2025 में मैंने धुरंधर देखने के बाद ये चिट्ठी लिखी थी और नाम दिया था @"देशी धुरंधर" सोचा था उसी दिन देश की महत्वपूर्ण एजेंसियों को इस संबंध में लिखूंगा। लेकिन बहुत सी उधेड़बुनों में उलझा रहा। आज ये सामने आई तो सोचा शेयर कर दूं।
आज चिट्ठी का आव्हान है
"कहां हैं हमारे देशी धुरंधर"
श्रीमान नेताओं,सरपंच से लेकर प्रधानमंत्री जी तक की जिम्मेदारी,जवाबदेही कब लागू होगी?! हमें तो पक्ष,विपक्ष सभी पार्टियों उनके फंड,संसाधनों का सहयोग भी चाहिए। क्या उनके कार्यक्रम,रैली,
आंदोलन आदि डायरेक्ट आम जनता के लिए भी होंगे?! देश बड़ा या ये सब?! क्या जनता को उनका ये हक मिलेगा?
सही बात है। क्या सरकारी भर्तियों अन्य टेस्ट जैसे झूठ, भ्रष्टाचार आदि भी हो सकते हैं। सभी नेताओं को भी शामिल नहीं किया जाना चाहिए?!
तभी बनेगा मेरा भारत महान?!
क्या ऐसा होगा?! पूछता है भारत?!
निवेदक : चंद्रगुप्त
मान्यवर अब सही समय है जल्दी से जल्दी ज्यादा से ज्यादा स्त्रोत लगाकर भारत की युद्ध प्रतिरोधक क्षमता को विकसित कर बढ़ाया जाना चाहिए। हम 140 करोड़ देशवासियों को जो भी त्याग करना पड़ा जरूर करेंगे। आप आगे कार्यक्रम को आगे बढ़ाएं।
@elonmusk that's great,Change is the law of nature, and it should be so. The historical forces that have existed for thousands of years are bound to be reorganized one day. India
विदेशी दुश्मनों से बाद में निपटेंगे पहले अपने घर की गंदगी साफ करिए जी। वरना छोटे2 देश भी हमें आँखें दिखाते रहेंगे। असली देशभक्तों,तकनीक का सहारा लीजिए। अगर आप ऐसा नहीं कर सकते तो पद छोड़िए। ट्रंप 100 बार भारत का मजाक उड़ा चुका और हम अभी तक चुप हैं?! देश के सम्मान से बड़ा क्या है?
@पॉल्यूशन का सॉल्यूशन?! 1994 में मैने 8वीं बोर्ड परीक्षा में सुबह की सैर का निबंध लिखा था। हिंदी में अच्छे नंबर भी आए थे। आज सैर की सोचता हूं तो सरकार घर से बाहर निकलने को मना करती है। मुझे पॉल्यूशन का सॉल्यूशन चाहिए सरकार जी?! मुझे सैर पर जाना है?! घर से कब निकलना मुनासिब होगा?
@realDonaldTrump मैं माननीय पंचायती महोदय श्री डोनाल्ड ट्रंप को भारत और पाकिस्तान क्रिकेट संघर्ष को 3-0 से हराम करवाने पर नोबल पुरस्कार के लिए नॉमिनेट करता हूं।
😂 😆
@realDonaldTrump Me Chandragupt Honorable Panchayati Sir, I nominate Mr. Donald Trump for the Nobel Prize for ruining the India-Pakistan cricket match 3-0. Jai Hind