@ncert The 2026-27 session is well underway, but Class 9 students are still suffering without the new NCERT Social Science textbook "Gateway to Social Science". Why is it still missing from the portal and markets? Please expedite! 🙏 @ncert@EduMinOfIndia@cbseindia29#NCERT#CBSE
UGC nayi guidelines laaya SC, ST, OBC ke protection ke naam par.
Par ek simple sawal hai:
General category ke students ke liye kya system hai?
Protection sabke liye ya sirf selective?
कैंपस में किसी भी प्रकार का जातिगत भेदभाव गलत है, और भारत में पहले ही कई छात्र इसके दुष्परिणाम झेल चुके हैं। लेकिन क्या कानून को समावेशी नहीं होना चाहिए और यह सुनिश्चित नहीं करना चाहिए कि सभी को समान रूप से संरक्षण मिले? फिर कानून के लागू होने में यह भेदभाव क्यों? झूठे मामलों की स्थिति में क्या होगा? दोष का निर्धारण कैसे किया जाएगा? भेदभाव को कैसे परिभाषित किया जाए- शब्दों से, कार्यों से या धारणाओं से?
कानून की लागू होने की प्रक्रिया स्पष्ट, सटीक और सभी के लिए समान होनी चाहिए।
अतः कैंपस में नकारात्मक माहौल बनाने के बजाय, मैं आग्रह करती हूँ कि UGC की यह अधिसूचना या तो वापस ली जाए या उसमें आवश्यक संशोधन किया जाए।
हाँ भाई, आउटरेज सूचकांक बढ़ रहा है अब? जिन्हें नहीं लिखना था, वो भी लिख रहे हैं। आठ दिन बाद ही सही, मेनस्ट्रीम मीडिया को उठाना पड़ रहा है ना?
कुतर्की बातों का विरोध होता रहेगा। जिन्होंने भी समर्थन दिया, दे रहे हैं, सारे मित्रों का आभार। युद्ध जारी रहेगा।
@drm_sonpur@spjdivn@RailwaySeva@RailwaySeva Train No. 12554 Vaishali Express stuck for over 5 hours! No update, passengers suffering. Please help — think about common people’s problems 🙏
@RailwaySeva Train No. 12554 (Vaishali Express) is running more than 2 hours late today (25 Oct 2025). Kindly look into the reason for the delay. PNR 2936925936
यदि आप किसी पार्टी या संस्था के समर्थक हैं और आप यह देख रहे हैं कि वह पार्टी अपने मूल्यों से भटक रही है, तो यह आपका कर्तव्य है कि आप उस पर अपने स्वर तीव्र करें।
यदि आप कार्यकर्ता हैं, या कट्टर समर्थक की श्रेणी में स्वयं को रखते हैं, तो आपका विरोध करना नितांत आवश्यकता बन जाता है। यहाँ यदि आप चुप हैं, या जस्टिफाय करते हैं, तो आप उसी पार्टी के अंत्येष्टि की लकड़ियाँ बटोर रहे हैं।
सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोगों को कई बार धरातल नहीं दिखता क्योंकि भूमि और नेत्रों के मध्य समृद्धि की तोंद बाधा बन जाती है। ऐसी स्थिति में कार्यकर्ताओं और समर्थकों को भोंपू ले कर चिल्लाना चाहिए।
चुप रहना या अनुचित कार्यों को समर्थन देना उचित विकल्प नहीं है।