इस तरह से ध्यान लगाओ, पूरा शरीर ऊर्जा से भर जाएगा
बस तीन से पाँच मिनट। बिना किसी खर्च के। बिना किसी विशेष साधन के। सिर्फ अपनी नाक के अगले भाग पर ध्यान लगाओ – और देखो कैसे तुम्हारा पूरा शरीर ऊर्जा से गूंज उठता है। यह कोई जादू नहीं है। यह सनातन शास्त्रों का एक प्रयोग है, जिसे स्वयं भगवान शिव ने बताया है।
संस्कृत श्लोक (गंधर्व तंत्र, श्लोक 17):
नासाग्रं चैव नाभिं च हृदयं च तृतीयकम्।
स्थानान्येतानि जीवस्य कल्पितानि शिवेन तु॥
अर्थ: नासिका का अग्र भाग, नाभि और हृदय – ये तीन स्थान हैं जहाँ जीव (आत्मा) निवास करता है। ये तीनों स्थान स्वयं भगवान शिव ने निर्धारित किए हैं।
दूसरा श्लोक (गंधर्व तंत्र, श्लोक 24):
सर्वगः सर्वदेहस्थो नासाग्रे च प्रतिष्ठितः।
प्रत्यक्षः सर्वभूतानां दृश्यते न च लक्ष्यते॥
अर्थ: जीव सर्वव्यापी है, सभी शरीरों में विद्यमान है, किन्तु वह नासिका के अग्र भाग में प्रतिष्ठित है। वह सभी प्राणियों को प्रत्यक्ष दिखाई देता है, फिर भी पहचाना नहीं जाता।
विधि – ऐसे करें अभ्यास:
किसी भी शांत जगह बैठ जाएँ। रीढ़ की हड्डी को सीधा रखें। पालथी मार सकते हैं, नहीं तो कुर्सी पर भी बैठ सकते हैं। पहले आँखें बंद करें और अपनी साँस पर ध्यान दें – कैसे साँस नाक से अंदर आ रही है, कैसे बाहर जा रही है। बस एक मिनट ऐसे ही देखें। साँस को जबरदस्ती न बदलें, जैसी है वैसी ही चलने दें। थोड़ी ही देर में मन स्थिर होने लगेगा।
अब आँखों को आधा खोलें – न पूरी तरह बंद, न पूरी तरह खुली। दोनों आँखों से अपनी नाक के अगले भाग को देखें। वह हिस्सा जहाँ नाक खत्म होती है। वहाँ कोई दाना हो, कोई रोएँ हों, या सिर्फ एक आकृति – जो दिखे, बस उसे देखते रहें। पलक झपक सकते हैं, कोई हर्ज नहीं। तीन से पाँच मिनट तक अपनी नाक के उस सिरे को निहारें।
फिर आँखें बंद कर लें। बंद आँखों से भी उसी नासिका अग्र को 30-45 सेकंड तक देखें। फिर धीरे-धीरे आँखें खोलें और उठें। बस। इतना सा प्रयोग है।
लाभ – क्या होगा:
सबसे पहला और सबसे बड़ा लाभ – मन की एकाग्रता। जिस कंसंट्रेशन पावर के लिए लोग तरह-तरह के सेमिनार और वीडियो देखते हैं, वह इस एक प्रयोग से घर बैठे मिल जाती है। मन स्थिर होता है, चंचलता घटती है। जो काम पहले देर से होता था, वह अब जल्दी होने लगता है। पढ़ाई हो, व्यापार हो, नौकरी हो – हर क्षेत्र में फोकस बढ़ता है।
दूसरा लाभ – मानसिक विकार दूर होते हैं। तनाव, चिंता, डिप्रेशन, अनिद्रा, अत्यधिक क्रोध, चिड़चिड़ापन – ये सब धीरे-धीरे पिघलने लगते हैं। मन शांत होता है, धैर्य बढ़ता है। छोटी-छोटी बातों पर अब उतना गुस्सा नहीं आएगा, उतनी उदासी नहीं होगी।
तीसरा लाभ – शरीर की ऊर्जा का संतुलन। हमारे शरीर में अलग-अलग ऊर्जाएँ काम कर रही होती हैं। जब वे असंतुलित हो जाती हैं, तो शरीर और मन दोनों गड़बड़ा जाते हैं। नासिका अग्र ध्यान उन ऊर्जाओं को संतुलित करता है। पाचन ठीक होता है, नींद गहरी आती है, दिनभर ताजगी बनी रहती है। आलस छूटता है, सुस्ती दूर भागती है।
चौथा लाभ – नेत्रों की शक्ति बढ़ती है। आँखें स्वस्थ रहती हैं। थकान कम होती है। पढ़ने, काम करने में आँखें जल्दी नहीं थकतीं।
पाँचवाँ लाभ – आध्यात्मिक उन्नति। जो लोग मंत्र जाप करते हैं, नाम जपते हैं, चालीसा पढ़ते हैं – उन्हें इस ध्यान से सीधा फायदा मिलता है। उनका जप शीघ्र सिद्ध होता है, शीघ्र फलदायी होता है। दैवी शक्तियों का सहयोग मिलने लगता है। क्योंकि अब मन एकाग्र है, तो जो भी साधना करोगे, वह गहरी होगी। शीघ्र सफलता मिलेगी।
छठा लाभ – आत्म-साक्षात्कार। जब तुम नियमित रूप से यह ध्यान करोगे, तो एक दिन वह क्षण आएगा जब तुम उस जीव को पहचान लोगे जो तुम्हारी नाक के अग्र भाग पर स्थित है। शास्त्र कहते हैं – वह प्रत्यक्ष दिखता है, फिर भी पहचाना नहीं जाता। यह ध्यान उसे पहचानने का द्वार है। और जिसने अपनी आत्मा को पहचान लिया, उसके लिए फिर कुछ असंभव नहीं रह जाता।
कैसे अपनाएँ:
प्रतिदिन तीन से पाँच मिनट इसके लिए निकालें। सुबह के समय सबसे उत्तम है, पर किसी भी समय कर सकते हैं। पूजा-पाठ से पहले करेंगे तो और भी अच्छा। लगातार दस दिन करके देखें – खुद अंतर महसूस करेंगे। न तो समय ज्यादा चाहिए, न धन। बस थोड़ी सी नियमितता चाहिए।
एक लाइन में सार:
"नासिका अग्र ध्यान वह द्वार है जहाँ तुम्हारी आत्मा स्वयं बैठी तुम्हारी प्रतीक्षा कर रही है – बस उसे देखना भर है।"
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MUSIC VIDEO RELEASE!
『Still On Ice by 6-SenS』
Artist:6-SenS
Dance:CCBB SIVA
SUGAR
Dir&Camera&Edit:T.YAMAMICHI
FKI↔︎TOKYO
SIVAによる映像プロジェクト第2作。
深雪のランドスケープに、
6-SenSの叙情的なトラックと 踊る身体が重なる。
静寂の白に、一点の黒を穿つ。