महिला आरक्षण, नारी शक्ति वंदन अधिनियम-2023 के माध्यम से 2023 से ही भारत में लागू है, लेकिन भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार नारी शक्ति को उनकी वास्तविक और न्यायपूर्ण हिस्सेदारी देने के बजाय इसे जनगणना-2011 के पुराने आंकड़ों और बिना समुचित परिसीमन के लागू करने की मंशा रखती थी। इसी दुर्भावनापूर्ण नीति के तहत 16-18 अप्रैल को 131वां संविधान संशोधन (परिसिमन) बिल 2026 लाया गया, जो महिलाओं विशेषकर बहुजन, दलित, आदिवासी और पिछड़े वर्ग की महिलाओं के अधिकारों को सुनिश्चित करने के बजाय एक राजनीतिक दिखावे तक सीमित नजर आया।
नारी के नाम पे फिर एक छल रचा गया,
हक़ को सियासत में तोल दिया।
जो “आधी आबादी” कहकर भीड़ से तालियाँ लेते हैं,
उन्हीं ने आधे हक़ पर बात आते ही मुँह मोड़ लिया।
जो कहते थे “कोटे के अंदर कोटा” से ही न्याय पूरा होता हैं,
उन्हीं ने उसी हक़ को सबसे पहले कुचल दिया।
जय भीम! जय संविधान! जय मातृशक्ति!
On Dostoevsky’s birthday, here is a thread on all his novels/novellas accompanied by a quote from each of these works. These are presented chronologically, beginning with Poor Folk & ending with The Brothers Karamazov.
I haven’t included short stories in this thread.
I sometimes play this song to put myself to sleep when I'm feeling alone and need comfort of a hug. It has been the blanket of warmth to me on gloomy nights when I have broken down countless times irreparably. #Swades@iamsrk
https://t.co/gu2vRS6Hcb