Here are a few videos of @anjanaomkashyap and ABVP member Shreyansh. Even the audience are fixed to target the opposition.
The same guy is seen on Rubika Liyaquat, Amish Devgan and India TV debates too..
During a debate on the Ram Mandir donation controversy, Aaj Tak invited "Gen Z" audience to question the leaders on stage. But the so called audience participation appears far from neutral. One of the young men repeatedly handed the microphone is Deepak Kashyap Mishra, who has been regularly seen questioning opposition leaders in similar debates. Another participant, Shreyansh, is also associated with ABVP.
Anchors like @anjanaomkashyap routinely direct the microphone to these individuals, allowing them to challenge the opposition while defending the BJP government.
The ecosystem of defence operates at three levels:
1. The Channel will select topics to corner the opposition and defend/praise the govt.
2. The anchors themselves aggressively question the opposition and shield the government from scrutiny.
3. Even the 'independent audience' members invited to participate are supporters or members linked to ABVP/BJP
Here are a few videos of @anjanaomkashyap and ABVP member Shreyansh. Even the audience are fixed to target the opposition.
The same guy is seen on Rubika Liyaquat, Amish Devgan and India TV debates too..
मैं हनुमान गढ़ी गया था । मंदिरों में मैं बहुत पैसे बांटता हूं । कोशिश रहती है मेरी कि वहां से जेब खाली करके आऊं । किसी ने कह दिया था कि मंदिर में जो जेब खाली करके आता है फिर खाली जेब नहीं रहता । वही बात मन में बैठ गई ।
पैसे बांटते बांटते खत्म हो गए । और जैसे ही मंदिर से निकलने को हुआ चबूतरे पर एक सौ साल से ऊपर के बाबाजी बड़ी रामचरित मानस पर पंद्रह बीस डिग्री का कोण बना कर झुके पाठ कर रहे थे । बदन पर सिर्फ एक गमछा ।
मुझे लगा अननेससरी हर जगह दे दिया, जिसे देना चाहिए उसके लिए तो पैसे ही नहीं बचे । जेब में टटोला बीस रुपए थे ।
मुझे लगा बड़े संत हैं । क्या पता पैसे देने पर गुस्सा हो जाएं । मैंने सकुचाते हुए कहा - बाबा यदि हम आपको कुछ दें तो लेंगे ? बिना कुछ बोले हाथ बढ़ा दिया । मैंने बीस का नोट दिया तो रख लिया । न कोई लालसा , न इंकार , न कोई धन्यवाद । मिला ठीक , न मिला ठीक । भोजन हुआ तो राम ने करवाया, न हुआ तो राम जी ने नहीं दिया ।
ऐसे संतों से भरी अयोध्या में चंपत राय हो जाना कितने जन्मों के कुसंस्कार होंगे कि राम छू न गया , चांदी छू गया, सोच लीजिए ।
1) रामाशंकर यादव टिन्नू
2) अनुकल्प मिश्र
3) अविनाश शुक्ला
4) करुणेश पांडेय
5) लवकुश मिश्र
6) रमा शंकर मिश्र
7) सुभाष श्रीवास्तव
8) मनीष कुमार यादव
इन आठ लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ है राम मंदिर डकैती मामले में…
छोटी मछलियाँ जाल में शार्क और व्हेल समुद्र में ग़ोता लगा रही हैं अभी भी
मोहन यादव के मामले में टीवी पर बीजेपी का पक्ष सुन रहा हूँ।तर्क है कि एक ओबीसी सीएम पर आरोप लगा रहे हो।भ्रष्टाचार हुआ है तो कोर्ट जाओ।जब विपक्ष में थे तो अशोक चव्हाण का इस्तीफ़ा चाहिए था।सत्ता में हैं तो विपक्ष को मामले में कोर्ट जाना चाहिए।दोष किसी का नहीं सत्ता के चरित्र का है।
पहले लगा था ये भाजपाई चंदा चोर हैं,
फिर पता चला ये जमीन के लुटेरे हैं।
अब तो बात और आगे निकल गई है,
ये तो भगवान के दरबार में चढ़ाए गए चढ़ावे पर भी डाका डालने के आरोपों से घिरे हुए हैं। आखिर इनकी लालच की सीमा क्या है?
यति नरसिम्हा नंद का ये विवादित बयान सुनिए…
ये सुनने के बाद लगा कि कान में किसी ने शीशा पीस कर डाल दिया हो!
हे राम! अगर ये सच है तो रामलला की देखभाल के लिए ऐसे व्यक्ति को चुना है संघ वालों ने?
SIT को इस आरोप की भी जांच करनी चाहिए साथ ही सोने की गदा जो गायब है उसकी भी जांच हो
अयोध्या राम मंदिर से दान पेटिका से चढ़ावा चोरी मामले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती लगातार मुखर है। उन्होंने कहा कि,, ,,,
“जिसने चोरी की, वही जांच कैसे कर सकता है? वहां उत्तर प्रदेश और केंद्र सरकार व्यवस्था में लगी है तो जांच वही क्यों करेंगे ? जांच तो वो करेगा जो उस पक्ष में पहले से ना हो, जो निष्पक्ष हो। सरकार से क्या न्याय की उम्मीद होगी? जांच के नाम पर लीपापोती हो रही है।"
@BJP4India@INCIndia@AvdheshanandG@jyotirmathah
ईवेंट मैनेजमेंट को पहले बताना चाहिए था,
कि रस्तोगी जी सबके सामने हाथ जोड़ेंगे,
और मोदी जी से हाथ मिलाएंगे।
लेकिन ऐसा नहीं हुआ, किसी ना किसी पर तो गाज गिरेगी ही।
कुल भूमि स्वामित्व रिपोर्ट के मुताबिक, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के परिवार और रिश्तेदारों के पास 245 प्लॉट में 335 एकड़ जमीन है।
• नीलेश यादव: 108 एकड़
• गोविंद यादव: 47 एकड़
• मोहन यादव: 17 एकड़
• सीमा यादव: 11 एकड़
• वैभव यादव: 17 एकड़
• शालिनी यादव: 10 एकड़
• नारायण यादव: 19 एकड़
• नंदलाल यादव: 17 एकड़
• कलावती: 17 एकड़
• अभय यादव: 16 एकड़
• रेखा यादव: 6 एकड़
• इस मामले में 4 रियल स्टेट कंपनियों का जिक्र हुआ है और इनमें बहुमत हिस्सेदारी सीमा यादव और मोहन यादव की है
• मोहन यादव की पत्नी सीमा यादव और पुत्र वैभव से 25 एकड़ जमीन जुड़ी है। वहीं, मोहन यादव की बहन कलावती की भाभी सुनीता से 47 एकड़ जमीन जुड़ी हुई है
• तीन अलग-अलग कंपनियों में परिवार के करीबी रिश्तेदारों की बड़ी हिस्सेदारी है
• मोहन यादव के मंत्री रहने और फिर मुख्यमंत्री बनने के दौरान कई सारे रोड प्रोजेक्ट्स इन जमीनों के आसपास से निकले
: @INCMP अध्यक्ष @jitupatwari जी
ये तो सीधा हितों का टकराव है?
आखिर SIT संजय प्रसाद को अपनी रिपोर्ट कैसे सौंप सकती है?
वे तो खुद राम मंदिर ट्रस्ट के मेंबर हैं।
उनकी सुदर्शन तस्वीर ट्रस्ट की वेबसाइट पर चस्पा है।
इस लिहाज से वे खुद अपनी भूमिका को लेकर जांच के घेरे में हैं,
कि चढ़ावा चोरी का इतना बड़ा महापाप होता रहा और बतौर अपर मुख्य सचिव गृह उन्हें भनक तक नहीं लगी!!
Incompetence का इससे बड़ा उदाहऱण दूसरा क्या होगा?
SIT को जिससे पूछताछ करनी चाहिए थी, वो उन्हें अपनी रिपोर्ट सौंप रही है।
क्या कलियुग यही है?
प्रधानमंत्री जी,
इससे तो अच्छा था कि आप SIT से कहते कि वो बिल्ली के हाथ में दूध की रखवाली विषय पर कम शब्दों में एक सारगर्भित निबंध लिखती!
@PMOIndia@narendramodi@RSSorg
आखिर इतना पैसा आया कहाँ से? ❓
Indian Express: MP CM मोहन यादव के परिवार ने 335 एकड़ जमीन खरीदी।
CM बनने के बाद 168 एकड़ (137 प्लॉट, ₹45 Cr)!
ये सरकार है या प्रॉपर्टी डीलर सरकार?
सवाल सिर्फ मोहन यादव पर नहीं...
मोदी जी पर भी है!
जमीन बढ़ती गई,
जवाबदेही घटती गई।
वीडियो ↓
#MohanYadav #UjjainLandDeal