@elonmusk@elonmusk This is india and we know the price of freedom.
So Accept the rule and regulations of india and come to give competition to Indian companies not just like Use your puppet President Donald Duck for gaining unfair advantages.
@KESCoHQ Sir/Mam,
It's not good to giving you My personal mobile details in Public Domain.
Kindly give me alternative way of telephonic conversation.
Thank You for your attention and cooperation.
@JioCare They are sitting at your office and completely ignore your rules and regulations.
No single visit done by the Assigned Engineer
If they visit the location please demand them geo tag location with date and time and also implement otp satisfaction as security.
@reliancejio@JioCare
Sir/Mam,
What's wrong with your customer support? More than 36+Hours you are unable to provide Internet via your Fiber Connection.
As well as you failed to provide a valid reason behind this illegal Shut Down because We had already paid for this.
देश की कोई भी बीमा कंपनी हो ,बीमा बेचते वक्त लोक लुभावने वादे करके आपको बीमा बेच देती है ,
लेकिन जब आपको उस बीमें की जरूरत पड़ती है तो कोई न कोई बहाना बताकर आपको बेनिफिट देने से मना कर दिया जाता है ,
जनता के पास इसका कोई हल नहीं है बस हर बार कस्टमर केयर एक्जीक्यूटिव को कॉल लगाओ उसको पूरा इश्यू बताओ और फिर एक नई लंबी डेडलाइन का इंतजार करो ।
🚨🚨 बीमा को सुरक्षा कहा गया था, लेकिन असल में ये धैर्य परीक्षा बन चुका है।
>> प्रीमियम समय पर कटता है — ऑटो-डेबिट, SMS, ईमेल, रिमाइंडर… सब तेज़।
लेकिन जब क्लेम का वक्त आता है 👇
• फाइल “अंडर रिव्यू” में चली जाती है,
• फोन “कस्टमर केयर” में अटक जाता है,
• और मरीज “मेंटल ट्रॉमा” में।
>> यही वो सिस्टम है जिस पर @ajeetbharti सवाल उठा रहे हैं — और ये सवाल किसी एक केस का नहीं, पूरे बीमा इकोसिस्टम का है।
>> आज भारत में बीमा ऐसा प्रोडक्ट बन गया है, जिसमें रिस्क ग्राहक का है, फायदा कंपनी का है, और जवाबदेही किसी की नहीं।
@HDFCERGOGIC जैसी बड़ी कंपनियाँ भी क्लेम के समय भरोसे की जगह क्लॉज़, सब-क्लॉज़ और जांच का जाल बिछा देती हैं।
>> बीमा लेने वाला सोचता है — “मुसीबत में सहारा मिलेगा”
और सिस्टम कहता है — पहले साबित करो कि तुम सच में बीमार हो।
👉🏻 जब सुरक्षा शर्तों में उलझ जाए, तो उसे बीमा नहीं
संस्थागत असंवेदनशीलता कहा जाता है।
हेल्थ इंश्योरेंस पर GST हटाते ही इसका सीधा लाभ आम जनता को मिलना चाहिए था न कि बीमा कंपनियों को, मगर GST हटते ही बीमा कंपनियों ने बेस प्रीमियम को 8 से 12 फीसदी तक बढ़ा दिया जो साफ तौर पर जनता के साथ धोखा और सरकार के नीतिगत फैसले का दुरुपयोग है | चूंकि हेल्थ इंश्योरेंस कोई लग्ज़री व्यवस्था नहीं बल्कि ज़रूरत है क्योंकि बीमारी पहले ही इंसान को तोड़ देती है और उस पर बीमा कंपनियों की लालच भरी नीतियाँ आम आदमी की कमर तोड़ रही हैं ऐसे में GST हटने का फायदा उपभोक्ता को मिलना चाहिए था मगर उसका तोड़ बीमा कंपनियों ने निकाल लिया जो जनता के हित में नहीं है |
मेरा प्रधानमंत्री श्री @narendramodi व वित्त मंत्री श्रीमती @nsitharaman से प्रश्न है कि
1- क्या हर सुधार का लाभ सिर्फ कॉरपोरेट मुनाफे तक सीमित रहेगा ?
2- क्या IRDAI और सरकार,बीमा कम्पनियों की इस मनमर्जी पर सख़्त निगरानी रखेंगी या चुप रहेंगी ?
@PMOIndia@FinMinIndia
मुझे लगता है कि मेडिकल इंश्योरेंस , बड़े इंश्योरेंस कंपनियों के अधिकारियों और बड़े निजी अस्पतालों के बीच सांठ गांठ का जबरदस्त धंधा है जिसमें आम आदमी फंस चुका है .. एक बार लोग ये तय कर लें कि जेब में जितना पैसा है उतने का ही इलाज कराएंगे तो बड़े अस्पताल भरभरा कर ढह जाएंगे .. लूट मची है लूट .. और सुनवाई कहीं नहीं