PK ने कहा — “हमने जो पैसा लिया, उसे चेक में लिया, GST भरा और जो पैसा बचा उसका टैक्स दिया।”
लेकिन पत्रकार ने तुरंत एक सवाल उठाया…
“अगर पैसा देने वाला ही ऐसी संस्था हो जो Black Money के लिए notorious हो तो?”
अब PK का जवाब सुनिए…
“हम अगर उनसे Cash में पैसा लेंगे, तब तो issue है ना?”
फिर आया सबसे बड़ा सवाल 👀
मान लीजिए मैंने TMC को सलाह दी और उसके ब���ले 10 करोड़ रुपये लिए…
👉 PK ने इसके बाद जो जवाब दिया… वही इस पूरी बातचीत का सबसे interesting हिस्सा है।
जाति देखकर टिकट दोगे
जाति देखकर स्कॉलरशिप दोगे
जाति देखकर कानून पास करोगे
जाति देखकर मंत्री और राष्ट्रपति बनाओगे
जाति देखकर आयोग बनाओगे
जाति देखकर मंत्रालय बाटोगे
जाति देखकर नौकरी दोगे
जाति देखकर परीक्षा में पास करोगे
जाति देखकर पार्टी अध्यक्ष बनाओगे
फिर कहोगे कि देश में जातिवाद बढ़ रहा है।
सबसे कट्टर जातिवादी तो भारत के बेशर्म राजनैतिक दल हैं...
मैं ब्राह्मण हूँ , ना तो इस बात के लिए लज्जि��� हूं, ना गर्वित हूं! मैं आज घोषणा कर रहा हूं कि पूरे प्रदेशों की गणना कराकर बोल दे कि आज के बाद देश में किसी भी फॉर्म में जाति का कॉलम नहीं होगा सबसे पहले मैं समर्थन करूंगा, करो आओ:- कुमार विश्वास
आज के 2 साल पहले कोई ये सोच सकता था कि मंचों से ये तथ्यात्मक बात कही जाएगी? लेकिन आज निर्भीकता से कही जा रही है! इस सबका क्रेडिट आप लोगों को जाता है!
सकारात्मक और सच्चा नैरेटिव एक दिन में नहीं सेट होता, लेकिन एक दिन जरूर होता है।
JNU की VC कह रही हैं कि दलित छात्र हमेशा विक्टिम कार्ड खेलते हैं और उनको सवर्ण��ं के विरोध का नशा है, उन्होंने UGC Rules को भी पूरी तरह ग़ैर ज़रूरी बताया
शांतिश्री धुलिपुडी “पंडित” स्वयं ओबीसी समाज से आती हैं
न देश के प्रधानमंत्री ब्राह्मण ह���
न ही बिहार के मुख्यमंत्री ब्राह्मण है
तो फ़िर तीश किस बात की है इन लोगों को?
ये BJP विधायक मिथिलेश तिवारी जी है
कल इन्होंने बिहार विधानसभा में ब्राह्मणवाद’ शब्द के प्रयोग पर विपक्षी नेताओं का कड़ा विरोध किया था।
ब्राह्मणों के विरोध से से है कि ब्राह्मण ही सबसे बेस्ट है… — हरिराम यादव जी (अध्यापक)✅
ब्राह्मण विरोधियों BSDK ब्राह्मण नहीं होते तो तुम आज भी किसी की गुलामी कर रहे होते 🫵
#EqualityForAll
कैम्पसों में छात्र पार्टियाँ बनाना आरंभ करो। अलग राष्ट्र, अलग राजनैतिक पार्टी बनाने से अच्छा विकल्प यही है।
ब्रह्मेश्वर मुखिया बनो, अपमान का प्रतिशोध लो, अपनी जगह वहीं बनाओ, जहाँ तुम्हें सताया जा रहा है।
UGC: GC स्टेट नहीं, कैम्पस राजनीति में घुसो
जो लोग ‘सामान्य वर्ग के लिए अलग देश’ माँग रहे हैं, उनसे कहना चाहूँगा कि कटाक्ष तक तो ठीक है पर इस पर विश्वास करना दो स्तर पर मूर्खतापूर्ण और अनुचित है। पहला, राज्य ऐसे नहीं बन जाते, और सामान्य वर्ग पूरे देश में है तो वह स्टेट होगा कहाँ?
दूसरी बात, सामान्य वर्ग ने ही इस देश को बनाया है। इसे अपने रक्त-स्वेद से सींचा है। कटाक्ष में ही सही, पर वही वर्ग इसे त्याग कर कहीं और क्यों ज��ए? हमारे पूर्वजों ने सर कटाए, परिश्रम किया और राष्ट्र के लिए लड़े। हम क्यों छोड़ें इसे ऐसे दोमुँहे नेताओं के हाथ?
फिर करना क्या है? सर्वप्रथम, यदि राजनैतिक शक्ति दिखानी है ��ो कॉलेज कैम्पसों में जितनी भी बड़ी पार्टियों की छात्र पार्टियाँ हैं, उन्हें त्यागो। सामान्य वर्ग हर कॉलेज चुनाव लड़े, बता कर लड़े कि इस पार्टी का एकमात्र उद्देश्य सामान्य वर्ग के हितों की रक्षा है।
चाहे वह ABVP हो या कोई भी अन्य पार्टी, सबको त्यागो, युवा वर्ग अपनी पार्टी बनाए और लोगों को जागरुक करे कि ABVP वाले इस विषय पर भाजपा का बचाव करते दिख रहे हैं, ये झूठे हैं या मजबूर हैं। सीधी बात है कॉलेज म��ं मतदाताओं को आप व्यक्तिगत रूप से जानते हैं, उन्हें लामबंद कीजिए और इन अधम छात्र नेताओं का करियर खा जाइए।
आप राज्य चुनाव आदि में पार्टी बनाना चाहते हैं, और सोचते हैं उसका प्रभाव पड़ेगा तो मैं कहूँगा कि ऐसा कुछ नहीं होने वाला। प्रशांत किशोर से ले कर केजरीवाल तक ऐसे बड़े उदाहरण हैं जिनके पास पैसा और ढाँचा था, फिर भी हर सीट पर डिपोजिट जब्त करा बैठे।
आप यदि पार्टी बना भी लेंगे तब भी उसका उचित प्रभाव कम से कम पाँच वर्ष बाद दिखेगा। तो, अभी किसी भी पार्टी का जन्म, आने वाले चुनावों में सकारात्मक परिणाम नहीं ही देगा। हालाँकि, मैं यह नहीं कह रहा कि पार्टी बनाने वाले पार्टी न ही बनाएँ।
मेरा कहना यह है कि जो अभी के विकल्प हैं, वो विशुद्ध अवसरवादी हैं। उनका कोई विजन नहीं है, वो केवल आपकी भावुकता को भुनाने में लगे हुए हैं। वो पार्��ी फंड बनाएँगे, अंत में उसी भाजपा में मिल जाएँगे जिसके विरोध में वो गला फाड़ रहे हैं।
कैम्पस राजनीति से आरंभ कीजिए, नैरेटिव पर भिड़े रहिए, नेताओं को पेलते रहिए, विराट हिन्दू सम्मेलनों को बेकार बनाइए, ‘बँटेंगे तो कटेंगे’ वालों को कहिए चूरन एक्सपायर हो गया उनका। इनकी रैली हो तो वहाँ विरोध कीजिए।
ये पतितमंडली यही भाषा समझती है। जब तक संभव है इन पर दवाब बना कर नीतियाँ सही करवाएँगे, यदि ये नहीं सुधरेंगे तो कोई किसी के बाप का नौकर या बँधुआ मजदूर तो है नहीं।
कॉलेजों में चुनाव बंद करा दो, 90% ब्राह्मण घृणा समाप्त हो जाएगी। कॉलेज में चुनाव को कोई मतलब नहीं। वामपंथियों की छिनरई और जातिवादी कुंठा के अलावा छात्र चुनाव किसी काम के नहीं। कॉलेज पढ़ाई के स्थल हैं, राजनीति के नहीं।
वैसे JNU प्रशासन ने सही काम किया है।
“मारो इसको, इसको मारो” 🤬
एक ब्राह्मण लड़की को जातिवादी भीड़ ने कैसे मारने का प्रयास किया।
वीडियो में कई लोगो को थप्पड़ मारते देख सकते है।
सोचिये, एक लड़की पर इतने दरिंदे टूट पड़े।
क्या इसलिये UGC लाया गया ?
#UGCAct
DU में जो रुचि तिवारी के साथ हुआ, वह वामपंथी-अम्बेडकरवादी छात्र पार्टियों के कारण हुआ, ऐसा मानना मूर्खता है। घटना का सतही कारण तो अवश्य ही ऐसी पार्टियों के छात्र नेता हैं, पर जड़ में क्या है?
जड़ में जातिवादी तुष्टिकरण और ब्राह्मण घृणा के नारों का सामान्यीकरण है। मोदी सरकार की उपलब्धि यही है कि अब भीमवादी खुल्ला घूम रहे हैं। कल तक जो दीवारों पर ‘ब्राह्मण बनिया कैम्पस छोड़ो��, ‘देयर विल बी ब्लड’, ‘ब्राह्मणों भारत छोड़ो’ लिखा करते थे, अब वह ‘ब्राह्मणों की कब्र खुदेगी’ के नारों से होते हुए, अब एक लड़की के कपड़े फाड़ने पर आ चुकी है क्योंकि उसका नाम ‘तिवारी’ है।
वामपंथी पार्टियों को अब हम नहीं कोसते क्योंकि हम जानते हैं उन्हें सशक्त करने वाले लोग सत्ता में हैं, जो ‘बँटेंगे तो कटेंगे’ का नकली नारा रैलियों में लगा कर एकता का स्वांग रचते हैं।
जेएनयू में हाल ही में कुछ छात्रों को रस्टिकेट किया गया, जो एक अच्छा उदाहरण है, पर आगे क्या? कैम्पस में एक छात्रा के कपड़े फाड़ने के प्रयास करने वाले को जेल होनी चाहिए।
आज रुचि तिवारी के पास कौन से विधिक विकल्प हैं? क्या वह कोर्ट में ‘जातिवादी घृणा’ का आधार बना सकती है? नहीं, क्योंकि वो जिस समाज से आती है, उसके पास ऐसा कोई विकल्प नहीं। उसे कोर्ट में यह बताना होगा कि उस पर हुए अपरा�� की जड़ में जातिवादी घृणा है, पर प्रतिवादी वकील कहेगा कि ब्राह्मणों के साथ कैसा जातिवाद?
यह विषाक्त वातावरण नरेन्द्र मोदी और भाजपा की ही देन है। नाम उसी का लिया जाएगा जो ई-रिक्शा से वंदे भारत तक हर उपलब्धि का क्रेडिट लेता है। यह क्रेडिट भी मोदी जी का ही है।