बिहार के छात्र का छलका दर्द!
"अगर पैसा होता तो मैं भी सीट खरीद लेता!
आज मैं Blinkit में 10 घंटे काम करता हूं उसके बाद जाकर पढ़ता हूं!
मैं मेहनत कर के घर भी चलाता और पढ़ाई भी करता हूं!
उसके बाद भी पेपर लीक हो जाता!
जिसके पास पैसा है वो सीट खरीद लेते है"
मेहनत करने वाले कहां जायेंगे??
किसान आंदोलन में कितने लोग मर गए,
पेपर लीक में कितने बच्चे मर गए,
तो इससे सरकार को क्या फर्क पड़ता है?
एक दिन रैली में बोल दिया जाएगा कि,
"बटेंगे तो कटेंगे"
फिर क्या सारा डैमेज कंट्रोल हो जाएगा।
याद रखिए, Sonam Wangchuk कौन हैं। 🚨
वही शख्स जिसने शिक्षा के क्षेत्र में देश का नाम रोशन किया, लद्दाख के बच्चों के लिए स्कूल बनाए और हिमालय के ग्लेशियरों को बचाने की लड़ाई लड़ी।
आज वे छात्रों के लिए 16वें दिन भी भूख हड़ताल पर हैं, लेकिन केंद्र सरकार उनकी आवाज़ सुनने को तैयार नहीं दिख रही।
क्या शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान आज रात चैन से भोजन कर पाएंगे?
यह सवाल अब सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि देश के लाखों छात्रों की चिंता का प्रतीक बन चुका है।
दिल्ली में पिछले 17 दिनों से सरकार के विरोध में भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक की बिगड़ती सेहत ने समर्थकों की चिंता बढ़ा दी है. हज़ारों लोग उनसे अनशन ख़त्म करने की अपील कर रहे हैं. दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहा यह आंदोलन कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने शुरू किया है. सोनम वांगचुक 28 जून को इस प्रदर्शन से जुड़े थे और उसी दिन से भूख हड़ताल पर हैं.
रिपोर्ट: शुभ राणा
आवाज़: मुकुंद झा
एडिट: सदफ़ ख़ान
सोनम वांगचुक के आमरण अनशन को 15 दिनों से ज़्यादा हो चुके हैं।
एक नागरिक लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात कह रहा है। उसकी सेहत लगातार गिर रही है। उसके साथी भी भूख हड़ताल पर डटे हुए हैं। लेकिन सत्ता की चुप्पी अब सिर्फ़ चुप्पी नहीं, लोकतांत्रिक संवेदनशीलता पर एक बड़ा सवाल बन चुकी है।
यह सिर्फ़ शिक्षा मंत्री की जवाबदेही का सवाल नहीं है। यह पूरी मोदी सरकार की जवाबदेही का सवाल है। जब शिक्षा से लेकर रोज़गार, परीक्षा व्यवस्था, संस्थाओं की निष्पक्षता और शासन की पारदर्शिता तक लगातार सवाल उठ रहे हों, तब सरकार का दायित्व जवाब देना होता है, ख़ामोश रहना नहीं।
लोकतंत्र में जनता सवाल पूछती है और सरकार जवाब देती है। अगर सवाल पूछने वालों को लगातार अनसुना किया जाएगा, विरोध की आवाज़ों को नज़रअंदाज़ किया जाएगा और जवाबदेही की जगह सिर्फ़ सत्ता का अहंकार दिखाई देगा, तो यह किसी भी लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत नहीं है।
आज ज़रूरत किसी एक व्यक्ति के साथ खड़े होने की नहीं, बल्कि उस लोकतांत्रिक अधिकार के साथ खड़े होने की है, जो हर नागरिक को अपनी बात कहने का अधिकार देता है।
अगर आज भी जनता अन्याय, जवाबदेही की कमी और लोकतांत्रिक आवाज़ों की अनदेखी पर चुप रही, तो कल सवाल पूछने की जगह भी धीरे-धीरे सिमट सकती है।
सरकारें जनता से बड़ी नहीं होतीं। लोकतंत्र की असली ताक़त जनता है। इसलिए आवाज़ उठाइए, सवाल पूछिए और जवाबदेही माँगिए - क्योंकि लोकतंत्र तभी मज़बूत रहता है, जब नागरिक ख़ामोश नहीं रहते।
क्या आपने सोनम वांगचुक का रात का ये VIDEO देखा? तस्वीरें चिंता बढ़ा रही हैं...!🥹 . . . 🥺
सभी लोग सोशल मीडिया पर इस पोस्ट को खूब शेयर करो,
जिससे सरकार के कानों में आवाज पहुंचे 😭
20-20 घण्टे रातों में जागकर बिहार के स्वास्थ्य विभाग की सारी फाइलें पढ़ चुके हैं निशांत कुमार-बिहार में सरकारी अस्पताल में डॉक्टर एक-एक डिटेल में खुद सबकी फाइल पढ़ चुके हैं कहां क्या समस्या है
Nishant Kumar का फ़िर दिखा नया अवतार !
15,000 CCTV कैमरे लगेंगे, सॉफ्टवेयर डेवलप होगा। डॉक्टर की एक-एक मूवमेंट की ट्रैकिंग होगी।
एक दिन में कितना ऑपरेशन किया, कितना राउंड लगाया, और मैं खुद एक-एक जगह जाऊंगा। कैमरों से भी मॉनिटरिंग करूंगा।
ये Nishant Kumar करना क्या चाहते हैं, भाई?
बिहार का Health System सुधारने का ठेका ले लिया है क्या?
बिहार के Medical Mafia के सामने कितना दिन तक टिक पाएंगे?
Nitish Kumar ने अपने बेटे को सबसे बड़ा Mafia वाला Ministry दे दिया है।
Nishant Kumar अगर इससे निपट लेंगे, तो 2030 में Nishant Kumar को कोई रोक नहीं सकता। वह सबको चौंका देंगे।
Nishant Kumar इतना विस्तार से बिहार के Health Sector पर ध्यान दे रहे हैं, काम कर रहे हैं, और एक भारत का Health Minister है, जो सिर्फ साहब को चाय पिलाता है।
70% भारतीयों को उसका नाम भी नहीं पता होगा। India का Health Minister कौन है? बिना Google किए हुए बताओ !
निशांत कुमार ने पहले दिन मंत्रालय में आने के बाद बोला था अभी नया हूं पहले देखूंगा सीखूंगा उसके बाद कुछ बोल सकता हूं Thankyou !
मुज़फ्फरनगर में मजदूरों की बंधुआ मजदूरी का मामला बेहद चौंकाने वाला है।
बिना मज़दूरी दिए काम करवाने के अलावा, मजदूरों को कुत्तों से कटवाया गया, भाले से गोदा गया, कोड़े मारे गए, और उन्हें मवेशियों का चारा खिलाया गया। यह इंसानी गरिमा पर हमला है - पीड़ितों को न्याय के साथ पुनर्वास और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए।
साथ ही हमें यह भी पूछना ज़रूरी है कि मज़दूर ऐसी खतरनाक परिस्थितियों में किन मजबूरियों में फंस जाते हैं।
जब रोज़गार ख़त्म हो जाते हैं, आमदनी ठहर जाती है, और सबसे कमज़ोर वर्गों के लिए बने मनरेगा और श्रम कानूनों जैसी सुरक्षाएं कमज़ोर कर दी जाती हैं, तो हताशा बढ़ती जाती है। जिन लोगों के पास कोई और विकल्प या सुरक्षा नहीं होती, वो ऐसे शोषण का आसान शिकार बन जाते हैं।
यह कोई आम आपराधिक घटना नहीं है - यह एक धराशाई हुई अर्थव्यवस्था का मलबा है।
India का Health Minister को ऐसे बोलने आता है क्या सोच पाएगा ऐसा -
इतना दिन से चुप चाप था एक एक चीज की जानकरी ले रहा था पहले दिन निशांत कुमार ने बोल दिया था मुझे नहीं पता है मुझे अभी सब समझने दीजिए अब बहुत कुछ समझ गया अब खेला सुरु हो गया है
नीतीश कुमार का खून है दहारेगा ही-
सुन लो जी Nishant Kumar हां हम बिहार के Health Minister बोल रहे हैं
अभी के समय में भारत के कोई स्वास्थ्य मंत्री का इतना जिम्मेदारी से बोला गया Speech सुना दो,
बाकी जितना ट्रोल करना है ट्रोल कर दो कपड़ा यह नहीं बदलेगा बाकी 2030 में बहुत लोगों को बदल देगा !
2030 तब तक बहुत लोगों की नींद उड़ा देगा पहले राजनीति में नहीं था जब राजनीति में आया है तो पूरी तरह से आया है
ट्रोल करने वालों से ना नीतीश कुमार को फर्क पड़ता है ना निशांत कुमार को फर्क पड़ रहा है ना अपनी ताकत का गलत इस्तेमाल करेंगे यही खासियत है
निशांत के पिक्चर Video पर सिर्फ यहीं एडिटिंग होगी देखते जाओ
Edit करके तूने मेरा Image Meme बना दिया मेहनत करके भाई ने तेरा Dream बना दिया !
रूह कँपाने वाली अमानवीय यातना से गुज़रे इस मज़दूर का बयान सुनिए.
इनके जैसे तमाम मजदूरों को उत्तर प्रदेश के मुजफ़्फ़र नगर के कारखाने में बंधक बनाकर रखा गया था.
24 घंटे में एक बार सूखी नमक रोटी देकर लगातार काम कराया जाता था. सोने नहीं दिया जाता था, कुत्तों से कटवाया जाता था.
@myogiadityanath@myogioffice
उत्तर प्रदेश के मुज़फ़्फ़रनगर में बंधुआ मज़दूरी का ऐसा दिल दहलाने वाला मामला सामने आया है जो किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
खबरों के मुताबिक, मज़दूरों को बंधक बनाकर रखा गया था। उन्हें मेहनताना देने की जगह भयानक यातनाएं दी जाती थीं। सूखी रोटी और मवेशियों का चारा खिलाया जाता था। धारदार हथियारों और कोड़े से मारा जाता था। कुत्तों से कटवाया जाता था।
यह सिर्फ़ कुछ व्यक्तियों पर क्रूरता नहीं, बल्कि मानवीय गरिमा पर और हमारे संविधान पर हमला है। मामले में सख़्त कार्रवाई होनी चाहिए और दोषियों को ऐसी सज़ा मिलनी चाहिए जो नज़ीर बने।
सध्या तिवारी बुर्के में हुई गिरफ्तार।
बुर्के के अंदर शराब का पैकेट्स छिपाकर बस में कर रही थी सप्लाई,
जब वह बस में चढ़ रही थी तभी एक यात्री से टकराने से कुछ शराब के पैकेट नीचे गिर गये
जिससे लोगों को शक हुआ फ़िर उसी वक्त
लोगों ने पुलिस को फोन करके बुलाया,
जब पुलिस ने संध्या तिवारी का बुर्का उतारवाया उसके बाद
जो दृश्य दिखा सभी दंग रह गये, हजारों रुपये के शराब के पैकेट निकले।
पुलिस रंगे हाथों संध्या तिवारी को गिरफ़्तार करके थाने ले गई।
ऐसे लोगों के कारण हिन्दू धर्म को नुक्सान हुआ इन लोगों ने धर्म को मुट्ठी में बंद कर लिया ❓
धर्म निजी आस्था का विषय है। मेरे बाबूजी नास्तिक थे तो क्या वो हिन्दू नहीं थे 👍❓
मेरे भाई ने RSS के कारण सगाई तोड़ दी, हिंदू तो वो भी थे पर विघटन करने वालों के चक्कर में आ गए थे ❓😂
नागपुर का एक बच्चा एक महीने से NEET re-exam की तैयारी कर रहा था।
कल परीक्षा से ठीक एक दिन पहले उसने admit card डाउनलोड किया। उसका सेंटर निकला - अबू धाबी।
न पासपोर्ट, न परिवार के पास विदेश भेजने के पैसे, न अब कोई वक़्त बचा है। वो रातभर रोता रहा, और परीक्षा देने से ही मना कर रहा है - क्या इस तनाव की कल्पना भी की जा सकती है?
आखिर ऐसा हुआ भी कैसे? कल किसी भी छात्र को सेंटर तक न पहुँच पाने की शिकायत नहीं होनी चाहिए। NTA असल में देश के बच्चों और उनके माता-पिता का सिर्फ़ धीरज test कर रही है।
जो system एक बच्चे को अपने ही शहर में एक centre नहीं दे सकती, उल्टा विदेश भेज सकती है - उसे परीक्षा करवाने का कोई हक़ नहीं।
कोटा में मैंने यही कहा था - यह अब शिक्षा व्यवस्था नहीं रही। यह एक पूरी पीढ़ी के पैसे, समय और मानसिक शांति की वसूली है।
हमारे बच्चों के भविष्य के साथ जुआ खेलना बंद कीजिए। वो एक संवेदनशील, ज़िम्मेदार और जवाबदेह शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा के अधिकारी हैं - और हम ये उन्हें दिलवा कर रहेंगे।
#ChhatronKiGoonj
#ChhatraJodo