लंबी ड्राइव वह भी बाइक से
जिंदगी का सबसे सुकून देने वाला पल होता है
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💯% तत्काल फॉलो बैक मिलेगा
✅🚀 IIT बॉम्बे के स्टूडेंट्स ने कर दिखाया कमाल!
सिर्फ ₹30 लाख (लगभग $32,000) में और 10 महीनों में उन्होंने खुद का सेमीकंडक्टर फैब बना लिया!
उन्होंने बनाया:
•DLP-बेस्ड लिथोग्राफी मशीन
•ट्यूब फर्नेस (सिलिकॉन ऑक्सीडाइज करने के लिए)
•DC प्लाज्मा स्पटर
ये स्टूडेंट्स (HackerFab IITB) अब माइक्रॉन स्तर पर पैटर्न बना रहे हैं और जल्द ही अपना पहला पूरा ट्रांजिस्टर तैयार कर लेंगे।
20 अरब डॉलर की आधुनिक चिप फैक्ट्री की तुलना में ये छोटा कदम है, लेकिन ये दिखाता है कि जानकारी और जुनून से दीवारें तोड़ी जा सकती हैं।
ये है भारत का असली युवा जो आज Tech में आत्मनिर्भरता की राह पर है! 🔥
बाक़ी कितने तो कॉकरोच बनकर घूम रहे हैं
#IITBombay #HackerFab #Semiconductor #MadeInIndia
एक चूहे ने हीरा निगल लिया।
हीरे के मालिक ने उस चूहे को मारने के लिए एक शिकारी को ठेका दे दिया।
जब शिकारी वहाँ पहुँचा तो देखा कि हजारों चूहे एक-दूसरे पर चढ़े झुंड बनाकर बैठे थे।
मगर एक चूहा उन सबसे अलग-थलग एक तरफ बैठा था।
शिकारी ने सीधा उसी चूहे को पकड़ लिया, जिसमें हीरा था।
हीरे का मालिक हैरान होकर पूछा,
"हजारों चूहों में से तुम्हें कैसे पता लगा कि यही चूहा हीरा निगला है?"
शिकारी ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया:
"बहुत आसान था...
👍जब कोई मूर्ख धनवान बन जाता है, तो वो अपने लोगों से भी मेल-मिलाप छोड़ देता है।"
मेरी बर्खास्तगी ईस्ट इंडिया बीजेपी के विजय रथ के ताबूत की आखिरी कील साबित होगी.... बर्खास्त सिपाही सुनील शुक्ला बीजीपी को अल्टीमेटम
पुलिस महकमे में भ्रष्टाचार की आवाज उठाने वाले सिपाही सुनील कुमार शुक्ला को बर्खास्त कर दिया गया। क्रांति इतनी आसान नहीं होती। इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ती है। जैसे ईमानदार सिपाही सुनील कुमार शुक्ला ने चुकाई।
अनिल मिश्रा जी ने कहा,पैरों में 3 गोली मारने के बाद भी वीर,भरत तिवारी हँसता हुआ ,भारत माता की जय बोलता रहा😭और पुलिस की गाड़ी में बैठ गया,फिर गाड़ी में बैठकर 2 गोली ,उन दरिंदो ने उस निर्हथे के पेट मे मार दी😡,अंडकोष में मार दी😡,ऐसे दरिंदे वर्दीधारी रक्षक तो हरगिज़ नही हो सकते😡,उनको सजा मिलनी ही चाहिए😡
हर बात के लिए सरकार ही जिम्मेदार नहीं होती। या तो लोग यह जान और पहचान चुके हैं कि यहां कोई पवित्र नगरी नहीं है, और अगर उनको यह पता है तो फिर वह जानबूझकर इसे अपमानित करने का काम कर रहे हैं।
वरना जितनी भीड़ मंदिरों में लगती है उतनी भीड़ अगर सड़कों पर साफ सफाई के लिए निकल आती तो आज यह दिल और आस्था को दहलाने वाला मंजर देखने को ना मिलता है।
आज भक्ति केवल मन्नतवाद, पाप मोचन व संकट हरण के लिए रह गयी है, आत्मिक उत्थान के लिए नहीं।
ये स्वतंत्र भारद्वाज हैं और दिल्ली में रहते है। ये सोशल मीडिया पर सनातन धर्म और ब्राह्मणों के खिलाफ की जाने वाली टिप्पणियों का जवाब देने के लिए जाने जाते है।
इनके खिलाफ SC/ST एक्ट और हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज किया जायेगा। ऐसी सूचना आ रही है। दरअसल 3-4 दिन पहले जंतर-मंतर पर एक लड़की आई थी। जो ख़ुद को हिंदू नहीं मानती। और सोशल मीडिया पर हिंदू धर्म के खिलाफ अभद्र टिप्पणियां करती है। जिसे लेकर स्वतंत्र भारद्वाज की उस युवती के पिता से कहासुनी हो गई। और बात हाथापाई तक पहुंच गई। जिसमें लड़की के पिता के सिर पर चोट लग गई।
अब इसी घटना को लेकर खबर यह है कि स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ SC/ST एक्ट और हत्या के प्रयास का मामला दर्ज करने की तैयारी की जा रही है।
आंबेडकरवाद का कोई अलग अस्तित्व है ही नहीं
ब्राह्मण विद्वेष के आधार पर टिका हुआ है
ब्राह्मणों को प्रताड़ित करना यही आंबेडकरवाद का एकमेव लक्ष्य होता है।
उनके नाम भीम, राम, ओम, स्वामी, वामन, परशुराम आदि हिंदू ग्रंथों से ही रखा होता है @dromsudhaa@SwamiPMaurya@WamanCMeshram
कन्हैया लाल हत्याकांड…!!
दो लोग आए…
कन्हैया लाल की हत्या की…
सोशल मीडिया पर लाइव आकर हत्या क़बूल की…
संदेश पहुँच गया… मक़सद पूरा हो गया…
और अपनी नज़रों में न्याय भी कर दिया…
लेकिन भारतीय अदालतें आज तक सबूतों और गवाहों का इंतज़ार कर रही हैं…!!
अंधा, बहरा, लूला, लंगड़ा क़ानून…
'पासपोर्ट भारत से बाहर हमारी भारतीय नागरिकता का पुख्ता प्रमाण है।
भारत में मुझे अपनी नागरिकता कैसे साबित करनी है, इसका जवाब इस बात पर निर्भर करता है कि मुझे किस उद्देश्य के लिए अपनी नागरिकता साबित करनी है।'
: हरीश साल्वे, सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील
यूपी पुलिस विभाग में भ्रष्टाचार के खिलाफ़ आवाज उठाने वाले कांस्टेबल सुनील कुमार शुक्ला को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया है। इन्होंने वीडियो बनाकर अपने सीनियर अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के बेहद गंभीर आरोप लगाए थे।
इस मामले की जांच समिति ने सुनील शुक्ला को भ्रष्टाचार के साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए कहा था। जिसे यह प्रस्तुत नहीं कर सके। बाकि आप प्रेस विज्ञप्ति पढ़ सकते है।
@ImSoniya24 बस ईसाई मिशनरी यही चाहते थे
ब्राह्मणों द्वारा लड़के और लड़की दोनों को धार्मिक और संस्कारवान बनाने के लिए अनेक सामाजिक क्रिया कलाप इनसे करवाया जाता था परिवार एक
फिर आया बाबा का संविधान जिसमें ईसाइयत की बहुलता है और संस्कार और सनातनी रीति रिवाज को आडंबर बताया
अब रिश्ता मतलब...
बुड्ढे की उम्र पक गई लेकिन अक्ल अभी तक नहीं आई। पहले देवी देवताओं का अपमान किया अब जब कानून का डंडा पिछवाड़ी में जाने को हुआ अब डर माफ़ीवीर बन रहा है ।
ध्यान रहे डर से माफी वीर बन रहा है लेकिन सोच वही है नीली जहरीली । ऐसे लोगों को माफी नहीं कानून के हवाले करना चाहिए।
@RccShashank1 जब सनातनी रीति रिवाज से शादी होती थी तो
ऐसी घटना नहीं होती थी
जबसे आंबेडकर के बनाए संविधान से शादी होने लगी तब से यह घटना बढ़ गई
रिश्ते अम्बेडकरवाद से नहीं ब्राह्मणवादी संस्कार से छलने दो
अहमदाबाद_या_कर्णावती
उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, बंगाल आदि प्रांतों के कई प्राचीन हिंदू नगरो के बदले गये मुस्लिम नाम हटाकर पुनः प्राचीन नाम रखने का अभियान पिछले बारह वर्षों से चल रहा है।
मैं PMO India के माध्यम से आदरणीय नरेन्द्र मोदी जी और गृह मंत्री श्री Amit Shah जी से जानना चाहता हूँ पिछले छब्बीस वर्षों से गुजरात में और बारह वर्ष से केन्द्र सरकार में सरकार होने पर भी गुजरात के माथे पर मुस्लिम गुलामी के कलंक नाम #अहमदाबाद को क्यों ढोया जा रहा है जबकि भाजपा ने गुजरात में सत्ता में आने से पहले यह मामला जोर शोर से उठाया था।
क्या यह मान लिया जाय कि हिंदू व हिंदुत्व का दायित्व भारत के शेष भाग का है और गुजरात का दायित्व सिर्फ अम्बानी और अडानी का पोषण है या यह मान लिया जाय कि गुजरातियों को सिर्फ पैसे से मतलब है और हिंदुत्व गौरव केवल व्यापार का माध्यम है।
मैं पिछले बारह वर्ष से देख रहा हूँ कि बनारस, अयोध्या और हर जगह जहाँ हिंदुत्व का उत्थान होता है गुजराती भाई बिजिनेस को पहुँच जाते हैं लेकिन अपनी धोती में लगे इस गुलामी के नाम की टट्टी 'अहमदाबाद' को हटाने में उन्हें कोई रुचि नहीं है।
मैं इस विषय को कई वर्षो से अवॉयड कर रहा था लेकिन अब यह हिपोक्रेसी के रूप में दिखाई दे रहा है।
हाथ में पि*स्टल थी फिर भी टिगर नहीं दबाया क्योंकि भरत तिवारी लड़ाई जितने नहीं विचारों की क्रांति जगाने आए थे
वो पुलिस से भगाना चाहते थे तो भाग सकते थे लड़ना चाहते तो लड़ सकते थे मगर उन्होंने आत्मसमर्पण चुना
ताकि उनकी आवाज अदालत से पूरे देश तक पहुंचे
पिस्टल हाथ में थी मगर असली हथि*यार उनका हौसला था
जिसे प्रशासन की नींद उड़ा दी ,,
क्रांतिकारी वह नहीं जो सिर्फ गो*ली चलाएं क्रांतिकारी वह है जो अपने विचारों के लिए हंसते-हंसते फां*सी का फंदा चुम ले ।