Yadav ji lives in America and has set up his own transport business there. But in India, he still enjoys backward class status. Even after owning a transport company in the USA, he remains ‘exploited’ in India. This kind of fraud is only possible in Hindustan.
फरीदाबाद के 28 वर्षीय कारोबारी राहुल ने दुकान में फंदा लगाकर जान दे दी।
मरने से पहले वीडियो में बोला—
“मैं झाड़ू लगाता था, बर्तन धोता था, फिर भी पत्नी पीटती थी।”
2 साल पहले लव मैरिज।
फिर पत्नी, सास-ससुर और साली पर मानसिक प्रताड़ना, मारपीट और झूठे केसों के आरोप।
क्या करे बेचारा पति?
घर संभाले तो भी गलत।
मां-बाप छोड़े तो भी गलत।
कमाए तो ATM।
चुप रहे तो कायर।
बोले तो आरोपी।
और टूट जाए तो सिर्फ एक और खबर।
हर दिन कोई न कोई पति मर रहा है, लेकिन समाज को पुरुष की लाश में भी दर्द नहीं दिखता।
शादी साझेदारी है या पति को नौकर और ATM बनाने का लाइसेंस?
देख रहे हो विनोद ,नैरेटिव भटक गया है : ✅मुद्दा यह था कि छत्तीसगढ़ का “मसीह समाज” सनातनी मंत्र पर आपत्ति क्यों कर रहा है, जबकि किसी सनातनी ने स्कूल में ईसाई प्रार्थना पर कभी आपत्ति नहीं की है
अब संविधान को समझा जाए :
⭐️ अधिकांश अल्पसंख्यक स्कूल को सरकारी राशि प्राप्त है या CBSE / ICSE / राज्य बोर्ड की मान्यता है । ऐसे अल्पसंख्यक स्कूल को अनुच्छेद 28 का पालन करना पड़ता है
⭐️क्या सनातनी - सरना को ऐसे स्कूल में प्रार्थना पर आपत्ति का अधिकार है ? बिल्कुल है - आइए समझते हैं उस अधिकार को
⭐️पहली बात , यदि किसी अल्पसंख्यक स्कूल को 100% सरकारी फंड मिलता है, तो अनुच्छेद 28(1) के तहत वहां किसी भी प्रकार की धार्मिक शिक्षा या धार्मिक प्रार्थना आयोजित नहीं की जा सकती।
⭐️आंशिक सरकारी सहायता प्राप्त अल्पसंख्यक स्कूल में कोई ऐसी प्रार्थना होती भी है, तो अनुच्छेद 28 (3) तहत किसी भी छात्र को उसमें शामिल होने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। 🚨यदि छात्र नाबालिग है, तो उसके माता-पिता की सहमति लेना अनिवार्य है
⭐️मैं मिशनरी स्कूल में पढ़ती थी । 🚨मेरे परिवार या किसी भी सनातनी अभिभावक से ईसाई प्रार्थना की अनुमति नहीं ली गई थी । लेकिन हमें आपत्ति नहीं थी । और आपत्ति नहीं करने वाले परिवार वाक़ई “secular” ( धर्मनिरपेक्ष) हैं ।
⭐️पूर्ण निजी अल्पसंख्यक स्कूल, अपनी असेंबली में धार्मिक प्रार्थनाएं रख सकता है। ⭐️लेकिन यहाँ भी यदि कोई छात्र या उसके माता-पिता आपत्ति जताते हैं, तो स्कूल उन्हें शामिल होने या प्रार्थना पढ़ने के लिए बाध्य नहीं कर सकता।
⭐️पूर्ण सरकारी स्कूल में भी , यदि ऐसे मंत्र पढ़े जाएँ जो की किसी धर्म विशेष की पूजा न होकर ज्ञान और शांति की सार्वभौमिक कामना हों , तो उसपर रोक नहीं लगायी जा सकती है । हालांकि यह विषय फिलहाल माननीय कोर्ट के अधीन है
⭐️अनुच्छेद 25 तहत धर्म प्रचार और धर्म संरक्षण , दोनों की आज़ादी है। लेकिन माननीय सुप्रीम कोर्ट के अनुसार यह अधिकार अल्पसंख्यक के अलावा , अन्य धर्मों / आस्था को भी प्राप्त है ।
और अंत में :-
❌ मुद्दा यह बिल्कुल नहीं था कि ईसाई स्कूल में सनातनी प्रार्थना को क्यों नहीं कराया जाता है । हर अल्पसंख्यक संस्थान को चुनने की आज़ादी है ।
✅ मुद्दा यह था कि छत्तीसगढ़ का “मसीह समाज” सनातनी मंत्र पर आपत्ति क्यों कर रहा है, जबकि किसी सनातनी - सरना ने स्कूल में ईसाई प्रार्थना पर आपत्ति नहीं की है
✅ मुद्दा यह भी है कि क्या “secularism ” ( धर्मनिरपेक्षता ) सभी वर्ग / धर्म की जिम्मेदारी नहीं हैं ?
✅ जब भी गैर-अल्पसंख्यक अनुच्छेद 25 तहत अपने धर्म संरक्षण की बात करते हैं , तो उन्हें “सांप्रदायिक” या “असहिष्णु” कैसे कहा जाता है ?
✅संवैधानिक अधिकार सबके लिए एक समान हैं । अतः मेरे विचार से , सभी धर्म और वर्ग को , समान रूप से सच्ची “धर्म निरपेक्षता” दिखानी चाहिए ।
✅ ईसाई प्रभु की स्तुति करने से सनातनी- सरना बच्चों / अभिभावक को अपनी आस्था पर कोई खतरा नज़र नहीं आया । अतः , छत्तीसगढ़ के मसीह समाज को भी अपने आपत्ति पर पुनः विचार करना चाहिए
अपने पैतृक निवास, सहरसा के मुरादपुर गाँव में हम लोगों ने मखाना प्रोसेसिंग प्लांट की शुरुआत की है ।
House of Mithila के नाम से शुरू हुए इस प्लांट की क्षमता 30 टन प्रति महीने की है ।
इस प्लांट के शुरू होने से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से करीब 250 लोगों को रोजगार के बेहतर साधन उपलब्ध होंगे ।
साथ ही साथ सहरसा जिले के किसान, जो मजबूरीवश अन्य जिलों में कम मूल्य पर मखाना बेचते थे उन्हें भी काफ़ी फ़ायदा मिलेगा ।
हमारे साथ जुड़ने वाले सभी किसान साथियों के लिए हम लोग उन्हें हेल्थ इन्श्योरेंस भी मुहैया करा रहे हैं ।
सहरसा का मखाना शांघाई तक पहुंचे ये हमारा प्रयास रहेगा ।।।
ये किसी जाती तक सिमीत नही है, हमारे यहां मिथिला मे दामाद प्रजाति के लिए ये व्यवस्था किया जाता है, अब भाई @AnilYadavmedia1 तुम्हारे ससुराल मे भूंजा खिलाकर भेज दिया जाता है, तो इसमे इनका क्या कसूर , बंगाल मे जमाई षष्ठी नाम से एक त्योहार मनाया जाता है , कभी ये सब भी पढ लिया करो।।
आदिवासी समाज का वनवासी राम भगवान से अटूट सम्बंध है
“सभी वनवासी राम को पूजते हैं । जब राम भगवान वनवास में थे , तो हम आदिवासी ही परिवार की तरह उनके साथ थे । और लंका पर युद्ध में भी उनको विजय दिलायी थी ।। जब भी आधुनिक युग में राम राज्य बनेगा , हम आदिवासियों का आज भी बहुमूल्य योगदान होगा ।”
👉🏽 लोहरदग्गा में राम दरबार मंदिर के शिलान्यास पूजा में शामिल होने का आमंत्रण दिया गया था । यह सरना -सनातन एकता और भाईचारे का प्रतीक है
👉🏽कुछ विघटनकारी शक्तियां बार बार ये भ्रम फैलाती है , की सनातनी समाज आदिवासी को शुद्र और अछूत मानते हैं । इस प्रकार के पूजा पद्दति से साबित होता है की आदिवासी को शुद्र या अछूत नहीं माना जाता है , ना भेदभाव किया जाता है
कॉंग्रेस का काला अध्याय
101. 25 जून 1975 इंदिरा गांधी जी ने भारत के संविधान को ख़त्म कर दिया,संविधान के स्थान पर राजतंत्र,तानाशाही लागू हो गई आपातकाल लागू हो गया ।जनता के मौलिक अधिकार ख़त्म,सभी विपक्षी नेता जेल के अंदर,अख़बारों का छपना बंद,सरकारी दफ़्तरों पर सेना का नियंत्रण ।जगह जगह पर पुलिस की बर्बरता,विरोध का मतलब गोली,जो बच गए उनको जेल ।कारण एक ही ऐन केन सत्ता में बने रहना, हाईकोर्ट द्वारा अपनी लोकसभा सदस्यता को सुप्रीम कोर्ट से बचाना ।भय,दहशत का माहौल बनाना ।लोकतंत्र का सबसे बुरा दौर यह भारत का आपातकाल है
#CongressDarkHistory
झारखंड भी गजब है।
संविदा आधारित (Contract based) यानि अस्थायी (Temporary) पदों पर मात्र 262 नौकरियों पर नियुक्ति के लिए पूरे राज्य के अखबारों में ढिंढोरा पिटवाया जाता है, बकायदा कार्यक्रम भी आयोजित किया जाता है।
जबकि वृद्धों, विधवा महिलाओं तथा दिव्यांग लोगों का पेंशन कई महीनों से लंबित है। सरकारी कर्मचारियों के वेतन पर ट्रेजरी घोटाले का साया है, और विकास योजनाएं धन के अभाव ने रुकी हुई हैं।
भरत तिवारी जी का एनकाउंटर का Video है ...
पुलिस से लड़ रहे थे फिर माँ बाप के कहने पर खुद को
आत्मसमर्पण कर दिये थे ,,
और आत्मसर्मपण करने के बाद इनका एनकाउंटर हो
गया था ।
Shibu Soren took a 50 lac bribe to save the Congress govt. The case was so open & shut that a judge even ordered his bribe to be taxed. But the Supreme Court let him off as bribes came under Parliamentary privilege.
Yesterday, Mr Soren was posthumously awarded the Padmabhushan.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के जनसेवा के 25 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर शुरू की गई ‘नमो एम्बुलेंस’ सेवा संताल परगना के दूरदराज क्षेत्रों के लिए जीवनरक्षक पहल साबित होगी।
24 घंटे उपलब्ध रहने वाली अत्याधुनिक एम्बुलेंस सेवाओं से अब जरूरतमंद मरीजों को समय पर चिकित्सा सहायता मिल सकेगी और अस्पताल पहुंचने में होने वाली देरी से होने वाले नुकसान को रोका जा सकेगा।
भरत तिवारी की एक कॉल रिकॉर्डिंग कल से ही वायरल हो रही है।
उस रिकॉर्डिंग में वे कहते हुए सुनाई दे रहे हैं कि "हम भारतीय जनता पार्टी का समर्थन अवश्य करते हैं, लेकिन अपने समाज से बड़ा कोई दल, नेता या विधायक नहीं होता।"
उनकी लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष से नहीं, बल्कि व्यवस्था और सरकार की उन कमियों से थी जो समाज के हितों के विरुद्ध थीं।
वे हमेशा अपने समाज के अधिकारों और कल्याण के लिए आवाज़ उठाते रहे तथा सत्ता और प्रशासन से संघर्ष करते रहे।
भरत तिवारी हजारों गरीब और जरूरतमंद लोगों के मसीहा बन चुके थे। उन्होंने जाति और धर्म से ऊपर उठकर हर वर्ग के लोगों की सहायता की।
ऐसे वीर, साहसी और समाजहितैषी भाई को मेरा शत-शत नमन। 🙏