प्रभु श्रीराम ने कई कष्ट झेले कभी गुस्सा नहीं किया। हम सभी को प्रभु श्रीराम से सीखना चाहिए कि धैर्य के साथ ही जीवन में सभी चुनौतियों का सामना करना चाहिए।
"रघुकुल रीत सदा चली आई।
प्राण जाई पर वचन न जाई।।
भगवान श्रीराम सदा ही इस बात पर अमल करते थे। अपने पिता के वचन के लिए उन्होंने राज-पाठ छोड़कर वनवास स्वीकार किया था।
🙏 " जय श्री राम " 🙏
महान संत परमपूज्य आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज जैसे महापुरुष का ब्रह्मलीन होना, देश और समाज के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने अपनी अंतिम साँस तक सिर्फ मानवता के कल्याण को प्राथमिकता दी। मैं अपने आप को सौभाग्यशाली मानता हूँ कि ऐसे युगमनीषी का मुझे सान्निध्य, स्नेह और आशीर्वाद मिलता रहा।
मानवता के सच्चे उपासक आचार्य विद्यासागर जी महाराज का जाना मेरे लिए एक व्यक्तिगत क्षति है। वे सृष्टि के हित और हर व्यक्ति के कल्याण के अपने संकल्प के प्रति निःस्वार्थ भाव से संकल्पित रहे।
विद्यासागर जी महाराज ने एक आचार्य, योगी, चिंतक, दार्शनिक और समाजसेवी, इन सभी भूमिकाओं में समाज का मार्गदर्शन किया। वे बाहर से सहज, सरल और सौम्य थे, लेकिन अंतर्मन से वज्र के समान कठोर साधक थे। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य व गरीबों के कल्याण के कार्यों से यह दिखाया कि कैसे मानवता की सेवा और सांस्कृतिक जागरण के कार्य एक साथ किये जा सकते हैं।
आचार्य विद्यासागर जी महाराज का जीवन युगों-युगों तक ध्रुवतारे के समान भावी पीढ़ियों का पथ प्रदर्शित करता रहेगा। मैं उनके सभी अनुयायियों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करता हूँ।
जैन धर्म के आध्यात्मिक चेतना के पुंज, संत शिरोमणि आचार्य गुरुवर श्री 108 विद्यासागर जी महाराज की संलेखना पूर्वक समाधि का समाचार संपूर्ण मानवता के लिए अपूर्णीय क्षति है।
उनका त्याग, तपस्या और तपोबल सदैव हमें प्रेरित करता रहेगा।
पूज्य आचार्य को कोटि कोटि नमन🙏
आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज जी का ब्रह्मलीन होना देश के लिए एक अपूरणीय क्षति है। लोगों में आध्यात्मिक जागृति के लिए उनके बहुमूल्य प्रयास सदैव स्मरण किए जाएंगे। वे जीवनपर्यंत गरीबी उन्मूलन के साथ-साथ समाज में स्वास्थ्य और शिक्षा को बढ़ावा देने में जुटे रहे। यह मेरा सौभाग्य है कि मुझे निरंतर उनका आशीर्वाद मिलता रहा। पिछले वर्ष छत्तीसगढ़ के चंद्रगिरी जैन मंदिर में उनसे हुई भेंट मेरे लिए अविस्मरणीय रहेगी। तब आचार्य जी से मुझे भरपूर स्नेह और आशीष प्राप्त हुआ था। समाज के लिए उनका अप्रतिम योगदान देश की हर पीढ़ी को प्रेरित करता रहेगा।
राम नाम का जाप करने वाले व्यक्ति को उसके अभिमान, लालच, वासना, क्रोध और द्वेष जैसी भावनाओं का भी अंत हो जाता है। भगवान राम का नाम ही छोटा सा शक्तिशाली महामंत्र है जिसके सिर्फ जपने से ही व्यक्ति को सही मार्ग दिखने लगता है।
जय रघुनंदन " जय श्री राम " ❣️
ॐ नमः सिद्धेभ्य: ॐ नमः सिद्धेभ्य: ॐ नमः सिद्धेभ्य:
आध्यात्मिक चेतना के पुंज, विश्ववंदनीय संत शिरोमणि परमपूज्य आचार्य गुरुवर श्री 108 विद्यासागर जी महाराज की संलेखना पूर्वक समाधि सम्पूर्ण जगत के लिए अपूरणीय क्षति है।
आपका संयमी जीवन और महान विचार हमें सदैव सत्पथ पर चलने की प्रेरणा देते रहेंगे।
नमोस्तु नमोस्तु नमोस्तु : CM
@DrMohanYadav51
राम नाम में ऐसी शक्ति है कि बुरे समय को शुभ समय परिवर्तित कर जीवन में सौभाग्य और समृद्धि लाता है, राम नाम जपने के अपेक्षा 100 गुना अधिक पुण्य राम का नाम लिखने से मिलता है।
आप भी लिखें " जय श्री राम " 🙏