उत्तर भारतीय रेल के आने जाने का समय की स्थिति बहुत खराब है , यात्रियों को आने जाने में बहुत असुविधा हो रही है , बहुत चिंताजनक विषय है। किर्प्या जल्दी से इसका समाधान किया जाये । @IndianRailMedia@indianrailway__@RailMinIndia@PMOIndia
मेरे प्रिय साथी कांग्रेस कार्यकर्ताओं,
यह चुनाव कोई सामान्य चुनाव नहीं है - ये हमारे लोकतंत्र और संविधान को बचाने की लड़ाई है।
जब तक कांग्रेस का एक भी कार्यकर्ता सच्चाई के लिए खड़ा है, तब तक भारत में नफ़रत नहीं जीत सकती - और हम एक नहीं, करोड़ों हैं।
मिलकर लड़ेंगे, जीतेंगे और देश के हालात बदल देंगे।
जय हिन्द 🇮🇳
#CongressKeBabbarSher
जो नेता कांग्रेस छोड़कर जा रहे हैं उन्हें कांग्रेस ने पहचान दी, केन्द्रीय मंत्री, राज्य में मंत्री बनाया, पार्टी में बड़े पदों पर बिठाया परन्तु पार्टी के मुश्किल वक्त में वो पार्टी छोड़कर भाग रहे हैं।
कई लोग कह रहे हैं कि उनके ऊपर केन्द्रीय एजेसिंयों का दबाव है इसलिए भाजपा में जा रहे हैं। ये वक्त किसी दबाव के आगे झुकने का नहीं है बल्कि लोकतंत्र को बचाने और देश के भविष्य के लिए संघर्ष करने का है।
हमें गांधी परिवार से प्रेरणा लेनी चाहिए जिनमें श्री राहुल गांधी एवं पूरे परिवार को कई-कई दिनों तक ED ने पूछताछ के बहाने परेशान किया, उनकी संसद सदस्यता रद्द कर दी, घर तक खाली करवा दिया पर वो हर दबाव का मुकाबला मजबूती से कर रहे हैं। देशभर में भारत जोड़ो न्याय यात्रा के माध्यम से अन्याय, महंगाई, नफरत और बेरोजगारी के खिलाफ यात्रा कर जनजागरण का काम कर रहे हैं। राजनीति में मुकाबला इस तरह डटकर किया जाता है।
आज देश में हर संस्थान पर दबाव है और हर व्यक्ति तनाव का माहौल महसूस कर रहा है। इस तनाव और दबाव का मुकाबला करना है जो सिर्फ कांग्रेस पार्टी ही कर सकती है। कांग्रेस ही इस देश के लोकतंत्र को मजबूत और सुरक्षित रख सकती है।
"भाजपाई उनका इस्तेमाल करके उन्हें दूध में से मक्खी की तरह निकाल फेंकेंगे"
◆ अखिलेश यादव ने चंडीगढ़ मेयर चुनाव मामले में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी पर कहा
@yadavakhilesh#SupremeCourt | अनिल मसीह #CJIDYChandrachud
चंडीगढ़ मेयर चुनाव में भाजपाई पीठासीन अधिकारी द्वारा चुनाव में धांधली करने का जुर्म क़बूल किया जाना दिखाता है कि भाजपा किस तरह से सत्ता की भूखी है। वैधानिक और सांविधानिक आधार पर भाजपा को पूरे देश से माफ़ी माँगकर हर जगह सत्ता छोड़ देनी चाहिए।
सरेआम लोकतंत्र की हत्या जैसे इस शर्मनाक कृत्य के लिए भाजपा समर्थकों को सिर झुका लेना चाहिए। उन्हें समझ लेना चाहिए कि भाजपा किस प्रकार हर चुनाव चोरी और घपलों से जीत रही है। ऐसे लोगों के हाथ में न देश सुरक्षित है न उनका अपना वर्तमान और न ही उनके बच्चों का भविष्य। आज का दिन भाजपाई समर्थकों के लिए नैतिक-शोक का दिन है।
इस घटना से वो अधिकारी भी सबक लें जो सरकार के दबाव में आकर आपराधिक काम करते हैं। इससे उनका और उनके परिवारों का जीवन बर्बाद हो जाएगा क्योंकि ऐसे अपराध किसी देशद्रोह से कम नहीं है, जिसकी सख़्त सज़ा उन्हें मिलेगी ही। अब अधिकारियों को समझ लेना चाहिए कि भाजपाई उनका इस्तेमाल करके उन्हें दूध में से मक्खी की तरह निकाल फेंकेंगे और हमेशा के लिए शर्म और अपमान भरी ज़िंदगी जीने के लिए सलाखों के पीछे अकेला छोड़ देंगे। वो अपने बच्चों और समाज के सामने मुँह दिखाने लायक़ नहीं रहेंगे। अधिकारी याद रखें फ़रेबी किसी के सगे नहीं होते हैं।
निंदनीय!
#नहीं_चाहिए_भाजपा
श्रीमति आशा हुड्डा जी ने आगामी लोकसभा चुनावों की तैयारी हेतु महिला कांग्रेस व कांग्रेस सेवादल के कार्यकर्ताओं को संबोधित किया व पार्टी की नीतियों को जन जन तक पहुंचाने का आवाह्न किया !
ब्रेकिंग न्यूज़: मीडिया का निधन!
भारतीय मीडिया का निधन हो गया है।
ओम शांति!
‘अयोध्या की ओर दौड़ती मीडिया की गाड़ियां,‘हिंदू’मीडिया की हैं। इनको मीडिया समझने की गलती न करें । नोएडा के सारे संपादक मीडिया के अंतिम संस्कार में मौजूद थे। जिन्होंने अंतिम संस्कार में जाने से इनकार कर दिया, उनका सामान उठाकर सड़क पर फेंक दिया गया।नोटिस पीरियड का पैसा नहीं दिया गया। मुक़दमे की धमकी और बुलडोजर की फ़ोटो दी गई है ।
निधन के बाद मीडिया का पुनर्जन्म नए भारत में ‘हिंदू’और सांप्रदायिक मीडिया के रूप में हुआ है। इस जन्म में इनके माता-पिता का IT सेल है। इस जन्म में सभी मीडिया संस्थान जुड़वा पैदा हुए हैं। इसलिए सबकी हरकतें, चीखने चिल्लाने और दूसरों पर हमला करने की आदत एक जैसी हैं । यह संविधान की भाषा नहीं समझते, इनके दिमाग़ में केवल नफ़रत और हिंसा फीड हैं।
इनकी गाड़ियों पर लिखे गए स्लोगन,इनके दिमाग़ से नहीं बेंगलोर से आते हैं।’ भारतीय मीडिया IT सेल का एक्सटेंशन बन गया है।
क्या राम मंदिर मीडिया कम्पनियों ने बनवाया है? अगर मीडिया गाड़ियों पर सरेआम लिखकर बता रहा है,मंदिर इन्होंने बनवाया है, तो भाजपा को इसका खंडन करना चाहिए! भाजपा कहती है, मंदिर उसने बनवाया है। तो इसलिए भाजपा की नैतिक ज़िम्मेदारी है, वह स्पष्ट करे कि मंदिर किसने बनवाया!
अयोध्या की ओर दौड़ती गाड़ियां, असल में भाजपा के डीज़ल और एजेंडे पर चुनाव प्रचार में जुटी गाड़ियां हैं। इन गाड़ियों में पत्रकार नहीं जाते, सरकारी चित्रकार जाते हैं जो सरकार के बताए नज़ारे का चित्रण कर देते हैं।
भाजपा चुनाव प्रचार में 22 जनवरी के बाद जुटेगी, अभी प्रचार की कमान पुनर्जन्म लेने वाला मीडिया संभाल रहा है।
नोएडा में मीडिया के नाम पर भाजपा कंपनियों में काम करने वाले लोग, पूजा पाठ घर से करने की जगह, घर का मंदिर भी ऑफ़िस में ले आए हैं ।जिससे वह अपने कामकाज का पूरा हिसाब बैंगलोर भेज सकें।
अब भारतीय नागरिकों को तय करना है, वह अभी भी हर दिन के झगड़े को पत्रकारिता कहेंगे? अपने चंदे पर बने मंदिर का श्रेय मीडिया कम्पनियों को लेने देंगे?
अपने विवेक का टेंडर मीडिया को मत दीजिए।
इसे पत्रकारिता नहीं, नागरिकों की आस्था और विश्वास का मज़ाक उड़ाना कहते हैं!
आप क्या कहेंगे तय कर लीजिए…
बिना प्रभावित वर्ग से चर्चा और बिना विपक्ष से संवाद के कानून बनाने की ज़िद लोकतंत्र की आत्मा पर निरंतर प्रहार है।
जब 150 से अधिक सांसद निलंबित थे, तब संसद में शहंशाह ने भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़, ड्राइवर्स के विरुद्ध एक ऐसा कानून बनाया जिसके परिणाम घातक हो सकते हैं।
सीमित कमाई वाले इस मेहनती वर्ग को कठोर कानूनी भट्टी में झोंकना उनकी जीवनी को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है। और साथ ही, इस कानून का दुरुपयोग संगठित भ्रष्टाचार के साथ ‘वसूली तंत्र’ को बढ़ावा दे सकता है।
लोकतंत्र को चाबुक से चलाने वाली सरकार ‘शहंशाह के फरमान’ और ‘न्याय’ के बीच का फर्क भूल चुकी है।
#TruckDriversProtest