आज 49, सिविल लाइन्स पर मीडिया के साथियों से बातचीत:
नेता प्रतिपक्ष श्री राहुल गाँधी के कोटा दौरे को लेकर मीडिया के सवाल का जवाब:
"देखिए, राहुल गांधी जी ने युवाओं के लिए जो देशव्यापी कार्यक्रम दिया है, उसका तमाम युवा साथियों ने बढ़-चढ़कर स्वागत किया है। आखिरकार कोई तो है जो देश के युवाओं की आवाज बुलंद कर रहा है। इसीलिए उन्होंने अपने इस अभियान की शुरुआत कोटा से की है, जो आईआईटी और तमाम प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग का एक बड़ा हब (केंद्र) बना हुआ है।
अब देखिए, कल ही राजस्थान के नवलगढ़ में एक और छात्र ने आत्महत्या कर ली। मेरी जानकारी के अनुसार, पिछले कुछ ही दिनों में यह दूसरी या तीसरी दुखद घटना है। पूरे देश के भीतर न जाने कितने युवा अवसाद में आकर आत्महत्या कर रहे हैं, लेकिन सरकार इसका कोई वास्तविक आंकड़ा देश के सामने नहीं रखती। आज देश में बेहद गंभीर स्थिति बन गई है। चाहे एसएससी (SSC) की परीक्षा हो या नीट (NEET) की, जिस प्रकार एक के बाद एक पेपर लीक हुए हैं, उससे व्यवस्था पर से युवाओं का विश्वास पूरी तरह समाप्त हो गया है। आप खुद सोच सकते हैं कि यह कितना बड़ा देशव्यापी मुद्दा बन चुका है।
इसी गंभीर संदेश को केंद्र सरकार तक पहुँचाने के लिए और युवाओं की आवाज उठाने के लिए राहुल जी सड़कों पर हैं। विपक्ष ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा माँगा, लेकिन सरकार उन्हें हटाने को तैयार नहीं है। लोकतंत्र (डेमोक्रेसी) का तो पहला नियम यह होता है कि अगर जनभावना और जनता की पुरजोर माँग हो, तो सरकार उस पर तुरंत सख्त कार्रवाई करे; लेकिन यह सरकार पूरी तरह संवेदनहीन बनी हुई है, जो इस देश का बड़ा दुर्भाग्य है।
इस एनडीए (NDA) सरकार और विशेष रूप से भाजपा के कारनामों का नतीजा यह है कि आज चुनाव आयोग (इलेक्शन कमीशन) से लेकर न्यायपालिका (जुडिशियरी) तक, और सीबीआई, ईडी या इनकम टैक्स जैसी तमाम केंद्रीय एजेंसियां दबाव में हैं। चुनाव आयोग की भूमिका तो एक एजेंट जैसी दिखाई देने लगी है; हमने खुद देखा कि बिहार और बंगाल के चुनावों में क्या हुआ। देश के भीतर जो यह वर्तमान परिस्थितियां बनी हैं, वे धीरे-धीरे लोकतंत्र के लिए बहुत खतरनाक होती जा रही हैं। अगर यही हाल रहा, तो देश में लोकतंत्र बचेगा कहाँ?
ये लोग 'कांग्रेस मुक्त भारत' की बात करते हैं और विपक्षी पार्टियों को समाप्त करने की वकालत करते हैं। लेकिन इन्हें समझना चाहिए कि बिना मजबूत प्रतिपक्ष के, सत्ता पक्ष का क्या वजूद रह जाएगा? ये लोग सब कुछ समझते हुए भी जानबूझकर ऐसी स्थिति पैदा करना चाहते हैं जिससे देश में सिर्फ एक पार्टी का राज कायम हो जाए और लोकतंत्र केवल नाम मात्र का रह जाए, ठीक वैसे ही, जैसे चीन में कोई वास्तविक लोकतंत्र नहीं है और वहाँ विपक्ष नाम मात्र का है। अगर हमारा चुनाव आयोग भी वैसा ही हो जाएगा, तो देश का भविष्य क्या होगा? यह स्थिति इस देश में कभी नहीं बननी चाहिए। इसीलिए मैं बार-बार युवाओं और छात्रों से कहता हूँ कि आप आगे आइए, राजनीति में कदम रखिए और लोकतांत्रिक विचारधारा को समझिए। यह देश के लिए बहुत संकट की घड़ी है।
आज देश और प्रदेश का माहौल ऐसा बना दिया गया है कि कोई बुनियादी समस्याओं पर विरोध प्रदर्शन भी नहीं कर सकता। अभी हाल ही में जोधपुर में, जो हमारे कानून मंत्री जी का गृह क्षेत्र है, वहाँ जनता ने पानी के संकट को लेकर प्रदर्शन किया, तो उनके खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज कर दी गई। हालात इतने बिगड़ गए कि जोधपुर शहर में केवल इसलिए धारा 144 लगा दी गई ताकि जनता का यह आक्रोश बड़े आंदोलन का रूप न ले ले। बीकानेर में तो खुद भाजपा के लोग बिजली संकट को लेकर माँग करने गए थे, तो वहाँ के एडिशनल एसपी ने उन्हें ही धमका दिया। वहाँ तीखी बहस हो गई और उन्हें धरने पर बैठना पड़ा। जिस प्रदेश में ऐसी स्थिति हो कि 'अक्रॉस द पार्टी लाइन' (दलगत राजनीति से ऊपर उठकर) खुद सत्ताधारी दल के लोग भी सड़कों पर आने को मजबूर हो रहे हों, तो आप अंदाजा लगा सकते हैं कि आम जनता पर क्या बीत रही होगी!
मेरे पास रोज लोग मिलने आते हैं और बिजली-पानी के संकट की ऐसी-ऐसी कहानियां सुनाते हैं कि रूह काँप जाए। पूरे प्रदेश में पानी और बिजली को लेकर त्राहि-त्राहि मची हुई है, लेकिन सरकार चैन की नींद सो रही है। इन्हें इस बात का अहसास तक नहीं है कि धरातल पर वास्तव में क्या समस्या है; और ऐसा इसलिए है क्योंकि इस सरकार में अनुभव की भारी कमी है।
मैं बार-बार कहता हूँ कि 'अनुभव का कोई विकल्प नहीं होता।' अनुभवहीनता के कारण ही ये लोग जनता की परवाह नहीं कर रहे हैं, बल्कि उल्टा दावा करते हैं कि प्रदेश में कोई समस्या ही नहीं है। अरे, आप कम से कम यह स्वीकार तो करो कि समस्या है और हम इसे ठीक करने का प्रयास कर रहे हैं; तब जाकर जनता को भी लगेगा कि सरकार कोशिश कर रही है। लेकिन इनकी अप्रोच (दृष्टिकोण) पूरी तरह नकारात्मक और संवेदनहीन है।
इनका काम करने का तरीका यही बन चुका है। अत्याचार और तानाशाही का स्तर देखिए कि मंदसौर में मीनाक्षी नटराजन जी का नामांकन (परचा) ही खारिज कर दिया गया! आखिर हमारा मुल्क किस दिशा में आगे बढ़ रहा है?
अब देश के माननीय लोकसभा स्पीकर साहब के संसदीय क्षेत्र (कोटा) में देश के नेता प्रतिपक्ष श्री राहुल गांधी जी आ रहे हैं। कायदे से तो उनका स्वागत होना चाहिए, क्योंकि जिस सदन के वो स्पीकर हैं, उसी सदन के नेता प्रतिपक्ष वहाँ आ रहे हैं। लेकिन स्वागत करने की बजाय वहाँ ऐसा माहौल बना दिया गया जैसे खुद ओम बिरला जी इस दौरे के खिलाफ हैं और कोई भी उनके कार्यक्रम में न जाए। स्पीकर साहब को इस पर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए कि ऐसी नौबत क्यों आई और यह सब किसके इशारे पर हो रहा है?
देश के युवाओं के न्याय के लिए राहुल गांधी जी के इस बड़े अभियान की शुरुआत कोटा, राजस्थान से हो रही है और वे ट्रेन से आ रहे हैं। लेकिन यहाँ की कोचिंग संस्थाओं को डराया जा रहा है, उन्हें धमकियाँ दी जा रही हैं कि 'आपके संस्थानों में कई कमियाँ हैं, नतीजे भुगतने के लिए तैयार रहो।' अगर माननीय स्पीकर के खुद के लोकसभा क्षेत्र में विपक्ष के दौरे को लेकर ऐसी डरावनी स्थिति बनती है, तो पूरे मुल्क में क्या संदेश जाएगा? क्या इसे लोकतंत्र कहेंगे? इस विषय पर कल मैंने 'एक्स' (ट्विटर) पर ट्वीट भी किया था कि माननीय स्पीकर को इस प्रकार की परिस्थितियां पैदा करना शोभा नहीं देता, जिससे शिक्षण संस्थाओं और आम लोगों के दिमाग में भय बैठ जाए।
यहाँ तो ऐसी सैकड़ों बातें हैं; सड़कों के गड्ढों को लेकर भी कोई आंदोलन कर दे, तो उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर दी जाती है और उसे राष्ट्रद्रोही या राज्यद्रोही करार दे दिया जाता है। अपने राजनीतिक जीवन में मैं पहली बार देश के भीतर ऐसी नाजुक और अजीब स्थिति देख रहा हूँ। देश किस दिशा में जा रहा है, कोई नहीं जानता।
ऐसे बदतर हालातों के बीच आज सोशल मीडिया ही एकमात्र गवाह बचा है। मैं देखता हूँ कि देश के नामचीन पत्रकार, साहित्यकार, लेखक और बुद्धिजीवी जब सोशल मीडिया पर आपस में चर्चा करते हैं, तो पूरा देश उन्हें बेहद गंभीरता से सुनता और समझता है, क्योंकि उनकी बातों में दम है। लेकिन दुर्भाग्य से हमारा मेनस्ट्रीम मीडिया (मुख्यधारा का मीडिया) पूरी तरह सत्ता के दबाव में है, जिसके कारण जनता से जुड़े ये असली मुद्दे टीवी चैनलों पर मुख्य बहस का हिस्सा नहीं बन पाते। मैं यह सीधा आरोप लगा रहा हूँ, चाहे किसी को बुरा लगे या भला, पर देश की कड़वी सच्चाई यही है। मीडिया जगत ने जो दबाव पिछले 12 वर्षों से सहन किया है, अब उससे बाहर निकलने का समय आ गया है। आपको इस भय और दबाव से मुक्त होना होगा, वरना इतिहास आपको भी कभी माफ़ नहीं करेगा।"
मोदी सरकार में छात्र निराश हैं। पेपर लीक और परीक्षा में धांधली ने उनके सपनों को तोड़ दिया है।
ऐसे में जननायक राहुल गांधी जी युवाओं की आवाज को मजबूती देने के लिए कोटा आ रहे हैं।
कोटा से उठने वाली न्याय की ये गूंज- पूरे देश में सुनाई देने जा रही है।
ट्रिपल इंजन सरकार का ये हाल है!
नेता प्रतिपक्ष श्री @RahulGandhi जी की कोटा छात्र महारैली से BJP इतनी घबरा गई है कि PG मालिकों को धमका रही है और होर्डिंग उतरवा रही है।
याद रखिए, डर वहीं लगता है जहाँ हार दिखाई देती है।
40 लाख NEET और CBSE छात्र इस सरकार को सबक सिखाकर रहेंगे।
अब छात्रों की गूँज से होगी व्यवस्था परिवर्तन की लड़ाई का आगाज !
युवाओं के हितों में आवाज बुलंद करने वाले आदरणीय @RahulGandhi जी की कल 17 जून को कोटा में आयोजित छात्र सम्मेलन के लिए @nsui राष्ट्रीय अध्यक्ष भाई @VinodJakharIN जी के साथ छात्रों से मुलाकात कर उनको कल छात्र सम्मेलन में शामिल होकर अपनी बात रखने को आमंत्रित किया !
@1K_Nazar@Khalbaali@INCRajasthan@kanhaiyakumar@anshultrivedi47
मोदी जी, ये डर हमें अच्छा लगा🔥🔥
कल 17 जून को राहुल गांधी जी छात्रों से संवाद करने कोटा पहुंच रहे हैं, मगर उससे पहले ही कायर भाजपा सरकार और उनके लोगों ने कार्यक्रम के पोस्टर हटाने शुरू कर दिए!
ये BJP की छात्र-विरोधी और युवा-विरोधी मानसिकता का सीधा उदाहरण है!
#WatchegaFromHome
कोटा महारैली: छात्रों की गूंज ✊
⦁ छात्रों की ताकत बनने
⦁ उनके संघर्ष को आवाज देने
⦁ पेपर लीक के जिम्मेदारों से हिसाब लेने
आ रहे हैं जननायक...
अन्याय के खिलाफ इस लड़ाई में हमारे साथ जुड़ें: https://t.co/PGGPP5Cmn6…
केंद्रीय मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत द्वारा दिए गए बयान पर पूछे गए सवाल का जवाब:
"देखिए, उनका यह बयान पूरी तरह से एक राजनीतिक जुमले जैसा है। सच तो यह है कि उन्हें खुद नहीं पता कि पानी कहाँ से आ रहा है, किस पॉइंट से आ रहा है और कैसे आया होगा। जब नहर (कैनाल) बन रही थी, तब जैसलमेर बॉर्डर से लेकर जोधपुर तक मैंने खुद वहाँ के कम से कम सौ चक्कर लगाए होंगे। अब उन्हें इस जमीनी हकीकत का क्या पता? ऐसे में, मैं उनके इस बयान पर क्या जवाब दूँ?
दरअसल, उनके जो 'आका' (बॉसेस) हैं, उन्होंने उनसे कहा होगा कि देश में राहुल गांधी जी के इस अभियान से जो माहौल बन रहा है, उसे काउंटर (बेअसर) करने के लिए आप सब चारों तरफ फैल जाओ और कांग्रेस पर झूठे-सच्चे आरोप लगाना शुरू कर दो। हमारे केंद्रीय मंत्री जी का यह ताजा बयान भी उसी सोची-समझी रणनीति का एक हिस्सा है। इनका मकसद साफ है, पूरे देश के अंदर एक साथ निकलो और ऐसी फिजा (माहौल) बना दो जिससे युवाओं का यह जो आंदोलन शुरू हो रहा है, वह कामयाब न हो सके। मेरा स्पष्ट मानना है कि वरना उनके कल अचानक बयान देने का कोई और कारण ही नहीं था। कल तो कोई ऐसा प्रोवोकेशन (उकसावा) भी नहीं था, लेकिन वे अचानक बोल पड़े और न जाने कैसे-कैसे शब्दों का प्रयोग करने लगे। मैं तो उनसे सीधे कहता हूँ कि वे अपने पिछले 12 सालों का कोई एक बड़ा काम गिना दें, जो उन्होंने विशेष रूप से क्षेत्र के लिए किया हो।
अगर जोधपुर में कोई एक बड़ा काम हो भी रहा है, तो वह एलिवेटेड रोड का काम है। उस काम के लिए भी मैंने खुद केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी जी से व्यक्तिगत रूप से अनुरोध (रिक्वेस्ट) किया था कि इस प्रोजेक्ट को राज्य सरकार अकेले नहीं बना पाएगी। हम राज्य सरकार के स्तर पर प्रयास तो कर रहे थे, लेकिन वह क्षेत्र ऐसा था कि काम आगे बढ़ नहीं पा रहा था; इसलिए मैंने गडकरी जी से आग्रह किया और उन्होंने मेरी बात को स्वीकार कर लिया। अब चूंकि शेखावत जी केंद्रीय मंत्री हैं, जोधपुर के सांसद हैं और वह रोड वहीं बन रही है, तो अगर वे इसका श्रेय लेना चाहते हैं तो मुझे इसमें कोई ऐतराज नहीं है। वे शौक से श्रेय लें, लेकिन कम से कम उस काम को जल्दी पूरा तो करवाएँ! पर इसके अलावा वे कोई एक काम तो बताएँ कि पिछले 12 वर्षों में उन्होंने जनता के लिए क्या किया? जब उनके पास इस बात का कोई जवाब नहीं होता, तो वे फिर मुझ पर इस तरह के व्यक्तिगत कटाक्ष करने लगते हैं।
मैं हमेशा सच्चाई की बात करता हूँ। मैं तो आज भी उन्हें चाय पर बुलाने के लिए या खुद उनके पास जाने के लिए तैयार हूँ, बशर्ते वे यह बताएँ कि 'संजीवनी क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी' घोटाले का क्या हुआ? उन गरीब पीड़ितों को उनका डूबा हुआ पैसा कब वापस मिलेगा? अब जब उन्हें ऐसी कड़वी और सच्ची बातों से तकलीफ होती है, तो वे अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए मेरे खिलाफ 'फाउल' (गलत राजनीति) खेलने लग जाते हैं। यही असली हकीकत है।"
इतना डर क्यों मोदी जी?
राजस्थान में सरकार आपकी।
केंद्र में सरकार आपकी।
कोटा से सांसद खुद लोकसभा स्पीकर हैं।
फिर भी राहुल गांधी जी के आने से पोस्टर हटवाए जा रहे हैं, कोचिंग संस्थानों पर दबाव बनाया जा रहा है।
याद रखिए...
पोस्टर हट सकते हैं,
लेकिन युवाओं के सवाल नहीं। ✊
#ChhatronKiGoonj
'सॉरी... मैं बहुत दूर जा रहा हूं'
- सुसाइड नोट में ये बात लिखकर 22 साल के उमेश माली ने खुदकुशी कर ली।
उमेश राजस्थान के सीकर में रहकर NEET की तैयारी कर रहा था, लेकिन परीक्षा से महज 6 दिन पहले ही BJP के हत्यारे सिस्टम ने उसकी जान ले ली।
BJP सरकार का करप्ट सिस्टम छात्रों का 'मर्डर' कर रहा है, उनके सपनों को कुचल रहा है, लेकिन नरेंद्र मोदी को कोई फर्क नहीं पड़ रहा। वे अपनी ही दुनिया में मस्त हैं।
मोदी सरकार में न किसी की जवाबदेही तय की जा रही है, न ही पेपर लीक के जिम्मेदारों पर एक्शन हो रहा है- शर्मनाक!!
इंदिरा गांधी जैसी नेता आज होतीं तो RP एक्ट के तहत बीजेपी पर प्रतिबंध लगा देतीं, इस विषय पर मेरे स्पष्ट विचार:
"देखिए, विपक्ष के जितने भी लोग मेरे बयान पर आज बोल रहे हैं, वे खुद नहीं बोल रहे, बल्कि उनसे ऊपर से बुलवाया जा रहा है। आरएसएस वाले कहें या उनके बड़े नेता, वे बकायदा तय करते हैं कि आपको आज यह बयान देना है और आपको वह। कई बार तो जो लिखित बयान मीडिया में छपता है, उसकी भाषा और शब्दावली उन नेताओं की होती ही नहीं है। मैं उनमें से कई अच्छे लोगों को व्यक्तिगत रूप से जानता हूँ और उनकी वास्तविक भाषा से वाकिफ हूँ। जब उनकी बदली हुई भाषा सामने आती है, तो साफ समझ आ जाता है कि यह ऊपर से लिखकर आया है और वे केवल उसे दोहरा रहे हैं। यह तो हुई पहली बात।
दूसरी बात, मैंने जो कानूनी पहलू उठाया है, उस पर आज पूरे देश में चर्चा हो रही है और यह अच्छी बात है। लोकतंत्र (डेमोक्रेसी) में चर्चा होते रहनी चाहिए, क्योंकि उसी से एक 'नेशनल डिबेट' (राष्ट्रीय बहस) बनती है और मंथन से ही सही बातें निकलकर सामने आती हैं। मैं तो केवल यह पूछ रहा हूँ कि हमारा कानून और संविधान इस बारे में क्या कहता है? एक तरफ आप भी संविधान की दुहाई देते हैं, वहीं दूसरी तरफ जब राहुल गांधी जी कहते हैं कि संविधान की रक्षा करो, तो आप उसी संविधान की धज्जियाँ उड़ा रहे हैं! आप खुद देख लीजिए। खैर, आप मीडिया वाले भी गजब हैं; एक बार दिल्ली में आपने कार में मेरी फोटो लेकर रील बना दी थी। आपकी दुनिया ही अलग है। लेकिन आप ही मुझे बताइए कि हमारा कानून वास्तव में क्या कहता है?
आइए, मैं आपको जनप्रतिनिधित्व अधिनियम (RPA), 1951 की धाराएं समझाता हूँ:
धारा 123 (3), RPA 1951: इसके तहत किसी भी उम्मीदवार या उसके एजेंट द्वारा धर्म, जाति, समुदाय या धार्मिक प्रतीकों के आधार पर वोट माँगना पूरी तरह प्रतिबंधित है। कानून बिल्कुल साफ है, ऐसा करने पर चुनाव शून्य (Void) घोषित हो जाता है और दोषी पर 6 वर्ष तक चुनाव लड़ने की रोक लग सकती है। यह पहला नियम है।
धारा 123 (3A), RPA 1951: चुनाव के दौरान विभिन्न समुदायों के बीच धर्म या जाति के आधार पर नफरत, वैमनस्य या शत्रुता बढ़ाना 'भ्रष्ट आचरण' (Corrupt Practice) माना जाता है, जो किसी भी जीते हुए चुनाव को रद्द करने का सबसे ठोस कानूनी आधार है।
धारा 29A (5), RPA 1951: इसके अनुसार, किसी भी राजनीतिक दल के पंजीकरण (Registration) के समय दल द्वारा देश के संविधान और धर्मनिरपेक्षता (Secularism) की शपथ लेना अनिवार्य है। इसके बिना कोई भी नई पार्टी पंजीकृत नहीं हो सकती।
यह बात अलग है कि भारत निर्वाचन आयोग (ECI) का यह दिशा-निर्देश वर्ष 2005 में आया था, इसलिए इसके पहले से अस्तित्व में आ चुकी पार्टियों को इसमें नहीं छुआ गया, जिसमें अकाली दल, एआईएमआईएम (AIMIM) और एआईएमएल (AIML) जैसी पार्टियाँ शामिल हैं, जो पहले धर्म या समुदाय के नाम पर बनी थीं। लेकिन आज के कानून के मुताबिक कोई नई पार्टी इस तरह नहीं बन सकती।
जब कानून यह कहता है, तो मैंने केवल उसी कानून की बात की है। आप देश की अदालतों के ऐतिहासिक फैसले उठाकर देख लीजिए:
वर्ष 1995 (शिवसेना मामला): चुनाव के दौरान एक उम्मीदवार के पक्ष में कथित तौर पर कट्टर धार्मिक भाषण देने के कारण सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक सजा सुनाई थी। अदालत ने उस जीते हुए चुनाव को रद्द कर दिया था और संबंधित व्यक्ति पर 6 साल के लिए चुनाव लड़ने का प्रतिबंध लगा दिया था।
वर्ष 1995 (डॉ. दासराव देशमुख मामला, नांदेड़): लोकसभा चुनाव के दौरान उम्मीदवार की सहमति से रैलियों और वाहनों पर धार्मिक नारे व सांप्रदायिक पोस्टर लगाने को बॉम्बे हाईकोर्ट ने 'भ्रष्ट आचरण' माना और जीता हुआ पार्लियामेंट का चुनाव रद्द कर दिया था। आप सोचिए, देश की अदालत ने संसद का चुनाव रद्द किया था!
वर्ष 1995 (मनोहर जोशी मामला): इस मामले में भी कोर्ट ने उनका जीता हुआ चुनाव रद्द कर दिया था, हालांकि बाद में सुप्रीम कोर्ट से उन्हें किसी तकनीकी बिंदु (Technical Point) पर राहत मिल गई थी, वह एक अलग कानूनी विषय है।
भैरों सिंह शेखावत जी का मामला (1995-96): जिसका जिक्र मैंने कल भी किया था। चुनाव रैलियों में राम मंदिर और लक्ष्मी जी के प्रतीकों का इस्तेमाल करने के आरोपों को लेकर उनके खिलाफ केस चला था। हालांकि, बाद में सुप्रीम कोर्ट ने उस याचिका को खारिज कर दिया था। लेकिन चूंकि वे 1993 का चुनाव जीतकर मुख्यमंत्री बन चुके थे, इसलिए हाईकोर्ट के स्तर पर वे इस मामले में काफी गंभीर रूप से घिर गए थे। हम सब जानते हैं कि जब कोई मुख्यमंत्री पद पर बैठा हो, तो साक्ष्यों (Evidence) का मिलना कितना कठिन हो जाता है। अंततः साक्ष्यों के अभाव के कारण वे बच गए, अन्यथा वे भी इसमें कानूनी रूप से फंस चुके थे।
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छात्र हितों और युवाओं की आवाज उठाने पर श्रीगंगानगर NSUI के जिलाध्यक्ष श्री ईशानवीर मान जी को गिरफ्तार करना अत्यंत निंदनीय है। लोकतंत्र में अपनी मांगों और अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण तरीके से आवाज उठाना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है।
छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर संघर्ष कर रहे युवाओं की आवाज को दबाने के बजाय उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
मैं इस गिरफ्तारी की कड़े शब्दों में निंदा करता हूँ और प्रशासन से निष्पक्ष एवं संवेदनशील रवैया अपनाने की अपेक्षा करता हूं। @nsui
कल कोटा में नेता प्रतिपक्ष श्री @RahulGandhi जी छात्रों से संवाद करने आ रहे हैं, लेकिन भाजपा की घबराहट साफ दिखाई दे रही है।
छात्रों के सवालों और संवाद से सत्ता इतनी भयभीत है कि कोटा के कोचिंग संस्थानों, पीजी और गेस्ट हाउस संचालकों पर दबाव बनाने तथा विद्यार्थियों को कार्यक्रम में जाने से रोकने के प्रयास किए जा रहे हैं। जो सरकार अपनी नाकामियों को छुपाने का कुत्सित नाकाम प्रयास कर रही हैं।
मोदी सरकार के कार्यकाल में लगातार सामने आए पेपर लीक मामलों ने देश के करोड़ों युवाओं के भविष्य को संकट में डाल दिया है। आज युवा अपने अधिकार, रोजगार और शिक्षा से जुड़े सवालों के जवाब चाहते हैं और राहुल गांधी जी से सीधे संवाद करना चाहते हैं।
अब भाजपा सरकार को यह समझ लेना चाहिए कि देश का युवा डरने और दबने वाला नहीं है। सत्ता के दबाव से आवाज़ों को कुछ समय के लिए रोका जा सकता है, लेकिन युवाओं के सपनों और उनके अधिकारों की लड़ाई को नहीं।
17 जून को कोटा में होने वाला यह कार्यक्रम सिर्फ एक संवाद नहीं होगा, बल्कि उन लाखों छात्रों की आवाज़ बनेगा जिनके भविष्य के साथ पिछले 12 वर्षों में बार-बार खिलवाड़ हुआ है। युवा अपने सवाल पूछेगा और देश उसकी आवाज़ सुनेगा।
#NEETPaperLeak #SackDharmendraPradhan #RahulGandhi #Kota
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने आज कोटा के रास्ते जाते हुए वीडियो जारी कर सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि युवाओं के साथ छलावा हुआ है पेपर लीक हो रहे है सरकार चुप है।
@TikaRamJullyINC