Shankar Mahadevan has a degree in Computer science and software engineering. Sudha Murty has a Masters in Engg. from IISc and was the first female engineer at India's largest auto company. Both are honoris causa doctors. But am sure they arent good enough for this journalist.
@SupriyaShrinate@Ajeety28 ग़ज़बे है रामायण के पन्नों को जलाने वाले ब्यान या अपमानित करने वाले ब्यान पर सुई पटक सन्नाटा,मैम को बर्दाश्त नहीं कि इंग्लैंड से कपड़े धुलाई कराने वाले स्वर्ण चम्मच अवतारी वंशवृक्ष के कोपलों को कोई कुछ बोले तो बहुत तकलीफ...
@Jairam_Ramesh@ajitanjum@Aloksharmaaicc@ppbajpai
चार स्वघोषित ब्रह्मज्ञानियों को पिछले एक वर्ष में ट्विटर पर उनकी ही शैली में उत्तर दिया तो बिलबिला कर भाग गए।
हालिया विषय राहुल देव का है। हवाई चुम्मे पर अंट-शंट लिख गए, तार्किकता से पूछा (बिना एक अपशब्द के) तो मुझे भाषा और संस्कृति का ज्ञान देने लगे। फिर मैंने देशज शब्दावली का प्रयोग किया तो पहले ब्लॉक कर गए, और बाद में किसी के समझाने पर कि इसे रिपोर्ट करो, अनब्लॉक कर गए।
इससे पहले दिलीप मंडल को जातियों के बारे में, आरक्षण और उसकी पत्रकारिता पर प्रश्न किया तो वो बिलबिला कर भाग गया। कोई गाली नहीं दी, केवल प्रश्न पूछे थे। ट्वीट नीचे संलग्न हैं।
पिछले वर्ष अगस्त में ओम थनवी हिन्दी पत्रकारिता पर ज्ञान देते हुए एक ट्वीट में ११ उर्दू/अंग्रेजी के शब्द लिख गया। मैंने ध्यान दिलाया तो कहा कि ‘मुझे तो यही हिन्दी आती है’ और ‘आप लगे रहें हिन्दू-मुस्लिम की कट्टरता में’। अगले ट्वीट के बाद बुड्ढा बिदक गया।
मृणाल पांडे मुझे नारीवाद सिखा रही थी जब मैंने अपनी मौसी द्वारा बनाए गए बिछौने की फोटो लगाई थी। मैंने उन्हें जब वास्तविक नारीवाद और उनकी काल्पनिक पुरुष घृणा पर ध्यानाकर्षण करवाते हुए, उनते ट्वीट में कई अशुद्धियाँ बताईं तो बिलबिला कर भाग गईं।
ये चारों ही पत्रकार रह च���के हैं। चारों ही घोर कुतर्की हैं। तर्क से घेरो तो संस्कृति की बातें करने लगते हैं। इनसे भय न खाएँ, ये सब कॉन्ग्रेस पोषित लोग हैं जो आज भी किसी तरह चाटुकारिता से पेट पाल रहे हैं।
मुझे नहीं लगता कि इनमें से किसी की भी भाषा मुझसे अधिक शुद्ध होगी, हिन्दी-अंग्रेजी कोई भी। इनमें से कोई भी मुझसे पत्रकारिता, नारीवाद, आरक्षण या सामाजिक संदर्भ के विषय पर कभी भी चर्चा करना चाहे, मैं उपस्थित रहूँगा।
जहाँ तक बात अपशब्दों की है, तो वह भी भाषा का ही एक अंग है। चूँकि तुम्हारे शब्द किसी को अपनी अभिजात्य अभिमानजनित घृणा का पात्र बनाते हैं, तो तुम्हें भी प्रत्युत्तर में शालीनता की आशा त्याग देनी चाहिए।
संदर्भ और आनंद हेतु कुछ ट्वीट:
मृणाल पांडे: https://t.co/ECbs0887ah,
https://t.co/L6fY21zKps
मंडल: https://t.co/8RgTeHNLiy,
https://t.co/2zwbQ96fFX,
https://t.co/oE4nHFE7N9
ओम थनवी: https://t.co/rzQHkOtc65,
https://t.co/x6v83nIigR,
https://t.co/Yku7WCtWCW
राहुल देव: https://t.co/zmJ4tYOuco,
https://t.co/NgNOtpDcuO