@ReetaVe19101097 हवाओं का रुख गुलशन की ओर ले गया ।
उल्फत की महक में भीगा शाम रंगीन था ।
सुकून ढूंढता रहा अल्हड़ जिंदगी,
तब नई सुबह की चाहत बहुत हसीन था ।।
@ReetaVe19101097 नादानी में पथरीली राहों में गिरकर संभलने का तजुर्बा है, फिर भी ।
गुजरते वक्त के साथ ठोकरों से गिरने का दर्द पता नहीं क्यों सहा नहीं जाता है ।।