महिला सशक्तिकरण और रक्षाबंधन का इससे बेहतर विज्ञापन शायद ही हो सकता है।
कुछ घटिया ब्रांड सस्ती पब्लिसिटी के चक्कर में कम समझ वाले ब्रांड मैनेजरों के जरिए सस्ती एजेंसियों और अभिनय का ककहरा भी न जानने वाली अभिनेत्रियों से कपड़े उतरवाकर रक्षाबंधन जैसे पवित्र पर्व के विज्ञापन बना रहे हैं। यह सब कम बजट में भी हो जाता है।
लेकिन असली रचनात्मकता, संवेदनशीलता और संदेश देने की कला क्या होती है, यह इस विज्ञापन से सीखने की जरूरत है!!
"बेचारा अदब'
देह के कैनवास पर
उकेरा जा रहा है साहित्य
आजकल ,
शरीर की स्लेट पर
लिखी रही है
अश्लील कविताएं ,
उन्मादी क़लम तोड़ रहा है
बेख़ौफ़ अपनी हदें ,
कुछ लोग भर रहे हैं आह
कुछ लोग कर रहे हैं वाह
और "बेचारा अदब"
हो रहा है शर्मिंदा
और तबाह बेपनाह
-Kavita"kiran"
नाम नकुल (बजरंग दल) का का सदस्य है
ये दो मुस्लिम लड़कों जीशान और शावेज़ को कानूनी मामले में फंसाना चाहता था।
इसलिए नकुल ने इन दोनों लड़को को 'लव जिहाद' और 'गैंगरेप' के झूठे आरोप में फंसाने के लिए अपनी ही बहन को उनके पास (कार में) भेजा।
और फिर नकुल ने पीछे से जाकर अपनी बहन का एक वीडियो बनाया जिसमें लड़की यह नाटक करती है कि उसके साथ बहुत गलत हुआ है।
इसके बाद हिंदू संगठनों (जैसे हिंदू परिषद/बजरंग दल) के लोग इकट्ठे हो जाते हैं और पुलिस को बुलाया जाता है।
पुलिस जब लड़की को कस्टडी में लेकर मेडिकल जांच और कानूनी पूछताछ के लिए ले जाती है तो लड़की पुलिस की सख्त जांच और पूछताछ का दबाव नहीं झेल पाती।
फिर क्या वह सच उगल देती है और कबूल करती है कि यह दोनों लड़को को फंसाने के लिए रचा गया एक झूठा षड़यंत्र था।
साजिश का भंडाफोड़ होने के बाद मुख्य आरोपी नकुल फरार हो जाता है। पुलिस की तीन टीमें उसकी तलाश में जुटी हुई है
किसी को फँसाने के लिए अपनी ही बहन को मोहरा बना देना इंसानियत और रिश्तों दोनों की हार है।
बुजुर्ग कहते थे कि अपनी कमाई अपनी घरवाली का हाथ में रखोगे तो घर में लक्ष्मी आएगी बरकत आएगी लेकिन मैं कहता हूं अगर आप अपनी कमाई अपनी घरवाली को दोगे तो घर में पार्सल आएंगे पार्सल कभी मीशो के फ्लिपकार्ट के कभी अमेजॉन के