The older i grow,i had noticed that be it male female or whatsoever gender everyone is filled with grief.Everyone needs a nozzle opener to the nozzle of emotions.Every week when i go to Hanuman ji in Tuesdays and Saturdays i feel myself in tears.Isit normal or am overthinking?
अपनी कहानी उतनी रहेगी चाहे बढ़ा लो, चाहे घटा लो काजल नहीं मैं, गालों का तिल हूँ मिटता नहीं मैं, कितना मिटा लो मेरा तो हटना मुश्किल बड़ा है तुम सामने से शीशा हटा लो जैसे आँखों के इशारे, तेरे पास मैं जैसे नदिया के किनारे, तेरे पास मैं
“यादों में है वो ही नशा
जो मैख़ानों में।”
“सिक्के दुःखों के सभी के खोटे”
“हाथ जो भी उठा
गर्दनें जो कटीं
वो भी मैं
वो भी तू
आदमी”
“नाम भी है मेरा
शक़्ल भी है मेरी
दोनों में जो था मैं
वो नहीं”
“मुड़ के जो देखी नैन तिजोरी
दरिया ही दरिया मिले”
मैं वापस आऊँगा के हर गीत में शब्दों के रूप में ऐसे ऐसे दहकते शोले हैं कि हर ठंडा दिल नर्म हो जाये।
शुक्रिया @Irshad_Kamil.