मंदिरों के लिए बजट मिल जाता है। किलो के जीर्णोद्धार के लिए फंड आ जाता है। विदेश यात्राओं पर करोड़ों खर्च हो जाते हैं लेकिन सरकारी स्कूलों की जर्जर इमारतों के लिए कभी बजट नहीं आता! क्यों?
देश के बंदरगाह,पोर्ट,रेलवे स्टेशन सब कुछ अडानी अंबानी के हवाले कर दिया गया है। मोदी सरकार में राष्ट्र की संपत्तियाँ बेचने का दौर चल रहा है। अब वंचित समाज जाग चुका है, लोक मोर्चा के तहत एकजुट होकर 2027 में नारा बुलंद करेगा जिसकी जितनी संख्या भारी,उसकी उतनी हिस्सेदारी।@SwamiPMaurya
ब्राह्मणवादी #रमाकांत_शुक्ला और उसके बलात्कारी साथियों का पुलिस तत्काल एनकाउंटर करें।।
फतेहपुर में बीजेपी समर्थक रमाकांत_शुक्ला" और उसके साथियों ने कुशवाहा समाज की बिन बाप की 16 वर्षीय नाबालिग बेटी को बनाया हवस का शिकार।😡
🧵 पोस्ट को रिपोस्ट करते रहे गिरफ्तारी तक रुकना नही..
🎓 स्कूल बंदी के खिलाफ जनआंदोलन 💪
26 जुलाई (आरक्षण दिवस) से 31 अगस्त 2025 तक
📚 उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 27,764 प्राथमिक विद्यालय बंद करने के विरोध में
🚲 ब्लॉक वाइज गांव-गांव बाइक रैली 🛑
🔊 आप सभी साथियों से अपील है — आइए, इस ऐतिहासिक लड़ाई का हिस्सा बनें।
डबल इंजन सरकार का विकास...
1 सरकारी नौकरियां खत्म
2 सरकारी स्कूल खत्म
3 बच्चे बेरोजगार
4 ओबीसी वालों के लिए आरक्षण खत्म
5 बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़
6 जातिय भेदभाव
7 महंगाई चरम पर
8 शिक्षा पर कोई सुनवाई नहीं
9 स्वास्थ्य पर कोई सुनवाई नहीं
10 गरीब किसान परेशान
वीरांगना फूलन देवी निषाद जी की पुण्यतिथि पर उन्हें कोटिशः नमन।
जिस समाज को सदियों तक डराया, दबाया और कुचला गया — उसी समाज की एक बेटी ने 22 हैवानों को उनके पापों की सजा देकर यह साबित कर दिया कि
अगर शोषित जाग जाए, तो शासक की नींव हिल जाती है।
पुनः शत-शत नमन करते हैं.
औकात में रहो भड़वे दल्लो , वरना गर्म पानी और नमक का ऐसी जगह छिड़काव करेंगे की उठ बैठ नही पाओगे , बहन बेटियों के साथ जब बलात्कार होता है हत्याएं होती है तो तुम्हारी भावनाएं आहत नही होती , तब किस गुफा में घुस जाते हो या पीकर सो जाते हो ।
🧵 आगे पढ़े post को repost करे ।
कानपुर पुलिस कमिश्नरेट से 161 पुलिसकर्मी गायब....
कहते हैं अंधेरनगरी में सबकुछ मुमकिन है,
अब तो पुलिस भी खो जाने वाली चीज़ों की लिस्ट में शामिल हो चुकी है!
रेलवे कटऑफ ने "जन्मजात मेरिट" का सच दिखा दिया —
OBC: 846.23
UR: 795.16
कम अंक वालों को ओपन सीट, ज्यादा वालों को सीमित सीट!
ये है असली 50% अघोषित आरक्षण।
चंद्रशेखर आजाद की शहादत के वक्त उनके पिस्तौल में 16 कारतूस जिंदा थे, तो ये अंतिम गोली बात इतिहास में क्यों बताई गई, मोतीलाल नेहरू और गांधी से शहीद आजाद के संबंध
चंद्रशेखर आज़ाद पर आधारित आईपीएस अधिकारी प्रताप गोपेन्द्र की नई किताब ‘चंद्रशेखर आज़ाद: मिथक और यथार्थ’ भारतीय स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी कई ऐतिहासिक धारणाओं को चुनौती देती है। यह पुस्तक उन पुलिस रिकॉर्ड्स, खुफिया रिपोर्ट्स, CID फाइलों, और आज़ाद के अप्रकाशित पत्रों पर आधारित है, जो दशकों तक सार्वजनिक इतिहासकारों की आंखों से ओझल थे
इस पुस्तक में जो खुलासे हुए हैं, वे न सिर्फ चौंकाने वाले हैं, बल्कि हमारे इतिहास की मूल समझ पर भी सवाल उठाते है
चन्द्रशेखर आजाद की शहादत पर छिड़ी नई बहस
एल्फ्रेड पार्क (अब चंद्रशेखर आज़ाद पार्क) में आज़ाद की शहादत को लेकर लंबे समय से बहस रही है। पुस्तक में दिए गए ब्रिटिश रिकॉर्ड्स, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और हथियारों की जांच रिपोर्ट ने कई नए खुलासे किए है
इतिहास में प्रचलित धारणा है कि चंद्रशेखर की शहादत के वक्त उनके पिस्तौल में आखिरी गोली बची थी जबकि जांच रिपोर्ट में साफ लिखा है कि आजाद की पिस्तौल में जिंदा 16 कारतूस थे जबकि 22 गोलियां चलाई जा चुकी थी
अगर शहीद चन्द्र शेखर आज़ाद ने गोली अपने सर से सटाकर मारा था तो गोली उनके गर्दन के पास कैसे फंसी थी? इसका मतलब गोली दूर से चलकर आ रही थी क्योंकि उसी समय उसी पिस्तौल की गोली से चंद्र शेखर आजाद जी ने दूर खड़े दुश्मन का जबड़ा फाड़ दिया था
तो क्या आज़ाद ने आत्महत्या की थी या नहीं , या दुश्मन की गोली से शहीद हुए थे? ये एक बड़ा सवाल है जब उनके पास गोलियां बची थी तो इतिहास में अंतिम गोली की बात किसने कही?
हालांकि,उनके साथियों शिव वर्मा और सदाशिवराव मलकापुरकर ने हमेशा इस बात से इनकार किया कि उन्होंने आत्महत्या की थी
अल्फ्रेड पार्क (अब का आजाद पार्क ) में शहादत के समय आज़ाद और सुखदेवराज के अलावा एक और क्रांतिकारी साथी मौजूद था, लेकिन इतिहास में उसके नाम का उल्लेख नहीं है। जिसका नाम हजारीलाल था
गांधी और नेहरू के साथ आजाद के संबंध:
चन्द्रशेखर आज़ाद इलाहाबाद में मोतीलाल नेहरू के अंतिम संस्कार में चेहरा ढककर बिना खाए पिए मौजूद रहे
आजाद ने पत्रकार सुरेंद्र नाथ शर्मा से कहा, मोती लाल नेहरू के लिए कि “आज देश का एक बड़ा नेता विदा हो गया
चन्द्र शेखर आजाद अपनी शहादत के मात्र 10 दिन पहले, इलाहाबाद के पार्क में गांधी जी अपने अनुयायियों के भ्रमण कर रहे थे तभी आजाद ने उन्हें नमस्कार कहा , गांधी जी ने बदले में हाथ हिलाया,अभिवादन स्वीकार किया
यहाँ किताब में पहली बार प्रस्तुत किए गए प्रमुख खुलासे दिए गए हैं, साथ ही नवीनतम खोजे गए विवरण भी शामिल है
कानपुर के भौती में पैतृक जड़ें: यह किताब कानपुर के भौती गाँव और आज़ाद के परिवार की वंशावली के बारे में नई जानकारी प्रदान करती है, जिससे उनके प्रारंभिक जीवन को आकार देने वाले प्रभावों की गहरी समझ मिलती है
जन्मस्थान की स्पष्टता: पहली बार, किताब में अलीराजपुर और भंवरा के समय और स्थान का विवरण दिया गया है, जिन्हें निश्चित रूप से आज़ाद का जन्मस्थान माना गया है, जिससे ऐतिहासिक अस्पष्टताओं का समाधान हुआ है।
एक से अधिक गिरफ्तारियाँ उजागर: जहाँ पहले की जीवनी में केवल एक गिरफ्तारी का उल्लेख है, वहीं किताब आज अखबार की रिपोर्टों का हवाला देते हुए बताती है कि आज़ाद को दो बार गिरफ्तार किया गया, एक बार जुर्माना लगाया गया और उन्होंने आज के संपादक को एक पत्र भी लिखा। ये अनदेखे विवरण अब पूरी तरह से दर्ज किए गए हैं
‘आज़ाद’ उपनाम का उद्भव: किताब स्पष्ट करती है कि “आज़ाद” नाम को कोड़ों की सजा की घटना से पहले अपनाया गया था और इसका उस घटना से कोई संबंध नहीं है
क्रांति का मार्ग: खुफिया रिपोर्टों के आधार पर, किताब में बताया गया है कि आज़ाद क्रांतिकारी कैसे बने और वे कब पहली बार ब्रिटिश CID की नजर में आए।
किताब में काकोरी केस से पहले आज़ाद द्वारा चार धन-संबंधी क्रांतिकारी कार्रवाइयों में भागीदारी का विवरण दिया गया है, जिसमें सटीक समयरेखा और विवरण शामिल हैं, जो पहले की जीवनी में अनुपस्थित थे
पुलिस मुखबिर की पहचान: इंस्पेक्टर के घर में बंद रहस्यमयी व्यक्ति के बारे में विवरण, जिसे मुखबिर माना जाता है
किताब में बताया गया है कि आज़ाद ने छह वर्षों तक ब्रिटिश CID को कैसे चकमा दिया, जिसमें उनकी चतुराई और रणनीतिक बचाव के तरीकों पर प्रकाश डाला गया है
Source – चन्द्रशेखर आजाद: मिथक बनाम यथार्थ लेखक प्रताप गोपेन्द्र
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घिसटती जनता, फूल उड़ाते अफसर!
#आजमगढ़ में दिव्यांग पति-पत्नी घर तक रास्ता मांगने कलेक्टर ऑफिस पहुंचे — पीठ पर पत्नी, आंखों में आस।
लेकिन अफसरों का दिल नहीं पिघला...
क्योंकि वो तो कांवड़ियों के पैर दबाने, फूल बरसाने और फोटो खिंचवाने में व्यस्त हैं!
क्या यही है महिला सशक्तिकरण?
यूपी में 'डबल इंजन सरकार' का कारनामा
गोरखपुर में महिला सिपाही ट्रेनिंग सेंटर से बाहर आकर रोने लगीं।
सेंटर में पीने का पानी नहीं है, बिजली नहीं है, पंखा नहीं है। यहां तक कि उन्हें खुले में नहाना पड़ता है शिकायत करने पर उन्हें भद्दी गालियां दी गईं।
अमेठी में बकरी बेचने वाले नौशाद और उनके बेटे को पुलिस ने बिना सबूत थाने में पीटा, पट्टों से दागा और फिरौती लेकर छोड़ दिया।
जुर्म सिर्फ इतना कि वो गरीब थे। क्या यूपी में अब कानून सिर्फ रसूख वालों के लिए है?
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धर्म की आड़ में कांवड़ियों द्वारा हिंसा और उपद्रव किया जा रहा है, जो साफ तौर पर आपराधिक है। सरकार की छाया में इनका आतंक बढ़ रहा है। ऐसे कृत्य भक्ति नहीं, गुंडागर्दी दिखाते हैं, जो किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं।