तर्क दिया जाता है: "आरक्षण केवल तभी समाप्त किया जा सकता है जब जाति व्यवस्था समाप्त हो जाए।"
यदि इसी तर्क को माना जाए:
★ अगर लिंग के आधार पर भेदभाव होता है, तो क्या हमें लिंग (Gender) को ही समाप्त कर देना चाहिए?
★ अगर लोग भाषा के आधार पर भेदभाव का सामना करते हैं, तो क्या हमें भाषाओं को समाप्त कर देना चाहिए?
★ अगर राज्यों के आधार पर भेदभाव होता है, तो क्या हमें राज्यों को समाप्त कर देना चाहिए?
★ अगर धार्मिक भेदभाव मौजूद है, तो क्या हमें धर्म को ही समाप्त कर देना चाहिए?
यह बुनियादी तौर पर एक त्रुटिपूर्ण तर्क है।
वास्तविक लक्ष्य लोगों को शिक्षित करना और समान व्यवहार होना चाहिए, न कि यह दिखावा करना कि पहचान को मिटा देना ही इसका समाधान है।
खुद से पूछिए: क्या आपके दोस्तों ने कभी आपकी जाति के कारण आपके साथ भेदभाव किया है? अधिकांश लोगों के लिए इसका जवाब 'नहीं' होगा।
★ क्या उन्होंने अपनी जाति मानना छोड़ दिया? नहीं।
★ क्या उनका उपनाम (सरनेम) गायब हो गया? नहीं।
★ क्या उन्होंने इसकी वजह से आपके साथ अलग व्यवहार किया? नहीं।
समस्या भेदभावपूर्ण व्यवहार है, न कि पहचान का अस्तित्व में होना।
सूर्या चौहान को घर बुलाकर उसके दोस्त असद ने चाकू घोंपकर उसकी हत्या कर दी।
लेकिन पूरे इलाके के छिलकों को कुछ नहीं पता है। ये इनका अलतकिया है, सब मिले रहते हैं।
अक्सर हम सोचते हैं कि ये काम कर लूं बाबा खुश होंगे, ये बन जाऊं माँ खुश होंगी, क्या करूं कि पिता जी का नाम हो।
लेकिन, ये रिश्ते ही न रहे तो हमारा सब कुछ करने का क्या अर्थ होगा ?
कोई अर्थ नहीं रह जाता, फिर जीवन बंजर सा लगता है।
मुस्लिम समाज का धन्यवाद,जो इन संघियों के फर्जी गौ प्रेम को बेनकाब कर दिया |✓
आज ये इतने नंगे हो चुके है कि छुपते नज़र आ रहे है | आप ध्यान दीजिए कोई संघी भाजपाई उससे लड़ता है जो गौ के लिए लड़ता है | अभी इनकी आवाज नहीं निकल रही है |
@AmitNationlist In लोगों ने गोली नींद की दे अईयो गायक (Singer): सतवीर गुर्जर (Satveer Gurjar)लेखक/गीतकार (Lyrics): बबलू फागना को कुछ ज्यादा ही serious ले लिया
लेखक, लेखक होता है। तमाम असहमतियों के बावजूद आप उसे नज़रअंदाज़ नहीं कर सकते। यही उसकी प्रतिभा है, यही उसकी पहचान, यही उसका प्रताप।
बशीर बद्र को भले ही आज केवल उर्दू से जोड़ा जा रहा हो, उन्होंने अपनी लेखनी में अधिकतर हिंदी शब्दों का इस्तेमाल किया। 8 साल पहले का लोकसभा का ही इतिहास उठा लीजिए। राष्ट्रपति के अभी भाषण पर लाए गए धन्यवाद प्रस्ताव पर जब चर्चा चल रही थी तब तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बशीर बद्र का शेर पढ़ा:
दुश्मनी जम कर करो लेकिन ये गुंजाइश रहे
जब कभी हम दोस्त हो जाएँ तो शर्मिंदा न हों
अगले दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जवाब देने के लिए सदन में खड़े हुए। अपने वक्तृत्व व समाँ बाँधने की कला के लिए जाने जाने वाले पीएम ने भी इसके जवाब में ये पंक्तियाँ कही:
जी बहुत चाहता है सच बोलें
क्या करें हौसला नहीं होता
तब सिर्फ़ सत्तापक्ष ने ही मेजें नहीं थपथपाई थीं, बल्कि मीडिया से लेकर इंटरनेट तक पागल हो गए थे। एक तरफ़ राजनीति में रिश्तों को लेकर गुंजाइश छोड़ने की बात थी, वहीं दूसरी तरफ़ सच बोलने के साहस पर सवाल था। दोनों एक ही कवि की पंक्तियाँ थीं, लेकिन सदन में एक-दूसरे के विरोध में खड़ी थीं। एक ऐसा लेखक जिसने सिर्फ़ मुहब्बत करने वालों को ही कंटेंट नहीं दिया, बल्कि सख़्त बहसों में भी उनकी कलम की स्याही की छाप रही।
यही एक प्रभावशाली लेखक का होना है, यही बशीर बद्र का होना है।
@India_1996 Aji घंटा मैं recharge ही नहीं करवाता कॉलिंग का सिर्फ ले रखा है 199 बाकी इस समय लगभग लोग unlimited वाला प्लान लिए ही हैं Mujhe क्या ही जरूरत
आपके जानने के लिए कुछ बातें!
* अर्थव्यवस्था के मामले में भारत छठे नं पर पहुंच गया है।
* GDP मामले में भारत छठे नं पर है ।
* बाजार कैपिटल के मामले में तइवान ने भारत को पछाड़ दिया है और भारत छठे नं पर पहुंच गया है।
* पिछले दिनों मैंने एक खबर और वीडियो दिया था कि भारतीय बाजार से विदेशी निवेशक तेजी से पूंजी खींच रहे हैं और ताइवान, जापान, दक्षिण कोरिया जैसे देशों के शेयर बाजार में लगा रहे हैं।
* पिछले कुछ महीनों में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने भारतीय शेयर बाजार से करीब 2.25 लाख करोड़ रुपये (लगभग 27-28 बिलियन डॉलर) की भारी भरकम निकासी की है।
* भारत का रुपया डॉलर के मुकाबले तेजी से गिरता जा रहा है, जबकि दूसरे एशियाई देश चीन, थाइलैंड, मलेशिया जैसे देशों की मुद्रा मजबूत हो रही है। यहां तक कि पाकिस्तान की मुद्रा भी स्थिर है।
* अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्रूड ऑयल की कीमत घट रही है, जिस कारण अपनी जनता को राहत देते हुए अनेक देशों जैसे वियतनाम, स्वीडन, इटली आदि देशों ने ईंधन का दाम घटाया है, जबकि भारत में लगातार ईंधन के दाम बढ़ाए जा रहे हैं।
* मोदी सरकार के पूर्व आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम हों या सुरजीत भल्ला, सरकार को चेता रहे हैं।
* मीडिया में इस पर आप शायद ही कोई बहस देखेंगे। मीडिया में आप केवल इस पोस्ट के साथ लगाए पोस्टर जैसी खबर ही देखेंगे। धन्यवाद।
#SandeepDeo
साँप सिर्फ मेरे बिस्तर के नीचे नहीं हैं‚ तुम्हारे बिस्तर के नीचे भी हैं। तुम सो रहे हो‚ इसलिए तुम निश्चिंत हो। मैं बेचैन हूं‚ क्योंकि मैंने उन्हें देख लिया है।
याद रखना‚ 90% पारसी आबादी वाला पर्सिया मात्र 100 साल में ईरान बन गया था और अब वहाँ एक भी पारसी नहीं बचा है।
- अश्विनी उपाध्याय
> A 15 year old Gopal Sharma
> Kidnapped & brutally murdered in Greater Noida
> Subjected to unimaginable torture
> His eyes and tongue were gouged out
> No mainstream media coverage
And ZERO outrage from so-called Brahmin leaders in Uttar Pradesh.
"दूसरे के मकान पर बुलडोज़र चलाया!
फर्जी एनकाउंटर दिखाया!
जबकि RSS से था मेरा बच्चा!!"
ग्रेटर नोएडा के 15 साल के ब्राह्मण बालक गोपाल शर्मा की निर्मम हत्या पर पिता का बयान
पोस्टमार्टम रिपोर्ट! वो भी बदल दी?
फर्जी बुलडोज़र? झूठा एनकाउंटर?
जो गोपाल के पिता कह रहे वो सत्य है ? तो इसकी जांच अब CBI के हाथों देनी चाहिए
एक पुत्र की इतनी निर्मम हत्या - पिता के दर्द को समझना होगा - उन्हें न्याय दिलाना होगा
ब्राह्मण बच्चे की आंख निकाली गई, गुप्तांग काटा गया !
भीमवादी जश्न मना रहे ! मीडिया की No Coverage.
-दिलीप पाण्डेय
यूपी में एक अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण घटना घटी है । 21 मई को बच्चा गायब हुआ और 23 मई को लाश मिली । खबरगांव के यूट्यूूब चैनल ने पीड़ित परिवार से बात की तो पता ये लगा कि बच्चे के नाखूनों में कील ठोंकी हुई थी । आंखों को निकाला गया । गुप्तांग काटा गया । तेजाब फेंका गया और गलत काम करके तड़पा कर मारा गया ।
याद कीजिए हाथरस केस, जिसमें दलित बच्ची का केस था । फर्जी तरीके से ठाकुरों को फंसाया गया, बाद में सारे लोग छूट गए । जो एक व्यक्ति फंसा हुआ है उसके बारे में गांव में क्या चर्चाएं रहीं ये कोई आज भी जाकर पूछ सकता है, पूरा मामला असल में क्या है समझ में आ जाएगा । हाथरस केस में भीम आर्मी ने प्रोपागेंडा किया और पूरा नोएडा के फिल्म सिटी का मीडिया वहां पहुंचकर कर अखंड कवरेज करने लगा जबकि यहां क्योंकि ब्राह्मण बच्चा है तो सबका जमीर ठंडा पड़ गया इसलिए क्योंकि शायद सुनियोजित रूप से अंडेकरवाद और पेरियारवाद को देश में बढ़ाया जा रहा है जिसके मूल में ही ब्राह्मण विरोध है ।
मतलब ब्राह्मण लड़की रुचि तिवारी की मॉब लिंचिंग की कोशिश हो, यूजीसी लाया जाए, ब्राह्मण बच्चे की आंख निकाल ली जाए लेकिन मीडिया को कुछ नहीं कहना है, जबकि तमाम मीडिया न्यूज चैनलों में सभी अहम पदों पर अधिकांश सामान्य वर्ग के लोग ही काबिज हैं उसमें भी ब्राह्मण ज्यादा हैं ।
मैंने एक फोटो भी अपलोड किया है । सामान्य वर्ग के अधिकारों की मांग उठाने वाले एक ट्विटर चैनल पर जब इस बच्चे के लिए मांग उठाई गई तो एक भीमवादी ने उस मृतक बच्चे को ही मां बहन की गाली देते हुए लिखा है कि मर गया अच्छा हुआ ।
आप खुद सोच सकते हैं कि फुलेवाद के नाम पर देश में किस तरह ब्राह्मण विरोधी घृणा फैलाई जा रही है और इसका दुष्परिणाम किस तरह पूरे देश में लगातार सामने आ रहा है ।
-दिलीप पाण्डेय
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भारत का मौसम इतना गर्म है कि जो लोग अफोर्ड कर सकते हैं, उन्हें अपने घर में एसी जरूर लगवाना चाहिए। सरकार का भी लक्ष्य होना चाहिए कि जिसे वह मिडिल क्लास मानती है, उसके घर में एसी जरूर हो। जिसके घर में एसी नहीं है उसे मिडल क्लास नहीं माना जाए, बेसिक नीड है ये और जिससे बेसिक नीड भी पूरी नहीं हो रही है उसे मिडिल क्लास बोलके मिडिल क्लास वाला चूरन क्यों चटाना है #AC #India #CoreOfMiddleClass
🔰 ब्राह्मण कल पंडित ज़ी थे।
आज चूनमंगा हो गए।
🔰 कल प्रधानमंत्री की कुर्सी पर थे।
आज छात्रसंघ अध्यक्ष भी नहीं बन रहे।
यह वीडियो भारत के हर ब्राह्मण तक पहुंचना चाहिए।
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