वागड़ प्रवास के दौरान…
वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप जयंती के अवसर पर बांसवाड़ा से कोटा प्रवास के बीच मार्ग में एक दृश्य मन को गहराई तक स्पर्श कर गया। तपती धूप में अकेले खड़ा एक युवा साथी, हाथों में माला लिए महावीर जी और चेहरे पर आत्मीय स्वागत का भाव।
यह केवल स्वागत नहीं था, सैकड़ो किलोमीटर दूर भी अपनेपन का एहसास था। ऐसे साथियों का स्नेह, विश्वास और बुलंद हौसला ही जनसेवा के पथ पर आगे बढ़ने की सबसे बड़ी प्रेरणा है।
आपका यह प्रेम, अपनापन और समर्पण सदैव स्मरणीय रहेगा।
Sad no Rajat Patidar in the indian squad. What else he needs to do ? Scored 501 runs strike rate almost 200 . Unfair 💔 @rrjjt_01 Easily the best middle order in India . Proper striker with good technique
वाल्मीकि समाज की बेटी की बारात ठाकुर नारायण सिंह जी की हवेली के सामने से निकल रही थी !!
फिर क्या था ठाकुर साहब ने दूल्हे समेत पूरी बारात को अपनी हवेली पर चाय नाश्ता कराया और दूल्हे को अपनी घोड़ी दी !!
ठाकुर वाल्मीकि एकता बनी रहे 🙏
कल से सोशल मीडिया पर जैसलमेर के एक डंपिंग यार्ड में गायों के खुले शव की तस्वीरें देखकर मन बेहद विचलित और व्यथित है।
जिस गाय को हम “गौ माता” कहकर सम्मान देने की बातें करते हैं, उसी के शव खुले में पड़े रहें और पूरा सिस्टम मौन है। सरकार नोटिस जारी कर अपना बचाव कर सकती है, जिम्मेदार विभाग औपचारिकताएं पूरी कर सकते हैं, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर हम एक समाज के रूप में कहाँ खड़े हैं?
क्या हमारी संवेदनाएं केवल सोशल मीडिया पोस्ट और भाषणों तक सीमित रह गई हैं? क्या गौ सेवा केवल राजनीति और दिखावे का विषय बनकर रह गई है? यदि समय रहते उचित व्यवस्था, गौशालाओं की निगरानी, चिकित्सा सुविधा और जिम्मेदार प्रबंधन होता, तो शायद ऐसी भयावह तस्वीरें देखने को नहीं मिलतीं।
यह विषय राजनीति से ऊपर उठकर मानवता और संवेदनशीलता का है। प्रशासन, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और हम सभी नागरिकों की समान जिम्मेदारी बनती है कि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
जैसलमेर की पहचान हमारी संस्कृति, परंपरा और संवेदनशील समाज से है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि यह पहचान ऐसी शर्मनाक घटनाओं से धूमिल न हो। अब ऐसे विषय पर केवल नोटिस नहीं, बल्कि जवाबदेही, ठोस कार्रवाई और स्थायी समाधान की आवश्यकता है। #Jaisalmer
'महंगाई मैन' मोदी ने आज फिर जनता पर हंटर चलाया.
• पेट्रोल और डीजल 3-3 रुपए महंगा कर दिया गया
• वहीं, CNG के दाम भी 2 रुपए बढ़ा दिए गए
चुनाव खत्म - मोदी की वसूली शुरू
I travelled through Great Nicobar today.
These are the most extraordinary forests I have ever seen in my life. Trees older than memory. Forests that took generations to grow.
The people on this island are equally beautiful - both the adivasi communities and the settlers - but they are being robbed of what is rightfully theirs.
The government calls what it is doing here a “Project.” What I have seen is not a project. It is millions of trees marked for the axe. It is 160 square kilometres of rainforest condemned to die. It is communities that have been ignored while their homes have been snatched away.
This is not development. This is destruction dressed in development’s language.
So I will say it plainly, and I will keep saying it: what is being done in Great Nicobar is one of the biggest scams and gravest crimes against this country’s natural and tribal heritage in our lifetime.
It must be stopped. And it can be stopped - if Indians choose to see what I have seen.
सिनोद स्थित सरकारी गेहूं खरीदी केंद्र पर जो मामला सामने आया है, वह अत्यंत गंभीर और चिंताजनक है। किसानों ने स्वयं गड़बड़ी पकड़ते हुए यह उजागर किया कि उनके गेहूं में खुली कटौती की जा रही थी, कैमरे बंद रखकर पूरी प्रक्रिया को संदिग्ध बनाया गया और कट्टियों की संख्या में भी हेरफेर किया जा रहा था।
किसान दिन-रात मेहनत करके अपनी फसल उगाता है, तपती धूप, ठंडी रात और हर मुश्किल को सहकर वह अन्न पैदा करता है ताकि देश का हर घर भूखा न सोए। लेकिन आज सबसे बड़ा दुख इस बात का है कि जिस किसान को उसकी मेहनत का उचित मूल्य मिलना चाहिए, वही किसान अपने ही हक़ के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है। सरकार जहां एक ओर किसानों को सही भाव देने में असमर्थ दिखाई दे रही है, वहीं दूसरी ओर खरीदी केंद्रों पर उनके गेहूं में चोरी जैसी घटनाएं सामने आना अत्यंत पीड़ादायक है।
यह केवल अनाज की चोरी नहीं है, यह उस किसान की उम्मीदों, उसके पसीने और उसके परिवार के सपनों की चोरी है। जब एक किसान अपनी मेहनत की फसल लेकर खरीदी केंद्र पर पहुंचता है, तो उसे न्याय और सम्मान की उम्मीद होती है, लेकिन वहां भी उसके साथ धोखा हो रहा है। इससे बड़ा अन्याय और क्या हो सकता है। आज जरूरत है कि किसानों की आवाज़ को गंभीरता से सुना जाए, उन्हें उनका पूरा हक़ और सम्मान दिया जाए, और इस तरह की घटनाओं पर सख्त कार्रवाई हो। क्योंकि अगर अन्नदाता ही सुरक्षित और सम्मानित नहीं रहेगा, तो देश की नींव कैसे मजबूत रह पाएगी।
80 घावोंवाले राणा सांगा के लिए मोदी सरकार के मंत्रालय ट्वीट नहीं डाल रहे.
जो धर्म बेचकर ईसाई बन गया था, उसका गुणगान हो रहा है.
जो आक्रांताओं से लड़ा, उसका मूल्य नहीं है, जिसने धर्म का अपमान किया और आक्रांताओं के रिलीजन का गुणगान किया, उसके लिए मंत्री-संतरी नतमस्तक हैं.
वोट का चक्कर बाबू भैया, वोट का चक्कर.
गत दिवस पुलिस प्रशासन द्वारा जगह-जगह रास्तों पर रतलाम कलेक्टर कार्यालय के घेराव में जा रहे साथियों को रोकने का प्रयास किया जा रहा है…
मेरा प्रशासन से स्पष्ट आग्रह है कि हमें रोकने का प्रयास कतई न करें। हम कोई गलत काम नहीं कर रहे हम अपने हक और अधिकार की बात करने कलेक्टर महोदया से मिलने जा रहे हैं।
लोकतंत्र में अपनी आवाज उठाना हमारा अधिकार है, और इसे कोई दबा नहीं सकता..!
हक और अधिकार की बात करने आई रतलाम जिले की जनता को कलेक्टर कार्यालय से दूर बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया गया है… अधिकारियों का कहना है कि “भीड़ ज्यादा है, इसलिए मैडम आपसे नहीं मिल सकतीं, लेकिन सवाल ये है क्या जनता से बड़ा भी कोई होता है..?
आज मंगलवार को जनसुनवाई का दिन है, जनता अपनी समस्याएँ लेकर आई है लेकिन जब जनता को ही दरकिनार कर दिया जाए, तो ये कैसी व्यवस्था है?
लगता है मैडम को जनता से मिलना मंजूर नहीं पर हम भी पीछे हटने वालों में से नहीं हैं, जब तक हमारी मांगों पर सुनवाई नहीं होगी, हम यहाँ से हिलने वाले नहीं हैं. यह लड़ाई हक और सम्मान की है और इसे अंत तक लड़ेंगे.
गत दिवस कलेक्टर कार्यालय घेराव के दौरान एक बहन बेहोश हो गई…
एक तरफ सरकार “लाड़ली बहना” के नाम पर योजनाओं का ढिंढोरा पीट रही है, और दूसरी तरफ उसी प्रदेश में, एक महिला कलेक्टर होते हुए भी महिलाओं की समस्याओं पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है। जब अपनी ही बहनों की आवाज़ सुनने की फुर्सत नहीं, तो फिर इन योजनाओं का दिखावा किसके लिए..?
हक़ की लड़ाई जारी हे...