मोदी की गारेंटी क्या यही है कि चुनाव पहले वादा करो और चुनाव बाद भूल जाओ।
ऐसा है तो आने वाले 4 साल बाद युवा भी आपको भूल जाएंगे मोदी जी।
#33हजार_शिक्षक_भर्ती
साजा विधायक ईश्वर साहू के बेटे की गिरफ्तारी की मांग को लेकर आदिवासी गोंड समाज ने प्रदर्शन किया।
विधायक के बेटे कृष्णा साहू ने एक आदिवासी युवक के साथ मारपीट की थी।
कोई भी कानून से ऊपर नहीं है और झूठे एफआईआर से उसका अपराध कम नहीं होगा।
कानून सर्वोपरि है।
2014 लोकसभा चुनाव में भाजपा ने 2 करोड़ सालाना रोजगार और 15 लाख रुपए हर व्यक्ति के खाते में देने की बात की थी।
चुनाव के बाद लोगों ने जब उनसे सवाल पूछा तो उन्होंने बताया यह तो चुनावी जुमला है।
फिर भी भाजपा के घोषणा पत्र को देखकर लोगों ने उन्हें जिताया।
तो विजय बघेल कुछ भी गलत नहीं बोल रहे हैं। वह अपने पार्टी अपने नेतृत्व और अपने झूठा चरित्र को बता रहे हैं।
हमारे प्रदेश के मुख्यमंत्री बार बार भर्ती का पोस्टर बनाकर सिर्फ आश्वासन देते हैं।
भाजपा के हर चुनावी वायदे झूठे निकले हैं।
रमन सिंह जी की सरकार से लेकर अब तक बारी बारी से प्रदेश का युवा छला गया है।
मैं पूछना चाहता हूं 58000 पोस्ट रिक्त होने के बावजूद भी सरकार भर्ती क्यों नहीं कर रही है?
क्या सरकार युवाओं को जानबूझ कर बेरोजगार रखना चाहती है?
देश में शिक्षा के स्तर में हमारे प्रदेश के निचले पायदान पर होने के बावजूद भी क्या सरकार को इस प्रदेश के उन बच्चों के भविष्य की चिंता नहीं है जो स्कूलों में शिक्षक के अभाव में शिक्षा नहीं ले पा रहे हैं? उन बच्चो के भविष्य को अंधकार में क्यों धकेला जा रहा है?
सरकार इतनी संवेदनहीनता से कैसे चलेगी?
सरकार एक तरफ भर्ती नहीं कर पा रही है दूसरी तरफ मुख्यमंत्री 65 करोड़ के शीशमहल में रहने चले गए, विधायकों के भत्ते बढ़ाते चले जा रहे हैं। इनकी प्राथमिकता में प्रदेश की जनता का हक और अधिकार क्यों नहीं है?
युवाओं और हमारे स्कूल के बच्चों के हित में इस प्रदेश के बेहतर भविष्य के लिए शिक्षक भर्ती तत्काल किया जाए अन्यथा जब तक भर्ती नहीं होती है मंत्री विधायकों के वेतन भत्ते सब बंद हो।
#33हजार_शिक्षक_भर्ती
33 हज़ार शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों द्वारा सरकार पर उठाए गए सवाल और नाराज़गी उनकी हताशा और विश्वासघात की भावना को दर्शाते हैं। लंबे समय से शिक्षक बनने की तैयारी में अपने समय और प्रयास लगाए हैं, लेकिन भर्ती प्रक्रिया में लगातार हो रही देरी और सरकार द्वारा दिए गए आश्वासनों का पूरा न होना उनके धैर्य को तोड़ रहा है।
अभ्यर्थियों का सरकार पर धोखा देने और फ़रेब करने का आरोप इस बात का प्रतीक है कि वे अब सरकार के वादों पर विश्वास नहीं कर पा रहे हैं। उनकी मांग है कि सरकार अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए तत्काल भर्ती प्रक्रिया पूरी करे, ताकि उनके सपने साकार हो सकें और राज्य को नए शिक्षकों की आवश्यकता पूरी हो। ये नाराज़गी एक चेतावनी भी है कि जनता के मुद्दों की अनदेखी करने से सरकार को भविष्य में राजनीतिक और सामाजिक परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
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