अपने महराजगंज संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत बनियापुर विधानसभा के भूमिहरा निवासी श्री पप्पू सिंह जी के पुत्र के तिलक समारोह में उपस्थित होकर परिवार को शुभकामनाएँ एवं आशीर्वाद दिया।
परिवारजनों से आत्मीय भेंट कर उनके सुख‐समृद्धि की मंगल कामना की।
अपने महाराजगंज संसदीय क्षेत्र के बनियापुर विधानसभा अन्तर्गत कन्हौली मनोहर टोला के कर्ता श्री संजय सहाय जी की सुपुत्री के शुभ विवाह समारोह में सम्मिलित होकर नवयुगल को हार्दिक आशीर्वाद एवं शुभकामनाएँ दीं।
अपने बुलंद विचारों, दृढ़ नेतृत्व व निर्भीकता के लिए प्रसिद्ध शिवसेना के संस्थापक, प्रखर हिंदूवादी नेता बाल ठाकरे जी की पुण्यतिथि पर विनम्र श्रद्धांजलि!
आज उनकी पुण्यतिथि पर हम उनके विचारों और संघर्षों को नमन करते हैं। उनका नेतृत्व, संघर्ष और समाज के प्रति समर्पण हमें सदैव प्रेरित करता रहेगा।
#बालासाहेब_ठाकरे
2025 बिहार सेमी फाइनल था जो हम जीत गए इसका फाइनल 2027 में उत्तर प्रदेश में होगा ...वहां भी डंके की चोट पर जीतेंगे
पहले मगध में भगवा लहराया अब अवध में भी भगवा लहराएंगे।
मतलब साफ है 2027 में 2017 दोहराएंगे!#BiharElection2025
हिमालय की ऊँची चोटियों पर, जहाँ बादल भी सिर झुकाकर गुजरते हैं, विराजमान थे महादेव शिव—जटाधारी योगी, जिनके माथे पर चंद्रमा की टेढ़ी रेखा प्रेम की अमिट निशानी बनी हुई थी। उनका तन भस्म से लिपटा था, मानो संसार की नश्वरता को ही अपना आभूषण बना लिया हो। गले में नागों का हार, हाथ में डमरू, और तीसरी आँख बंद, जैसे कोई ज्वालामुखी शांतिपूर्वक साँस ले रहा हो।
नीचे, पृथ्वी पर अराजकता का तांडव मचा था। दक्ष प्रजापति की यज्ञशाला में, शिव की पत्नी सती ने अपने पिता के अपमान को सहा न सका। वह आग की लपटों में समा गईं, शिव का नाम जपते हुए। समाचार शिव तक पहुँचा तो आकाश काँप उठा। उनका ध्यान भंग हुआ, और क्रोध की लहर ने उन्हें घेर लिया। "संसार, तूने मेरी सृष्टि को छीन लिया!" गर्जना करते हुए, वे उठे।
शिव ने सृष्टि को नृत्य में बाँध दिया—तांडव! उनका डमरू गूँजा, जैसे ब्रह्मांड की धड़कन। नृत्य में पर्वत काँपे, नदियाँ उफनाईं, और सितारे बिखर गए। विष्णु ने चक्र से सती के शरीर को टुकड़ों में बाँट दिया, ताकि तांडव थमे, किंतु शिव का क्रोध नहीं माना। वे सती के शरीर को कंधे पर लादे, घूमते रहे—संसार को चेतावनी देते हुए कि विनाश का स्वरूप क्या होता है।
तब विमाता पार्वती ने अवतार लिया। उन्होंने तपस्या से शिव को प्रसन्न किया, और एक दिन, जब शिव का तांडव शांत हुआ, तो पार्वती ने कहा, "महादेव, क्रोध तो आपका रूप है, किंतु प्रेम ही आपका सार।" शिव मुस्कुराए। सती के अंगों से शक्तिपीठों की राशि बनी, और शिव-पार्वती का मिलन हुआ—विनाश के बाद सृजन का प्रतीक।
आज भी, जब डमरू की ध्वनि सुनाई देती है, तो याद आता है वह तांडव—जो सिखाता है कि विनाश में ही नई शुरुआत छिपी है। महादेव की कृपा से, संसार चक्र चलता रहता है।
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जब बिहार में ASI सुरक्षित नहीं तो आम आदमी क्या उम्मीद कर सकता है। बिहार में जिस तरह अपराधिक ग्राफ बढ़ रहा ना आम आदमी सुरक्षित है ना पुलिस वाले । बिहार में सीएम योगी जी जैसा चाहिए तभी कुछ हो सकता है नहीं तो यही होता रहेगा