कि आपके पिताजी भी जवानी में भाग गए थे, और अब्दुल चाचा आपके पड़ोसी रहे होंगे,
डीएनए टेस्ट कर लीजिए कहीं मेरा शक सही ना हो....!
समझ का फ़र्क़ है शुक्ला जी । मोदी का परिवार पूरा देश है।
मोदी देश के लिए जीते है और देश के लिए मरते है।
पर परिवार वाले तो पूरे खानदान के लिए देश लूट लेते है। अखिलेश ने अपने खानदान को एमपी बना दिया और लालू के घर का हर सदस्य मालोमाल है।
कांग्रेस की बात करने की ज़रूरत नहीं,सब जानते है।
शुक्ला जी, आप "बौद्धिक कब्जरोगी" हो...
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गौतम बुद्ध ने भी अपनी पत्नी यासोधरा का त्याग किया था।
उनका त्याग उनके धार्मिक और आध्यात्मिक प्रतिबद्धता का परिणाम था और यह उनके विचारों और जीवनशैली का हिस्सा था। यह निम्नलिखित कारणों से हुआ:
आध्यात्मिक तयाग: बुद्ध ने आध्यात्मिक जीवन में अपने मानव जीवन की सारी आवश्यकताओं को त्याग दिया, जिसमें सम्पत्ति, सुख, और संबंधों का भी समावेश था। यह एक भाग्यशाली जीवन का त्याग था जिसका उद्देश्य आध्यात्मिक मोक्ष और सत्य की प्राप्ति थी।
धार्मिक प्रतिबद्धता: गौतम बुद्ध का उद्देश्य दुख से मुक्ति और सुख प्राप्ति था। उन्होंने समझाया कि यह सिर्फ आध्यात्मिक मार्ग द्वारा हो सकता है और उन्होंने अपने व्यक्तिगत आवश्यकताओं का त्याग किया ताकि वे ध्यान और साधना में समर्पित हो सकें।
नियमों का पालन: गौतम बुद्ध ने मोनास्टिक जीवन का पालन किया, जिसमें संबंध और भौतिक विकल्पों का त्याग होता है। इससे उन्होंने आत्म-नियंत्रण और आध्यात्मिक विकास के लक्ष्य को प्राथमिकता दी।
सामाजिक परिवर्तन: बुद्ध ने सामाजिक और मानविकी दृष्टिकोण से भी कई परिवर्तन किए। उन्होंने जातिवाद और वर्णव्यवस्था के खिलाफ उत्कृष्ट मत रखा, और उन्होंने यह बताया कि मोक्ष किसी भी वर्ग के लिए समर्पित हो सकता है, न कि केवल एक विशेष वर्ण के लोगों के लिए।
गौतम बुद्ध का यह त्याग उनके धार्मिक उद्देश्यों का परिणाम था और उनके जीवन में उनकी विशिष्टता का हिस्सा था।
बुद्ध का त्याग उनके आदर्शों और विचारधारा के साथ सम्बंधित था, जिसमें सामाजिक और आध्यात्मिक परिवर्तन का आदर्श दिखाया गया था।
नरेंद्र मोदी जैसा साधक होना कठिन है जिसने राष्ट्र निर्माण को तवज्जो दी ना कि परिवार निर्माण को..!!
#NarendraModi
@NayakRagini शूर्पणखा को जब ख़ुद अपने से बड़ों से बात करने या बड़ों के बारे में बात करने की तमीज़ जब ख़ुद नहीं तो कौन सा पाठ ख़ुद से ज़्यादा तजुर्बेदार इंसान को पढ़ाना चाह रहीं हैं।