गृहमंत्री अमित शाह ने भरी संसद में "आम्बेडकर, आम्बेडकर" कहकर बाबासाहेब आम्बेडकर का मजाक उड़ाया था।
आज बाबासाहेब के दीवाने "जय भीम" का नारा लगाते हुए उसी संसद भवन को घेरने निकल पड़े हैं। पूरी दिल्ली बंद है।
सुनो सरकार, देश बाबासाहेब के नाम से ही चलेगा। समझे?
दिल्ली पुलिस की देखिए...
पुलिस की गाड़ी पर खुद चढ़वा कर के पुलिस की लाल बत्ती पर पैर रखवा कर, खुद युवाओं पर लाठी चलवा रही है!
चन्द्र शेखर रावण खुद भाजपा के करीबी हैं, इसलिए पुलिस वाले इनको गाड़ी पर दिल्ली पुलिस गाड़ी पर नहीं चढ़ाती!
सिविल ड्रेस में लाठियां भांजते यह योद्धा कौन है जिनके साथ पुलिस कंधे से कंधा मिलाकर चल रही है।
क्या पुलिस ने लाठियां भांजने के लिए आउटसोर्सिंग पर लोगों को रखना शुरू कर दिया है।
देश के छात्रों पर आँसू गैस फेंका जा रहा। उधर दिल्ली पुलिस कह रही कोई लाठीचार्च नहीं हुआ।
दिल्ली पुलिस बताये यह आसूँ गैस क्या बिहार पुलिस दिल्ली में आकर छोड़ रही हैं
केन बेतवा प्रोजेक्ट के विरोध में प्रदर्शन कर रहे प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार करके ले जाया गया है जो की अभिव्यक्ति की आजादी और शांतिपूर्ण धरने करने के अधिकार का उल्लंघन है, इसपर कॉलेजियम वीर मौन है ये दुर्भाग्य है देश की न्याय प्रणाली का जो नाम के संविधान रखवाले बने बैठे हैं
लखनऊ में स्कूल वैन के ड्राइवर गिरीश मिश्रा ने 4 साल की मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म किया ।
ब्राह्मण जीन पर गर्व करने वाले इस बलात्कारी गिरीश मिश्रा के जीन पर एकदम चुप्प है ।
1.आज से जब संसद का मानसून सत्र शुरू हो रहा है, सदन से लेकर सड़कों व दिल्ली के जन्तर-मन्तर तक में विभिन्न ज्वलन्त मुद्दों को लेकर ज़बरदस्त टकराव की स्थिति है, जिसे देश के विकट राजनीतिक, आर्थिक एवं सामाजिक हालात के मद्देनज़र ज़रूर बेहतर सूझबूझ से टाला जाना चाहिये।
2.वैसे भी सर्वसमाज के करोड़ों परिवारों के लिये जीवनदायी मेडिकल आदि की अति-महत्वपूर्ण व विशेष आल-इण्डिया परीक्षायें सहित राज्यों में नौकरी सम्बंधी परीक्षायें आदि भी लगातार हो रहे पेपरलीक/गड़बड़ी आदि के कारण रद्द होने की अनिश्चितता से ख़ासकर युवा वर्ग व बेरोज़गार लोग लगातार काफी ज़्यादा परेशान हैं, जो विभिन्न जगहों पर अनेकों प्रकार से व्यक्त किये जा रहे उनके आक्रोश व आन्दोलन आदि से भी प्रकट है और यह देश व जनहित से जुड़ा ऐसा अति-गंभीर मामला है जिसपर पूरी तरह से क़ाबू में करने के लिये सरकारों को तत्काल सख़्त क़दम उठाना नितान्त आवश्यक है।
3.साथ ही, इसके लिये ज़िम्मेदारी भी ज़रूर तय होनी चाहिये तथा ख़ासकर परीक्षा व्यवस्थाओं से जुड़े उच्च पदों पर बैठे लोगों के विरुद्ध भी कड़ी क़ानूनी सज़ा हो ताकि देश की तरक्की की नींव युवा पीढ़ी का भविष्य इस प्रकार की अनिश्चितता और अंधकार से आगे बच पाये।
4.इसी क्रम में यूपी, राजस्थान, दिल्ली सहित देश के विभिन्न राज्यों/शहरों में जिस प्रकार से, अच्छे सरकारी स्कूलों व सरकारी स्कूलों में अच्छी पढ़ाई के घोर अभाव में, प्राइवेट स्कूल एवं बड़ी-छोटी कोचिंग संस्थायें, तेज़ी से पनप रही हैं, उससे यह स्पष्ट है कि देश का युवा वर्ग व उनका परिवार, ज़बरदस्त महंगाई के इस दौर में भी अपना पेट काटकर एवं अन्य परेशानियों को झेलकर भी, अपने स्तर से पूरा जी-जान लगाकर आगे बढ़ने हेतु प्रतिबद्ध है।
5.वे लोग आउटसोर्सिंंग की शोषणकारी छोटी-मोटी नौकरी आदि से आगे बढ़कर स्थाई व स्वाभिमानी नौकरी में अपना भविष्य बनाना चाहते हैं ताकि इज्ज़त से दो वक्त की रोटी कमाकर अपना व अपने परिवार का पेट पाल सकें, जो सराहनीय है।
6.ऐसे में सरकारें कोचिंग संस्थाओं आदि पर भय भ्रष्टाचार-मुक्त कड़ी निगरानी ज़रूर रखें, किन्तु प्राइमरी से लेकर उच्च शिक्षा स्तर पर सम्पूर्ण सरकारी शिक्षा व्यवस्था को हर स्तर पर बेहतर बनाने के साथ-साथ छात्र-छात्राओं को आगे बढ़ाने में भी अपना अहम् दायित्व निभाने का ईमानदार प्रयास ज़रूर करें।
7.वैसे भी यह सर्वविदित है कि देश व समाज को शिक्षित बनाना अनवरत प्रक्रिया है और जिसमें सरकारों द्वारा समुचित बजट प्रावधान के साथ-साथ उसकी गुणवत्ता को भी अच्छे से अच्छा बनाने जैसी सही सोच रखना भी बहुत ज़रूरी है, तभी युवाओं के उज्जवल भविष्य के सहारे परिवार, समाज, प्रदेश व देश का भविष्य संवर पायेगा, वरना जीडीपी ग्रोथ देश की नैया का सही खिवैया क्या बना पायेगा, इसमें शक है।
8.इसीलिये यूपी व देश में भी विकास का मूल आधार संविधान निर्माता परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के उद्देश्यों के अनुसार शिक्षित, सुरक्षित, कल्याणकारी व सभ्य भारत हो तो यह हमेशा ही बेहतर होगा।
9.और अगर इन बातों पर तत्काल ज़रूरी ध्यान दिया जाये तो जन्तर-मन्तर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के हो रहे आन्दोलन जैसी कार्रवाईयों के लिये लोगों में भी ख़ासकर युवा पीढ़ी को बाध्य नहीं होना पड़ेगा। सरकार इनके प्रति सहानुभूति का रवैया अपनाकर स्थिति का सही समाधान करें तो यह उचित होगा।
1.अब जबकि संसद का मानसून सत्र कल दिनांक 20 जुलाई से शुरू हो रहा है, एक बार फिर यह देश व आमजन की चिन्ता है कि क्या इस बार भी फिर से संसद का सत्र हंगामा व स्थगन आदि की भेंट चढ़ जायेगा, या फिर ज़बरदस्त महंगाई, ग़रीबी, बेरोज़गारी, महिला असुरक्षा, महत्वपूर्ण परीक्षाओं के भी पेपरलीक आदि से जुड़े देश के ज्वलन्त मुद्दों से उत्पन्न उत्तेजित, आक्रोशित व आन्दोलित माहौल को शान्त करने व इनके संतोषजनक समाधान हेतु गंभीरता दिखाई जायेगी।
2.वैसे ख़ासकर अयोध्या श्रीराम मन्दिर में चढ़ावा की चोरी, हेराफेरी व ग़बन आदि को लेकर व्यापक जन आक्रोश ने भी यूपी व देश को काफी झकझोर कर रख दिया है और लोग, धर्म का चुनावी स्वार्थ हेतु राजनीतिकरण करने वालों को इसके लिये कठघरे में खड़ा करके, उनसे दिल दुखाने की जवाबदेही माँग रहे हैं, जिसकी गूंज सड़कों से लेकर अदालत तक में है और संसद में भी यह मुद्दा ज़रूर गर्म होगा, जिसपर भी लोगों की पैनी नज़र है।
3.इतना ही नहीं बल्कि बंगाल में विधानसभा आमचुनाव के बाद के हालात्, राजस्थान में सरकार की लापरवाही के कारण गर्भवति महिलाओं की मौत सहित विभिन्न राज्यों में बढ़ती महिला असुरक्षा, काफी आपाधापी में की जाने वाली चुनावी रेवड़ियों में भारी गड़बड़ी, सरकारी योजनाओं आदि में चर्चित भ्रष्टाचार, पुलिस मुठभेड़ का प्रचलन, वर्षों से बसे-बसाये लोगों को उजाड़कर उनके कालोनियों का ध्वस्तीकरण आदि जैसे सरकारी रवैयों से चरमराई संविधान की जनकल्याणकारी व्यवस्था के साथ ही,
https://t.co/zbwuw6xrFA की अर्थव्यवस्था व यहाँ के जनजीवन को बुरी तरह से प्रभावित करती हुई अमेरिका-इज़राइल का ईरान के विरुद्ध लगातार युद्ध व रुपया का अवमूल्यण आदि देश व जनहित के ऐसे ख़ास मुद्दे हैं जिनपर राजनीतिक द्वेष, स्वार्थ व आरोप-प्रत्यारोप की संकीर्णता/वैमनस्य को त्यागकर सत्ता और विपक्ष दोनों को एकजुट होकर अच्छा उपाय ढूंढ कर सराहनीय कार्य करना होगा, वरना लगभग 140 करोड़ की जनसंख्या वाले अपने देश में बहुजनों का जीवन यहाँ और भी अधिक बुरे दिन वाला बनकर उनका भविष्य अधर में लटकायेगा, जिसकी आशंका भी व्यक्त की जा रही है।
5.अतः देश को त्रस्त करने वाली इन भारी चुनौतियों व उसके प्रति चेतावनियों को ध्यान में रखकर संसद के मानसून सत्र को, बिना किसी उत्तेजना, रोष व विद्वेष के, सुचारू, शान्तिपूर्ण एवं स्वस्थ्य लोकतांत्रिक परम्परा के मुताबिक चलना सुनिश्चित किया जाना चाहिये, जो वक्त की अहम् ज़रूरत के हिसाब से सभी की ज़िम्मेदारी भी बनती है।
6.साथ ही, इस सम्बंध में सभी संस्थाओं को ऐसा प्रयास ज़रूर करना चाहिये कि देश के कठिन सामाजिक, राजनीतिक व आर्थिक हालात से त्रस्त भारतीयों के जीवन का बोझ व नित्य दिन की उनकी परेशानी/दिक्कतें और अधिक नहीं बढ़ने पायें।
7.इसी क्रम में संसद को भी इन ज्वलन्त राष्ट्रीय मुद्दों पर पूरी तरह से गंभीर व संवेदनशील होना ज़रूरी है और इसकी शुरूआत अगर संसद के वर्तमान मानसून सत्र से ही हो तो यह अवश्य ही बेहतर होगा। जनहितैषी गुड गवरनेन्स हेतु संसद का प्रभावी होना ज़रूरी। जय भीम, जय भारत।
बहुत बड़ी संख्या में छात्र संसद भवन के सामने तक पहुंचे, पुलिस द्वारा आंसू गैस के गोले छोड़े गये 🚨
छात्रों की संख्या के आगे पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है...!!
दिल्ली के जंतर मंतर पर में चल रहे छात्रों के आंदोलन को लेकर बसपा सुप्रीमो मायावती जी का बयान सामने आया है और कहा कि पेपर लीक और गड़बड़ी की शिकायतों से युवा परेशान हैं सरकार की जिम्मेदारीपूर्ण तरीके से परीक्षा व्यवस्थाओं से जुड़े जो लोग है खासकर वह जो उच्च पदों पर बैठे उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
सरकार को तत्काल ध्यान देना चाहिए ताकि कॉकरोच जनता पार्टी के होने रहे आंदोलन जैसी कार्रवाइयों के लिए खासकर युवा वर्ग को परेशान नहीं होना पड़ेगा इसलिए सरकार को इनके प्रति सहानुभूति रवैया अपनाकर स्तिथि का सही से समाधान करें।
आज़म ख़ान ने समाजवादी पार्टी के नेताओं को ख़ुश करने के लिए अखिलेश यादव के सामने मंच पर लाखों करोड़ों लोगों के मसीहा और भारतीय संविधान के निर्माता बाबा साहेब डॉ भीमराव अंबेडकर जी भू माफिया कहकर संबोधित किया था और उन्होंने अंबेडकर पार्क को लेकर बहन मायावती जी पर भी व्यक्तिगत टिप्पणी की थी।
लेकिन आज जब आज़म ख़ान जेल में हैं उनकी यूनिवर्सिटी पर बुलडोज़र चलाने का काम किया जा रहा हैं लेकिन बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर जी अनुयायियों और बसपा समर्थकों ने बदले की भावना में आज आज़म खान के बुरे समय में उन पर कोई टीका टिप्पणी नहीं कर रहे हैं बल्कि उनकी आवाज़ उठा रहे हैं उनके हित में लिख रहे हैं।
यह ख़ासियत आपको बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर जी के अनुयायिओं के अंदर ही दिखेगी, क्योंकि बाबा साहेब भीमराव जी की सोच पर चलने वाले लोग बदले की भावना नहीं बल्कि वे परिवर्तन की राह पकड़ते हैं।
गोदी मीडिया आपको ये ख़बर नहीं दिखाएगा लेकिन ये ख़बर बेहद जरूरी है.
केन-बेतवा लिंक परियोजना के विरोध में बुंदेलखंड के लोग पानी में खड़े होकर प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन सरकार के कान पर जूँ नहीं रेंग रही है.
आजम खान किसके लिए बोल रहे हैं कि हमारे कातिल के साथ ही बैठकर चाय कॉफी पी रहे गुजरात के कातिल के साथ चाय कॉफी पी रहे हैं?
इसी बयान के बाद से लाल टोपी वाले आजम खान को अकेला छोड़ दिया अरे मुसलमान भाइयों कब समझोगे तुम उनके लिए बस एक राजनीतिक मोहरा हो।।