इतिहास गवाह है कि चुनावी रैलियों में साहब हर बार गिरने की सीमा लांघ देते हैं, जमकर झूठ बोलते हैं और खुलकर ज़हर फैलाते हैं।
लेकिन इस बार चुनावी रैली कर नहीं पाए तो सारा कूड़ा संसद में ही उढेल दिया।
कसम से इतना ज़्यादा झूठ बोला है कि अब काउंटर करने की भी ताकत नहीं बची लोगों में।