#NoTetBeforeRteAct
जो व्यवस्था देश के किसी कर्मचारी,अधिकारी या न्यायाधीश पर लागू नहीं है वो देश के बेसिक शिक्षकों पर लागू करना देश के 25 लाख शिक्षकों एवं उनके करोड़ों परिजनों के साथ अन्याय है ।
शिक्षकों की आवाज उनके दुख सुख में हमेशा चट्टान की तरह खड़े रहने वाले आदरणीय अध्यक्ष जी आप द्वारा लिए गए सोच समझ कर लिए गए हर निर्णय हमेशा सफल रहे हैं हम सभी आपके साथ हैं
@DrDCSHARMAUPPSS@bstvlive
एक देश एक विधान होना चाहिए जिस प्रकार शिक्षकों पर नियम विरुद्ध TET थोपा जा रहा है उसी प्रकार निर्णय देने वालो को भी परीक्षा पास करनीं चाहिए जिसकी लाठी उसकी भैंस नहीं चलेगा नहीं चलेगा।
माननीय प्रधानमंत्री जी से विशेष अपील है की संसद में अध्यादेश लाकर शिक्षकों के साथ न्याय करें देश भर के लगभग 25 लाख लोगों से जुड़े परिवार के रोजी रोटी की समस्या है!
@PMOIndia@dpradhanbjp@myogiadityanath@DrDCSHARMAUPPSS
नहीं, माननीय जस्टिस दीपांकर दत्ता जी ने जूडिशियरी की कोई परीक्षा (जैसे WBJS) उत्तीर्ण नहीं की है।
वे 1989 में हाजरा लॉ कॉलेज से LL.B. करके उसी साल एडवोकेट के रूप में एनरोल हुए। करीब 17 साल प्रैक्टिस के बाद 2006 में कलकत्ता हाई कोर्ट के जज के रूप में **बार से सीधे एलीवेट** किए गए।
हाई कोर्ट/सुप्रीम कोर्ट के जज अक्सर अनुभवी एडवोकेट्स में से चुने जाते हैं, बिना ज्यूडिशियल सर्विस एग्जाम के। AIBE की तरह यह भी उनके समय में अनिवार्य नहीं था।
@grok@DrDCSHARMAUPPSS जी आदरणीय अध्यक्ष जी,
स्वयं की धारित पद की कोई परीक्षा नहीं, योग्यता का कोई मापदंड नहीं। और देश के भविष्य निर्माताओं की योग्यता का मापदंड तय कर रहे हैं जिसका उन्हें कोई अधिकार नहीं है।
शिक्षक एकता जिंदाबाद
डॉ दिनेश चंद्र शर्मा जिंदाबाद
UPPSS जिंदाबाद
TFI जिंदाबाद
#इति_सिद्धम
वे अपने लिये संसद के बनाये क़ानून को भी नहीं मानेंगे ,क्योंकि उनको न्यायिक स्वतन्त्रता चाहिये ।
बिना किसी परीक्षा में सम्मिलित हुए केवल अनुभव और सिफारिश के आधार पर नियुक्ति और प्रमोशन लेते रहेंगे ।
आप पर वे नियम थोपे जाएँगे जो संसद ने आपके लिए बनाए ही नहीं हैं
2017 के संशोधन सहित आरटीई में कहीं टेट का उल्लेख नहीं है आरटीई के 23(1) के द्वारा प्रदत्त शक्ति से एनसीटीई ने 23 August 2010 को minimum qualification परिभाषित की है जोकि नियुक्ति वर्षों के अनुसार with tet और without tet है लेकिन माननीय जी ने minimum qualification को TET लिख दिया तो लिख दिया ।
आपको नियुक्ति हेतु निर्धारित परीक्षा उत्तीर्ण करने के नियुक्त होने के 20-25 वर्षों बाद भी परीक्षा में बैठायेंगे ।
अनुभव के आधार पर पदोन्नति तो दूर नौकरी (उस नौकरी में जिसमें नियुक्ति की प्रक्रिया में कोई दोष या आपत्ति नहीं है)में भी आप नहीं रहेंगे ।20-25 lakhलाख शिक्षकों की नौकरी जाये तो जाये उन पर कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता।
हमने सदैव कहा कि रास्ता संसद से निकलेगा ।इसलिए अब minimum qualification को parliament से define कराने हेतु आगे बढ़ेंगे ।
@narendramodi@AmitShah@dpradhanbjp@myogiadityanath