EWS आरक्षण के विषय पर आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों की पीड़ा को समझते हुए आय सीमा बढ़ाने की आवश्यकता स्वीकार करने के लिए आपका आभार। यह स्वागतयोग्य है कि अब राष्ट्रीय स्तर पर भी इस बात की चर्चा हो रही है कि वर्तमान EWS व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता है।
हालाँकि केवल आय सीमा बढ़ा देना पर्याप्त नहीं होगा। आज भी बड़ी संख्या में ऐसे आर्थिक रूप से कमजोर परिवार EWS आरक्षण के लाभ से वंचित रह जाते हैं, जो वास्तविक रूप से पात्र होने के बावजूद भूमि और भवन से जुड़ी कठोर पात्रता शर्तों के कारण आवेदन तक नहीं कर पाते। ग्रामीण भारत की वास्तविकता यह है कि कई परिवारों के पास पैतृक भूमि या छोटा आवास तो है, लेकिन उनकी आय, शिक्षा और रोजगार की स्थिति उन्हें आर्थिक रूप से कमजोर ही बनाती है।
इसी विसंगति को दूर करने के लिए EWS जनजागृति यात्रा लगातार यह मांग उठा रही है कि राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत जी के नेतृत्व में लागू अधिक व्यावहारिक और न्यायसंगत EWS मॉडल का अध्ययन कर उसे राष्ट्रीय स्तर पर लागू किया जाए। मेरा मानना है कि आर्थिक कमजोरी का आकलन केवल भूमि और भवन के आधार पर नहीं, बल्कि परिवार की वास्तविक सामाजिक-आर्थिक स्थिति के आधार पर होना चाहिए।
मैं आशा करता हूँ कि केंद्र सरकार आय सीमा बढ़ाने के साथ-साथ पात्रता संबंधी उन शर्तों की भी समीक्षा करेगी, जिनके कारण सबसे अधिक जरूरतमंद और गरीब परिवार आज भी EWS आरक्षण के लाभ से वंचित हैं। यही सच्चे अर्थों में आर्थिक न्याय और समावेशी विकास की दिशा में सार्थक कदम होगा।
आरक्षण केवल गरीबी दूर करने का कार्यक्रम नहीं, बल्कि पीढ़ियों से वंचित समाज को प्रतिनिधित्व देने का संवैधानिक अधिकार है और जिन सभी वर्गों को आरक्षण का अधिकार मिला है, उनका यह अधिकार हमेशा अटल रहेगा। लेकिन आज की सच्चाई यह भी है कि आर्थिक पिछड़ापन समाज में एक नई खाई और बड़े असंतोष का कारण बन रहा है। इसी आर्थिक हताशा का कुछ लोग अपनी राजनीतिक ताकत बढ़ाने के लिए इस्तेमाल करते हैं और उन समाजों के खिलाफ जानबूझकर द्वेष फैलाते हैं जिन्हें संवैधानिक रूप से आरक्षण मिला हुआ है।
इस सामाजिक खाई और असंतोष को दूर करने के लिए मेरा दृढ़ मत है कि EWS (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) की आय सीमा ₹8 लाख से बढ़ाकर ₹12-15 लाख की जानी चाहिए, जिस पर हमारा मंत्रालय और नीति आयोग गंभीरता से विचार भी कर रहे हैं। आर्थिक विषमता को हल किए बिना सच्चे सामाजिक सौहार्द की कल्पना नहीं की जा सकती। हमारी सरकार ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ के मंत्र पर निष्ठा से काम कर रही है, जिसका लक्ष्य यही है कि गरीबी की आड़ में समाज में नफरत न फैले और हर कमजोर नागरिक को उसका न्यायपूर्ण हक़ मिल सके।