बोलता हिंदुस्तान के इंस्टाग्राम अकॉउंट को डिलीट करवाने के बाद, यूट्यूब चैनल को भी बंद करवा दिया गया है।
ईमेल में जवाब आया है-सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने कहा है।
@YouTubeIndia , @Meta और सरकार से सवाल-अभिव्यक्ति की आज़ादी कहाँ है? हमारी सुनवाई के अधिकार कहाँ हैं?🎤: @SamarRaj_
वजह भी नहीं बताई गई और चैनल भी बंद कर दिया गया। इसी के साथ इसके साथ कई लोगों की आजीविका भी ख़त्म कर दी गई। इतने सारे गोदी चैनल आराम से चल रहे हैं, फ़ाइन देने के बाद भी वही सब दोहरा रहे हैं लेकिन अब यू ट्यूब से दिक़्क़त होने लगी है ताकि सारे रास्ते बंद हो जाएँ। विपक्ष को जेल में डालो और बोलने वालों का चैनल बंद करो। फिर चार सौ क्या आठ सौ आ ही जाएगा। यह सरकार निंदा के असर से ऊपर उठ चुकी है। क्रूरता बरतने में इसे गर्व होता है।
बस हो, ट्रेन हो या हो मेट्रो,
सफ़र करते वक्त महिलाओं में एक बड़ी कॉमन चीज़ देखने को मिलती है।
अगर कोई पुरुष सीट पर बैठा होता है तो वो उम्मीद करती हैं कि उन्हें देखते ही सीट से उठ जाए। आमतौर पर पुरुष उठ जाते हैं और महिलाओं को बैठने की जगह भी देते हैं।
लेकिन अगर वो सीट पर बैठी हैं और कोई पुरुष आता है जिसे बैठने की ज़्यादा ज़रूरत है या कोई बहुत सामान लेकर खड़ा है या दिव्यांग हैं….. तो वो अपनी सीट से नहीं उठती।
सभी महिलाएं ऐसा नहीं करतीं। पर ज्यादातर यही करती हैं। तो बस उनसे यही कहना है कि दोस्त हम बराबरी की बातें करते हैं। तो हर जगह होना चाहिए। ऐसा नहीं होता कि हम जब चाहें तब पुरुषों पर निर्भर हो जाएं और बाकी वक्त बराबरी की बात करें।
Copied : @raksha_s27
रामेश्वर जी एक ज़िंदादिल इंसान हैं!
उनमें करोड़ों भारतीयों के सहज स्वभाव की झलक दिखती है।
विपरीत परिस्थितियों में भी मुस्कुराते हुए मज़बूती से आगे बढ़ने वाले ही सही मायने में 'भारत भाग्य विधाता' हैं।
दरिया अब तेरी ख़ैर नहीं,
बूँदो ने बग़ावत कर ली है
नादां ना समझ रे बुज़दिल,
लहरों ने बग़ावत कर ली है,
हम परवाने हैं मौत समाँ,
मरने का किसको ख़ौफ़ यहाँ
रे तलवार तुझे झुकना होगा,
गर्दन ने बग़ावत कर ली है॥
इन्हीं सवालों के लिए राहुल गांधी जी पर हमला किया जा रहा है। जनता द्वारा चुने हुए जनसेवक ने जनता की तरफ से सवाल पूछे तो अडानी-सेवक ने जनसेवक की आवाज दबाने की साजिशें रच डालीं।
लेकिन जनता की आवाज दबाई नहीं जा सकती। ये सवाल अब देश भर में गूंजेंगे और जवाब देना होगा।
मैंने प्रधानमंत्री की आखों में डर देखा है - वो डरते हैं अडानी पर संसद में मेरे अगले भाषण से।
सीधा सवाल है - शेल कंपनियों द्वारा अडानी समूह में लगाया गया ₹20,000 करोड़ का विदेशी पैसा किसका है?
ये सारा नाटक इसी सवाल से ध्यान भटकाने के लिए है।
"तम में प्रकाश हूँ,
कठिन वक़्त की आस हूँ।"
So proud of constable Netresh Sharma of Rajasthan Police for saving a precious life. This picture is in deed worth a thousand words..