कौन सो संकट मोर गरीब को जो तुमसो नहि जात है टारो।
बेगि हरो हनुमान महा प्रभु जो कछु संकट होय हमारो।।🙏
#ॐ_हं_हनुमंते_नमः🌺🙏
ज्येष्ठ माह के तृतीय #बड़े_मंगलवार' की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं!💐
🙏#हे_महावीर_करो_कल्याण🙏
संकटमोचन हनुमान जी महराज को बारम्बार प्रणाम🙏
#बड़ामंगल
#USDOJDropsAdaniCase
Adani was accused globally, attacked politically and declared “finished” by critics.
Now the US DOJ has permanently dropped the case after failing to sustain the allegations.
That ending speaks for itself.
गरम गरम है पूड़ी सब्जी हलवा है तैयार
आओ जल्दी यारों पाओ बालाजी का प्यार।।
ज्येष्ठ मास के तीसरे बड़े मंगलवार की हार्दिक शुभकामनायें।
बोलो जय श्री राम जय श्री हनुमान 🙏🚩
नाम नहीं लूंगा लेकिन
एक टकले की समाधि पर अखंड ज्योति जलाने के लिए प्रति वर्ष 9125 सिलेंडर ख़त्म हो रहे हैं क्या फायदा होता है इससे
भारतीय जनता ये जानना चाहती है
मेरे प्यारे देशवासियों
यह है मोदी जी का जलवा है जिससे पूरी दुनिया झुकती है वह दिल और दिमाग दोनों पर कब्जा कर लेते हैं
चमचों बहुत ध्यान से और गौर से देखिए
मात्र एक सेल्फी लेने के लिए इत��ी हाय तौबा
आपके क्या विचार है ?
ऋषि कहते थे — तुम्हारे भीतर एक “सूक्ष्म शरीर” भी है… और अधिकांश लोग पूरी जिं���गी उससे अनजान रहते हैं
उपनिषदों का ज्ञान केवल शरीर ��र मन तक सीमित नहीं है।
ऋषि कहते थे कि मनुष्य केवल यह दिखाई देने वाला शरीर नहीं है। उसके भीतर और भी परतें हैं — सूक्ष्म, अदृश्य और अत्यंत शक्तिशाली।
लेकिन समस्या यह है कि आज का इंसान केवल स्थूल शरीर को ही “मैं” मानकर जी रहा है।
इसीलिए वह अपने भीतर की वास्तविक शक्तियों और अवस्थाओं से अनजान रह जाता है।
तैत्तिरीय उपनिषद में “पंचकोश” का वर्णन आता है।
ऋषि कहते हैं कि मनुष्य पाँच परतों से बना ह��:
• अन्नमय कोश — स्थूल शरीर
• प्राणमय कोश — प्राण की परत
• मनोमय कोश — मन की परत
• विज्ञानमय कोश — बुद्धि और चेतना की परत
• आनंदमय कोश — आनंद की सूक्ष्म अवस्था
गहराई से समझो — तुम केवल शरीर नहीं हो।
शरीर तो सबसे बाहरी परत है।
उपनिषद कहते हैं कि जब साधक ध्यान में भीतर उतरता है, तब धीरे-धीरे वह इन सूक्ष्म स्तरों को अनुभव करना शुरू करता है। उस��� महसूस होने लगता है कि उसके भीतर केवल विचार नहीं चल रहे… ऊर्जा भी चल रही है।
इसीलिए पुराने योगी “प्राण” को इतना महत्व देते थे।
वे जानते थे कि:
जहाँ प्राण जाएगा, वहीं मन जाएगा।
यदि प्राण नीचे की इच्छाओं में बिखरा रहेगा, तो चेतना भी भारी और अशांत रहेगी।
यदि प्राण ऊपर उठने लगे, तो मन स्वतः शांत होने लगता है।
सीधी बात यह है कि अधिकांश लोग केवल शरीर को संभालते हैं… लेकिन भीतर की ऊर्जा को नहीं सम���ते।
आज लोग शरीर के लिए:
• gym करते हैं
• भोजन सुधारते हैं
• बाहरी personality बनाते हैं
लेकिन भीतर:
• मन बिखरा हुआ है
• प्राण कमजोर है
• चेतना भारी है
• इच्छाएँ नियंत्रण में नहीं हैं
यही कारण है कि बाहर से strong दिखने वाला व्यक्ति भीतर से टूट जाता है।
गहराई से समझो — सूक्ष्म शरीर स्थूल शरीर से अधिक शक्तिशाली है।
इसीलिए कई बार:
• किसी स्थान पर जाते ही भारीपन महसूस होता है
• कुछ लोगों के पास शांति महसूस होती है
• कुछ लोगों के पास बेचैनी बढ़ती है
• बिना शब्दों के भी ऊर्जा का अनुभव होता है
ऋषि कहते थे कि यह केवल psychology नहीं, ऊर्जा का विज्ञान है।
पुराने आश्रमों में इसलिए:
• शुद्ध भोजन
• शुद्ध वाणी
• मंत्र
• अग्निहोत्र
• मौन
• ब्रह्मचर्य
• ध्यान
इन सब पर जोर दिया जाता था।
क्योंकि ये केवल धार्मिक कर्म नहीं थे… ये सूक्ष्म शरीर को शुद्ध करने की प्रक्रियाएँ थीं।
आज का जीवन सूक्ष्म शरीर को लगातार disturb कर रहा है।
• अत्यधिक वासना
• क्��ोध
• भय
• नकारात्मक संगति
• अशांत मनोरंजन
• लगातार distraction
ये सब प्राण को नीचे खींचते हैं।
इसीलिए आधुनिक मनुष्य को:
• बिना कारण थकान
• anxiety
• भारीपन
• concentration की कमी
• भीतर खालीपन
इन सबका अनुभव बढ़ता जा रहा है।
उपनिषद कहते हैं कि साधना का वास्तविक उद्देश्य केवल जानकारी इकट्ठा करना नहीं… बल्कि चेतना को refine करना है।
यही कारण है कि ऋषि घंटों ध्यान में बैठते थे।
वे केवल विचार शांत नहीं कर रहे थे…
वे सूक्ष्म शरीर को जागृत कर रहे थे।
गहराई से समझो — जब साधक भीतर गहराई में उतरता है, तब उसे महसूस होने लगता है कि उसके भीतर एक ऊर्जा-प्रवाह चल रहा है।
इसीलिए योग में:
• नाड़ी
• चक्र
• कुंडलिनी
• प्राण
इन सबका वर्णन आता है।
ये केवल प्रतीक नहीं हैं।
ऋषियों के लिए ये अनुभव की गई वास्तविकताएँ थीं।
लेकिन उपनिषद चेतावनी भी देते हैं:
यदि मन शुद्ध न हो, तो शक्ति भी अहंकार बन सकती है।
इसीलिए पहले शुद्धि… फिर शक्ति।
एक छोटा अभ्यास करो:
आज रात शांत बैठो।
1. आँखें बंद करो
2. साँस को धीरे-धीरे महसूस करो
3. ध्यान छाती और नाभि के बीच लाओ
4. observe करो — भीतर ऊर्जा कैसी महसूस हो रही है
5. केवल महसूस करो… कल्पना मत करो
धीरे-धीरे तुम्हें महसूस होगा कि तुम्हारे भीतर केवल विचार नहीं, एक जीवित ऊर्जा भी चल रही है।
यहीं से सूक्ष्म साधना शुरू होती है।
उपनिषद कहते हैं कि जिसने केवल शरीर को जाना, उसने जीवन का बाहरी भाग जाना।
लेकिन जिसने भीत�� की चेतना और प्राण को जान लिया… उसने अस्तित्व का रहस्य छू लिया।
अंतिम सत्य:
मनुष्य केवल मांस और हड्डियों का शरीर नहीं है… वह चलती हुई ��ेतना और ऊर्जा का रहस्य है।
For months, some political actors built entire campaigns around allegations against Gautam Adani—as if an indictment itself was a conviction.
Now that the case has collapsed under legal scrutiny, where is the accountability? Where is the apology? Where is the respect for due process?
In constitutional democracies, allegations are tested in law—not weaponised for endless political theatre.
When facts change, serious people confront them. Propagandists simply move to the next headline.
#RuleOfLaw #FactsMatter
आज के दौर में कई युवा शिक्षक सम्मान नहीं,बल्कि शोषण का सामना कर रहे है।
हिंदी बोलने पर जुर्माना लगाया गया इस से बड़ा क्या दुर्भाग्य होगा।
जिस देश में गुरु को पूजनीय माना जाता है,वहां शिक्षकों की ऐसी स्थ��ति बेहद चिंताजनक है।
शिक्षकों का सम्मान और अधिकार सुरक्षित रहना आवश्यक है।
रेल टिकट बुक करते समय हमेशा अपना मोबाइल नंबर ही दर्ज कराएं। ✅
ताकि ट्रेन अपडेट और रिफंड की जानकारी सीधे आपको मिले। 🚆
की शानदार सेवाओं के लिए धन्यवाद। 🙏
@AshwiniVaishnaw@IRCTCofficial