It's fake news propagated by media and academics that the Chitpavan Brahmins lead the RSS.
Chitpavans or Konkanastha Brahmins are considered impure and lowly Brahmins.
No Chitpavan Brahmin has ever become the RSS chief.
The RSS founder Hedgewar was a Deshasth Brahmin, Golwalkar was a Karhade Brahmin, and Devras was also Karhade. Sudarshan was a Namboodiri, Rajendra Singh/Rajju Bahiya was a Kshatriya Thakur.
Present chief Mohan Bhagwat is not a Brahmin. He is a Daivadnya/Sonar or goldsmith.
In Maharashtra and Karnataka they consider themselves Brahmins and some of them wear janeu. No Brahmin will ever marry a Daivadnya.
रंगनाथ मिश्रा सुप्रीम कोर्ट का चीफ़ जस्टिस था। लेकिन मैं भूल गया था कि वह कांग्रेस का एमपी भी था। उसने मुसलमानों को एससी लिस्ट में शामिल करवाने के लिए दो झूठ बोले��� एक, 1950 की एससी लिस्ट में धार्मिक पाबंदी नहीं थी और दो, सिख 1956 में लिस्ट में आए। https://t.co/Od7PALPxP2
जो मुसलमान और ईसाई SC लिस्ट में खुद को शामिल करने की मांग कर रहे हैं, वो प्लीज़ #मणिपुर हिंसा से सबक लें। SC-ST की लिस्ट एक बेहद संवेदनशील मसला है और इससे छेड़छाड़ करना बड़े विवाद को खड़ा कर सकता है। ये सिर्फ SC-ST का दर्ज़ा हासिल करने तक सीमित नहीं है ��ल्कि ये समुदाय इसे अपने ऊपर हमले के तौर पर देखते हैं। हाईकोर्ट के फैसले से मणिपुर सुलग उठा इसलिए सुप्रीम कोर्ट को भी चाहिए कि मुसलमानों और ईसाइयों की ओर से SC लिस्ट में शामिल होने की मांग वाली याचिकाओं पर संवेदनशीलता से विचार करे। ये सीरियस मैटर है।
कलकत्ता विश्वविद्यालय के प्रसिद्ध शोधकर्ता दिनेशचंद्र सेन ने 'बंगाली भाषा ओर साहित्य का इतिहास' नामक एक महत्वपूर्ण पुस्तक लिखी, जिसे 1911 में कलकत्ता विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित किया गया था। उस पुस्तक के प���ष्ठ 368 पर वह लिखा कि हिंदुओं की लक्ष्मी माता
जब राष्ट्रपति के आर नारायणन जी ने मान्यवर के लिए प्रोटोकॉल तोड़कर, साहब को राष्ट्रपति भवन के गेट तक स्वयं आकर छोड़ा था। तब साहब ने कहा ���प राष्ट्रपति हैं आप यहीं रहें मैं खुद चला जाउँगा।
तब के आर नारायणन जी ने कहा,"राष्ट्रपति तो दूसरा दलित फिर बन जायेगा, परन्तु दूसरा कांशीराम नहीं आयेगा।"
के आर नारायणन जी ने मान्यवर कांशीराम जी को राष्ट्रपति भवन के गेट तक स्वयं आकर छोड़ा था।
मुझे गर्व है कि मैं ऐसे महान महापुरुष की पार्टी का कार्यकर्ता हूँ।
उन दलित चिंतकों, यूट्यूबर, पत्रकारों और इन्फ्लुएंसर पर भी नज़र रखिए जो अपने व्यक्तिगत हितों और कुछ लोगों को खुश रखने के चक्कर में दलितों की हकमारी पर भी चुप्पी साधे बैठे हैं। इन लोगों में दलितों के अधिकारों पर हो रहे हमलों पर भी स्टैंड लेने की हिम्मत नहीं है। उन्हें पहचानिए
वैसे तो ओबीसी भी आम तौर पर सीवर में नहीं उतरता। पर उसकी औक़ात नहीं है पॉलिसी बनाने की। फिर कोर्ट भी तो है। माहौल मीडिया को बनाना है। इन सब में ओबीसी कहाँ है?
शुद्र व अतिशुद महिलाओं पर थोपा गया ब्रेस्ट टैक्स 1924 में खत्म हुआ। इसे ब्रिटिश सरकार ने खत्म किया था। टीपू सुल्तान की मौत तो 1799 में ही हो गई थी। एक मरा हुआ व्यक्ति टैक्स कैसे खत्म कर सकता है?
कब तक झूठ के सहारे मन ही मन Orgasm फ���ल करते रहेंगे भाईजान? मुंह मियां जाहिल मत बनिए।
यूपी के कांवड़ यात्रा मार्ग के शहरों का सावन और राज्य सरकार का पवित्र आदेश।
1. मछली, मुर्ग़ा और मांस बेचने वाली दुकानें बंद
2. इन्हें पकाकर मॉल और र���स्टोरेंट में बेच सकते हैं
3. शराब विदेशी और कच्ची जितना चाहें ख़रीदें। बेचने और पीने के लाइसेंसी ठेके खुले हैं। वहाँ साथ लगे ठेके में चिकेन वग़ैरह खा सकते हैं।
4. ऑनलाइन ऐप से चिकेन, मटन, फ़िश मंगा सकते हैं। ऑनलाइन लीसियस स्टोर वाले गुप्ता जी का बिज़नेस चकाचक।
5. ऑनलाइन बिरयानी, चिकेन टिक्का ऑर्डर कर सकते हैं।
6. राज्य का बॉर्डर पार करके बग़ल की दिल्ली वाली दुकान में मुर्ग़ा कट रहा है। बॉर्डर ��ालों के लिए कोई समस्या नहीं।
पवित्रता का सारा बोझ छोटे दुकानदारों पर। बाक़ी नॉन वेज बिज़नेस जारी है।
बीच बहस में: आर्ट का उद्देश्य क्या है? क्या मोदी युग में सबकी आवाज़ बंद कर दी गई है? क्या नेहरू युग में होती थी बेधड़क पत्रकारिता? फ़िल्मों का सरकार से कभी नहीं रहा टकराव का रास्ता। कभी नहीं रही आज़ादी अनलिमिटेड।
सुनिए @kunalkamra88 और मेरी बातचीत।
https://t.co/PkQONfpoWl
अगर आपको अपनी सामाजिक प्रतिष्ठा यानी इज़्ज़त की परवाह है तो अपने परिवार की महिलाओं को चमत्कारी बाबाओं के पास मत भेजिए। और ज़्यादा मैं क्या ही बोलूँ। मुझे तो दिल से बुरा लगता है जब इस बारे में खबरें पढ़ता हूँ। अब ये मत कहिए के आपके वाले बाबा ऐसे नहीं हैं।
- और क्या चल रहा है??
- जाति जनगणना का ख़ौफ़ चल रहा है। जनगणना के इतिहास में आज़ादी के बाद पहला मौक़ा है जब जनगणना ही टाल दी गई है। पाकिस्तान से 1971 का युद्ध हुआ तब भी जनगणना नहीं टली। इस बार टल गई। पब्लिक जाति का कॉलम देखे बिना जनगणना करने नहीं देगी।
आज रात 8 बजे #AskDilipMandal है। विषय है - धर्म, जीवन का अर्थ, सफलता, सुख, आध्यात्म, पुनर्जन्म, कर्म-फल सिद्धांत, मुक्ति, निर्वाण आदि। सवाल अभी भेज सकते हैं।