यह कविता मैंने लिखी थी।
आजतक के कार्यक्रम में पढ़ी गई।
लेकिन यह खाता सिर्फ कविता का नहीं है।
यहाँ मिलेगा:
• राजनीति पर व्यंग्य
• राष्ट्रवादी दृष्टिकोण
• भारतीय भाषाओं का समर्थन
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@rahuldev2 उदाहरण 1 :- एजाज खान के भी Instagram पर 6 मिलियन फॉलोवर्स थे पर विधानसभा चुनाव में वोट मिले 155
उससे लगभग 9 गुणा अधिक वोट 1298 नोटा को मिले थे।
उदाहरण 2 :- इसी तरह किसान आंदोलन के नेताओं की हरियाणा और पंजाब विधानसभा चुनाव में ज़मानत तक नहीं बची थी।
#CJP_ही_AAP_है
🚧 2014 बनाम 2026: बदलता भारत, बदलती प्राथमिकताएँ
भारत की राजनीति में कभी जाति, धर्मनिरपेक्षता, सांप्रदायिकता और वोट बैंक सबसे बड़े मुद्दे हुआ करते थे। आज चर्चा का केंद्र तेजी से बदल रहा है।
🔹 2014 में डिजिटल पेमेंट्स सीमित थे, आज 18+ अरब ट्रांजैक्शन हर महीने हो रहे हैं।
🔹 एयरपोर्ट 74 से बढ़कर 160+ हो गए।
🔹 एक्सप्रेसवे नेटवर्क 1,000 किमी से बढ़कर 6,700 किमी तक पहुंच गया।
🔹 मेट्रो रेल 250 किमी से बढ़कर 1,000+ किमी हो गई।
🔹 सौर ऊर्जा क्षमता 2.6 GW से बढ़कर 110+ GW तक पहुंची।
🔹 बिजली उत्पादन क्षमता 249 GW से बढ़कर 520+ GW हो गई।
🔹 CNG स्टेशन 738 से बढ़कर 8,600+ हो गए।
🔹 इंटरनेट उपयोगकर्ता 25 करोड़ से बढ़कर 95+ करोड़ हो गए।
🔹 ऑप्टिकल फाइबर 2 लाख से अधिक गांवों तक पहुंच चुका है।
🔹 रक्षा निर्यात ₹700 करोड़ से बढ़कर ₹23,000 करोड़ से अधिक हो गया।
🔹 EV चार्जिंग स्टेशन और सेमीकंडक्टर जैसे नए सेक्टर तेजी से उभर रहे हैं।
🔹 11 करोड़ से अधिक शौचालय, 4 करोड़ से अधिक गरीबों के घर और लगभग सार्वभौमिक LPG एवं ग्रामीण विद्युतीकरण जैसे बड़े सामाजिक बदलाव देखने को मिले।
📈 आज बहस सिर्फ़ "कौन सी जाति?" या "कौन सा वोट बैंक?" तक सीमित नहीं है।
अब सवाल हैं:
✅ GDP कितनी बढ़ेगी?
✅ कितनी बिजली बनेगी?
✅ कितने डेटा सेंटर आएंगे?
✅ कितनी सौर ऊर्जा पैदा होगी?
✅ कितने EV चलेंगे?
✅ कितने सेमीकंडक्टर बनेंगे?
✅ भारत वैश्विक सप्लाई चेन में कितना बड़ा खिलाड़ी बनेगा?
भारत की राजनीति का विमर्श धीरे-धीरे पहचान की राजनीति से निकलकर इंफ्रास्ट्रक्चर, टेक्नोलॉजी, ऊर्जा और आर्थिक शक्ति की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है।
"21वीं सदी में राष्ट्रों की ताकत नारों से नहीं, बल्कि हाईवे, पावर प्लांट, डेटा सेंटर, फैक्ट्रियों और नवाचार से तय होगी।"
#India #ViksitBharat #Infrastructure #DigitalIndia #EnergyTransition #Manufacturing #Semiconductors #EV #AI #DataCenters #NewIndia #rahuldev2
Haryana BJP CM Nayab Saini rally in Punjab !!
Nothing more to tell about situation of BJP in Punjab, hence ED-CBI remains the only resort for them.
Punjab never forgets
भारत की राजनीति का बदलता विमर्श
एक समय था जब भारतीय राजनीति का बड़ा हिस्सा दलित, पिछड़ा, अगड़ा, धर्मनिरपेक्षता, सांप्रदायिकता, जातीय समीकरण और वोट बैंक जैसे मुद्दों के इर्द-गिर्द घूमता था। चुनावी बहसों में विकास की चर्चा तो होती थी, लेकिन वह अक्सर पहचान आधारित राजनीति के पीछे दब जाती थी।
आज तस्वीर बदल रही है।
अब आम नागरिक यह पूछ रहा है कि—
देश की GDP कितनी तेजी से बढ़ रही है?
कितने किलोमीटर नए हाईवे बन रहे हैं?
कितनी बिजली पैदा हो रही है?
भारत AI की दौड़ में कहाँ खड़ा है?
सेमीकंडक्टर और डाटा सेंटर में कितना निवेश आ रहा है?
सौर ऊर्जा और वैकल्पिक ऊर्जा में देश कितना आत्मनिर्भर बन रहा है?
EV क्रांति में भारत की क्या भूमिका होगी?
क्रिटिकल मिनरल्स की वैश्विक सप्लाई चेन में भारत का स्थान क्या होगा?
यह बदलाव केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि मानसिकता का बदलाव है।
आज का युवा रोजगार, स्टार्टअप, टेक्नोलॉजी, इंफ्रास्ट्रक्चर और आर्थिक अवसरों की भाषा समझता है। उसे यह जानने में अधिक रुचि है कि अगले दस वर्षों में भारत विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था कैसे बनेगा, बजाय इसके कि 50 वर्ष पुराने राजनीतिक नारों को कितनी बार दोहराया जाए।
दुनिया भी बदल चुकी है।
21वीं सदी की वैश्विक प्रतिस्पर्धा जातीय नारों से नहीं, बल्कि इन क्षेत्रों से तय होगी—
✅ Artificial Intelligence (AI)
✅ Clean Energy
✅ Semiconductor Manufacturing
✅ Data Centers
✅ Critical Minerals
✅ Advanced Manufacturing
✅ Defence Technology
✅ Digital Infrastructure
जो देश इन क्षेत्रों में आगे होंगे, वही आर्थिक और रणनीतिक रूप से शक्तिशाली बनेंगे।
इसका अर्थ यह नहीं कि सामाजिक न्याय, दलित उत्थान या समान अवसर जैसे विषय महत्वहीन हो गए हैं। वे आज भी लोकतंत्र के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। लेकिन राजनीति का केंद्र धीरे-धीरे पहचान से प्रदर्शन और नारों से परिणाम की ओर बढ़ रहा है।
मतदाता अब केवल यह नहीं पूछ रहा कि "आप किस वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं?"
वह यह भी पूछ रहा है—
"आपने कितनी नौकरियाँ पैदा कीं?"
"कितना निवेश लाए?"
"कितनी बिजली बनाई?"
"कितनी सड़कें बनाईं?"
"भारत को भविष्य की तकनीकों में कहाँ पहुँचाया?"
शायद यही कारण है कि आज भारत की राजनीतिक चर्चा में AI, EVs, सौर ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन, हाईवे, मेट्रो, डाटा सेंटर और विनिर्माण जैसे शब्द पहले से कहीं अधिक सुनाई दे रहे हैं।
राजनीति का यह परिवर्तन अभी पूर्ण नहीं हुआ है, लेकिन दिशा स्पष्ट दिखाई देती है।
21वीं सदी का भारत केवल चुनाव जीतने की नहीं, बल्कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा जीतने की राजनीति की ओर बढ़ रहा है। 🇮🇳
इससे पहले वाली अपनी qout टिप्पणी देखियेगा। मेरे प्रोफाइल से आप कई जानकारी उपहास के लिए लेकर आए थे। मेरे लिखे हुए को अज्ञानता से प्रेरित कहा था।
जब हमने आपको उपमा के बारे में बताया तो आपने मूल बात याद ही नहीं रखी। इसलिए आपको पल्लवग्राही कहना सर्वथा उचित है।
अपनी टिप्पणी में आपने फिर से प्रधानमंत्री का उल्लेख किया, वह भी आपके पल्लवग्राही होने का परिचायक है। लोभ लाभ किसे है? कौन दिग्विजय जी की कृपादृष्टि चाहता है, वह स्पष्ट है।
सचिन जी! आपको अभी कुछ चीजें सीखना चाहिए।