मुताला शक पैदा करता है, शक तजस्सुस पैदा करता है,
तजस्सुस सवाल पैदा करता है, सवाल तहक़ीक़ पैदा करता है..
तहक़ीक़ इल्म पैदा करती है, इल्म शऊर पैदा करता है,
शऊर तहरीक पैदा करता है और तहरीक एक आज़ादी पैदा करती है।”
मुनाफ़िक़ लोग इतने अच्छे और बा-अदब क्यों नज़र आते हैं?
मैंने कहा...मुनाफ़िक़ों को बड़े क़रीब से देखा है मैंने,
यक़ीन मानो बड़े ही बा-अदब होते हैं।
हक़ीक़त यह है: हर मीठी ज़बान वाला मुख़लिस नहीं होता,
कुछ लोग अदब से सलाम करते हैं और मौक़ा मिलते ही
किरदार से वार करते हैं। 🔥🌹
Please help this bull. It appears to have a serious problem with one of its hind legs, which looks deformed. Kindly arrange an immediate check-up and necessary treatment. 🙏🐂
If you’d like to help or arrange treatment, DM me for the bull’s location.
@PetaIndia
इस्लाम ने हमें रिश्तों को जोड़ने का दर्स दिया है! ख़ुद को ज़लील करवाने का नहीं...
जो शख़्स आपकी इज़्ज़त-ए-नफ़्स कुचल दे, उस से किनारा करना भी एक क़िस्म का सदका और सबर है !!
यह व्यक्ति ट्रेन के अंदर खुलेआम आग जलाकर धार्मिक कार्य कर रहा है। जब ट्रेन में बीड़ी, सिगरेट या किसी भी प्रकार की आग जलाना प्रतिबंधित है, तो ऐसी खुली आग की अनुमति कैसे दी जा सकती है? यह यात्रियों की सुरक्षा के साथ गंभीर खिलवाड़ है। कृपया मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करें।
@UIDAI
माननीय यूआईडीएआई (UIDAI) महोदय,
मैं आपसे विनम्र अनुरोध करता हूँ कि आधार में उपलब्ध अधिक से अधिक संशोधन सेवाओं को इस प्रकार विकसित किया जाए कि आवेदक स्वयं अपने स्तर पर ऑनलाइन माध्यम से आवश्यक दस्तावेज़ अपलोड कर संशोधन कर सके।
तो नागरिकों को बड़ी सुविधा मिलेगी, समय की बचत होगी तथा आधार सेवा केंद्रों पर भीड़ और कार्यभार में कमी आएगी। इससे सरकारी संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और सेवाएँ अधिक तेज़, पारदर्शी एवं प्रभावी बन सकेंगी।