माननीय मुख्यमंत्री श्री भजनलाल जी फिर से दोहरा रहा हूं एक जांच ये भी करवा दो बहुत गड़बड़ियां मिलेगी।।
REET 2016 और 2018 की भर्ती प्रक्रियाओं में 70:30 (REET स्कोर : स्नातक अंक) के अनुपात ने वास्तव में एक ऐसा "लूपहोल" तैयार किया था, जिसका फायदा उठाकर कई लोगों ने बाहरी राज्यों या संदिग्ध विश्वविद्यालयों से फर्जी डिग्रियां हासिल कीं।70/30 का वेटेज था उस समय चयन प्रक्रिया में स्नातक (Graduation) के अंकों को 30% वेटेज दिया गया था। इसका दुष्परिणाम यह हुआ कि जिन अभ्यर्थियों के REET में कम अंक थे, उन्होंने फर्जी तरीके से स्नातक में 90% से अधिक अंक वाली डिग्रियां बनवाईं और वास्तविक रूप से योग्य उम्मीदवारों को मेरिट से बाहर कर दिया।
सरकार और शिक्षा विभाग को इस दिशा में निम्नलिखित कड़े कदम उठाने चाहिए।
सभी चयनित अभ्यर्थियों की स्नातक की अंकतालिकाएं और विश्वविद्यालय का नाम एक सार्वजनिक पोर्टल पर अपलोड किया जाना चाहिए। इससे 'सोशल ऑडिट' संभव हो सकेगा।
बाहरी राज्यों की डिग्रियों का गहन सत्यापन: राजस्थान से बाहर की यूनिवर्सिटीज, विशेषकर जो 'ब्लैकलिस्टेड' या संदिग्ध रही हैं, उनकी डिग्रियों की जांच के लिए विशेष टीमों को फिजिकल वेरिफिकेशन के लिए भेजा जाए।
DEO स्तर पर सख्त निर्देश देकर प्रत्येक जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) को पाबंद किया जाए कि वे अपने जिले में कार्यरत शिक्षकों के दस्तावेजों की पुनः जांच करें और संदिग्ध पाए जाने पर तुरंत FIR दर्ज कराएं।
जब तक डिग्रियां सार्वजनिक नहीं होंगी, तब तक फर्जीवाड़ा पकड़ना मुश्किल है। यदि सरकार इन आंकड़ों को सार्वजनिक करती है, तो स्थानीय स्तर पर लोग पहचान पाएंगे कि किस व्यक्ति ने कभी कॉलेज देखे बिना ही डिग्री हासिल कर ली।
भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता केवल एक सिस्टम नहीं, बल्कि उन लाखों युवाओं का हक है जो दिन-रात मेहनत करके परीक्षा की तैयारी करते है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा जी के नेतृत्व वाली सरकार से यह उम्मीद की जाती है कि वे "जीरो टॉलरेंस" की नीति अपनाते हुए इन पुरानी भर्तियों की भी जांच कराएंगे या इन सबकी डिग्रियां सार्वजनिक करवा दो सब समझ में आ जाएंगे।
फर्जी डिग्री धारकों को सेवा से बाहर करना न केवल न्याय होगा, बल्कि भविष्य में ऐसी जालसाजी करने वालों के लिए एक कड़ा संदेश भी होगा।
@BhajanlalBjp
माननीय मुख्यमंत्री श्री @BhajanlalBjp जी युवा हित में एक फैसला कई लोगों की जिंदगी संवार देगा..
गणित विज्ञान जैसे महत्वपूर्ण विषय में पूर्व मुख्यमंत्री के गृह जिले में पद खाली पड़े हैं और वो अपने समय में SLP वापसी का जश्न मीडिया और हर भाषण में किया था REET 2016 में 927 में से 450+ पद खाली पड़े हैं, योग्य युवा रोजगार की तलाश में दर दर की ठोकर खा रहा है। उच्च न्यायालय के अंतिम पद भरने के आदेश के बावजूद अभी पद खाली पड़े हैं।।
पिछली सरकार ने पद भरने के लिए SLP विड्रॉल कर वाहवाही लूटी थी लेकिन सही तरीके से पद नहीं भरे थे जिसकी वजह से अभी तक योग्य युवा अभी वंचित है।।
सबसे महत्वपूर्ण विषय पर खाली पड़े पदों को भरना बहुत आवश्यक है।
शिक्षा मंत्री @madandilawar जी आप संज्ञान लेकर युवाओं को राहत प्रदान कीजिए..
मा. मुख्यमंत्री श्री @BhajanlalBjp
जी, विशेष बच्चों के विशेष शिक्षकों की बहुत आवश्यकता है।।
विशेष शिक्षा में सेकंड ग्रेड शिक्षक भर्ती आखिरी बार 2016 में हुई थी। पिछले 10 साल से कोई भर्ती नहीं!
वर्तमान में 863 पद खाली पड़े हैं, जिससे राज्य के हजारों दिव्यांग बच्चे शिक्षा से वंचित हो रहे हैं।
युवाओं के हित में, विशेष बच्चों के भविष्य के लिए अब भर्ती प्रक्रिया शुरू करें!
#सेकंड_ग्रेड_विशेष_शिक्षक_भर्ती_करो
माननीय मुख्यमंत्री श्री @BhajanlalBjp जी युवा हित में एक फैसला कई लोगों की जिंदगी संवार देगा..
गणित विज्ञान जैसे महत्वपूर्ण विषय में पूर्व मुख्यमंत्री के गृह जिले में पद खाली पड़े हैं और वो अपने समय में SLP वापसी का जश्न मीडिया और हर भाषण में किया था REET 2016 में 927 में से 450+ पद खाली पड़े हैं, योग्य युवा रोजगार की तलाश में दर दर की ठोकर खा रहा है। उच्च न्यायालय के अंतिम पद भरने के आदेश के बावजूद अभी पद खाली पड़े हैं।।
पिछली सरकार ने पद भरने के लिए SLP विड्रॉल कर वाहवाही लूटी थी लेकिन सही तरीके से पद नहीं भरे थे जिसकी वजह से अभी तक योग्य युवा अभी वंचित है।।
सबसे महत्वपूर्ण विषय पर खाली पड़े पदों को भरना बहुत आवश्यक है।
शिक्षा मंत्री @madandilawar जी आप संज्ञान लेकर युवाओं को राहत प्रदान कीजिए..
माननीय मुख्यमंत्री श्री भजनलाल जी फिर से दोहरा रहा हूं एक जांच ये भी करवा दो बहुत गड़बड़ियां मिलेगी।।
REET 2016 और 2018 की भर्ती प्रक्रियाओं में 70:30 (REET स्कोर : स्नातक अंक) के अनुपात ने वास्तव में एक ऐसा "लूपहोल" तैयार किया था, जिसका फायदा उठाकर कई लोगों ने बाहरी राज्यों या संदिग्ध विश्वविद्यालयों से फर्जी डिग्रियां हासिल कीं।70/30 का वेटेज था उस समय चयन प्रक्रिया में स्नातक (Graduation) के अंकों को 30% वेटेज दिया गया था। इसका दुष्परिणाम यह हुआ कि जिन अभ्यर्थियों के REET में कम अंक थे, उन्होंने फर्जी तरीके से स्नातक में 90% से अधिक अंक वाली डिग्रियां बनवाईं और वास्तविक रूप से योग्य उम्मीदवारों को मेरिट से बाहर कर दिया।
सरकार और शिक्षा विभाग को इस दिशा में निम्नलिखित कड़े कदम उठाने चाहिए।
सभी चयनित अभ्यर्थियों की स्नातक की अंकतालिकाएं और विश्वविद्यालय का नाम एक सार्वजनिक पोर्टल पर अपलोड किया जाना चाहिए। इससे 'सोशल ऑडिट' संभव हो सकेगा।
बाहरी राज्यों की डिग्रियों का गहन सत्यापन: राजस्थान से बाहर की यूनिवर्सिटीज, विशेषकर जो 'ब्लैकलिस्टेड' या संदिग्ध रही हैं, उनकी डिग्रियों की जांच के लिए विशेष टीमों को फिजिकल वेरिफिकेशन के लिए भेजा जाए।
DEO स्तर पर सख्त निर्देश देकर प्रत्येक जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) को पाबंद किया जाए कि वे अपने जिले में कार्यरत शिक्षकों के दस्तावेजों की पुनः जांच करें और संदिग्ध पाए जाने पर तुरंत FIR दर्ज कराएं।
जब तक डिग्रियां सार्वजनिक नहीं होंगी, तब तक फर्जीवाड़ा पकड़ना मुश्किल है। यदि सरकार इन आंकड़ों को सार्वजनिक करती है, तो स्थानीय स्तर पर लोग पहचान पाएंगे कि किस व्यक्ति ने कभी कॉलेज देखे बिना ही डिग्री हासिल कर ली।
भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता केवल एक सिस्टम नहीं, बल्कि उन लाखों युवाओं का हक है जो दिन-रात मेहनत करके परीक्षा की तैयारी करते है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा जी के नेतृत्व वाली सरकार से यह उम्मीद की जाती है कि वे "जीरो टॉलरेंस" की नीति अपनाते हुए इन पुरानी भर्तियों की भी जांच कराएंगे या इन सबकी डिग्रियां सार्वजनिक करवा दो सब समझ में आ जाएंगे।
फर्जी डिग्री धारकों को सेवा से बाहर करना न केवल न्याय होगा, बल्कि भविष्य में ऐसी जालसाजी करने वालों के लिए एक कड़ा संदेश भी होगा।
@BhajanlalBjp
माननीय मुख्यमंत्री श्री भजनलाल जी एक जांच ये भी करवा दो बहुत गड़बड़ियां मिलेगी।।
REET 2016 और 2018 की भर्ती प्रक्रियाओं में 70:30 (REET स्कोर : स्नातक अंक) के अनुपात ने वास्तव में एक ऐसा "लूपहोल" तैयार किया था, जिसका फायदा उठाकर कई लोगों ने बाहरी राज्यों या संदिग्ध विश्वविद्यालयों से फर्जी डिग्रियां हासिल कीं।70/30 का वेटेज था उस समय चयन प्रक्रिया में स्नातक (Graduation) के अंकों को 30% वेटेज दिया गया था। इसका दुष्परिणाम यह हुआ कि जिन अभ्यर्थियों के REET में कम अंक थे, उन्होंने फर्जी तरीके से स्नातक में 90% से अधिक अंक वाली डिग्रियां बनवाईं और वास्तविक रूप से योग्य उम्मीदवारों को मेरिट से बाहर कर दिया।
सरकार और शिक्षा विभाग को इस दिशा में निम्नलिखित कड़े कदम उठाने चाहिए।
सभी चयनित अभ्यर्थियों की स्नातक की अंकतालिकाएं और विश्वविद्यालय का नाम एक सार्वजनिक पोर्टल पर अपलोड किया जाना चाहिए। इससे 'सोशल ऑडिट' संभव हो सकेगा।
बाहरी राज्यों की डिग्रियों का गहन सत्यापन: राजस्थान से बाहर की यूनिवर्सिटीज, विशेषकर जो 'ब्लैकलिस्टेड' या संदिग्ध रही हैं, उनकी डिग्रियों की जांच के लिए विशेष टीमों को फिजिकल वेरिफिकेशन के लिए भेजा जाए।
DEO स्तर पर सख्त निर्देश देकर प्रत्येक जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) को पाबंद किया जाए कि वे अपने जिले में कार्यरत शिक्षकों के दस्तावेजों की पुनः जांच करें और संदिग्ध पाए जाने पर तुरंत FIR दर्ज कराएं।
जब तक डिग्रियां सार्वजनिक नहीं होंगी, तब तक फर्जीवाड़ा पकड़ना मुश्किल है। यदि सरकार इन आंकड़ों को सार्वजनिक करती है, तो स्थानीय स्तर पर लोग पहचान पाएंगे कि किस व्यक्ति ने कभी कॉलेज देखे बिना ही डिग्री हासिल कर ली।
भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता केवल एक सिस्टम नहीं, बल्कि उन लाखों युवाओं का हक है जो दिन-रात मेहनत करके परीक्षा की तैयारी करते है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा जी के नेतृत्व वाली सरकार से यह उम्मीद की जाती है कि वे "जीरो टॉलरेंस" की नीति अपनाते हुए इन पुरानी भर्तियों की भी जांच कराएंगे या इन सबकी डिग्रियां सार्वजनिक करवा दो सब समझ में आ जाएंगे।
फर्जी डिग्री धारकों को सेवा से बाहर करना न केवल न्याय होगा, बल्कि भविष्य में ऐसी जालसाजी करने वालों के लिए एक कड़ा संदेश भी होगा।
@BhajanlalBjp
माननीय मुख्यमंत्री श्री @BhajanlalBjp जी
गणित विज्ञान जैसे महत्वपूर्ण विषय में पूर्व मुख्यमंत्री के गृह जिले में पद खाली पड़े हैं और वो अपने समय में SLP वापसी का जश्न मीडिया और हर भाषण में किया था REET 2016 में 927 में से 450+ पद खाली पड़े हैं, योग्य युवा रोजगार की तलाश में दर दर की ठोकर खा रहा है। उच्च न्यायालय के अंतिम पद भरने के आदेश के बावजूद अभी पद खाली पड़े हैं।।
पिछली सरकार ने पद भरने के लिए SLP विड्रॉल कर वाहवाही लूटी थी लेकिन सही तरीके से पद नहीं भरे थे जिसकी वजह से अभी तक योग्य युवा अभी वंचित है।।
सबसे महत्वपूर्ण विषय पर खाली पड़े पदों को भरना बहुत आवश्यक है।
शिक्षा मंत्री @madandilawar जी आप संज्ञान लेकर युवाओं को राहत प्रदान कीजिए..
माननीय मुख्यमंत्री श्री @BhajanlalBjp जी
गणित विज्ञान जैसे महत्वपूर्ण विषय में पूर्व मुख्यमंत्री के गृह जिले में पद खाली पड़े हैं और वो अपने समय में SLP वापसी का जश्न मीडिया और हर भाषण में किया था REET 2016 में 927 में से 450+ पद खाली पड़े हैं, योग्य युवा रोजगार की तलाश में दर दर की ठोकर खा रहा है। उच्च न्यायालय के अंतिम पद भरने के आदेश के बावजूद अभी पद खाली पड़े हैं।।
पिछली सरकार ने पद भरने के लिए SLP विड्रॉल कर वाहवाही लूटी थी लेकिन सही तरीके से पद नहीं भरे थे जिसकी वजह से अभी तक योग्य युवा अभी वंचित है।।
सबसे महत्वपूर्ण विषय पर खाली पड़े पदों को भरना बहुत आवश्यक है।
शिक्षा मंत्री @madandilawar जी आप संज्ञान लेकर युवाओं को राहत प्रदान कीजिए..
माननीय मुख्यमंत्री श्री भजनलाल जी एक जांच ये भी करवा दो बहुत गड़बड़ियां मिलेगी।।
REET 2016 और 2018 की भर्ती प्रक्रियाओं में 70:30 (REET स्कोर : स्नातक अंक) के अनुपात ने वास्तव में एक ऐसा "लूपहोल" तैयार किया था, जिसका फायदा उठाकर कई लोगों ने बाहरी राज्यों या संदिग्ध विश्वविद्यालयों से फर्जी डिग्रियां हासिल कीं।70/30 का वेटेज था उस समय चयन प्रक्रिया में स्नातक (Graduation) के अंकों को 30% वेटेज दिया गया था। इसका दुष्परिणाम यह हुआ कि जिन अभ्यर्थियों के REET में कम अंक थे, उन्होंने फर्जी तरीके से स्नातक में 90% से अधिक अंक वाली डिग्रियां बनवाईं और वास्तविक रूप से योग्य उम्मीदवारों को मेरिट से बाहर कर दिया।
सरकार और शिक्षा विभाग को इस दिशा में निम्नलिखित कड़े कदम उठाने चाहिए।
सभी चयनित अभ्यर्थियों की स्नातक की अंकतालिकाएं और विश्वविद्यालय का नाम एक सार्वजनिक पोर्टल पर अपलोड किया जाना चाहिए। इससे 'सोशल ऑडिट' संभव हो सकेगा।
बाहरी राज्यों की डिग्रियों का गहन सत्यापन: राजस्थान से बाहर की यूनिवर्सिटीज, विशेषकर जो 'ब्लैकलिस्टेड' या संदिग्ध रही हैं, उनकी डिग्रियों की जांच के लिए विशेष टीमों को फिजिकल वेरिफिकेशन के लिए भेजा जाए।
DEO स्तर पर सख्त निर्देश देकर प्रत्येक जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) को पाबंद किया जाए कि वे अपने जिले में कार्यरत शिक्षकों के दस्तावेजों की पुनः जांच करें और संदिग्ध पाए जाने पर तुरंत FIR दर्ज कराएं।
जब तक डिग्रियां सार्वजनिक नहीं होंगी, तब तक फर्जीवाड़ा पकड़ना मुश्किल है। यदि सरकार इन आंकड़ों को सार्वजनिक करती है, तो स्थानीय स्तर पर लोग पहचान पाएंगे कि किस व्यक्ति ने कभी कॉलेज देखे बिना ही डिग्री हासिल कर ली।
भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता केवल एक सिस्टम नहीं, बल्कि उन लाखों युवाओं का हक है जो दिन-रात मेहनत करके परीक्षा की तैयारी करते है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा जी के नेतृत्व वाली सरकार से यह उम्मीद की जाती है कि वे "जीरो टॉलरेंस" की नीति अपनाते हुए इन पुरानी भर्तियों की भी जांच कराएंगे या इन सबकी डिग्रियां सार्वजनिक करवा दो सब समझ में आ जाएंगे।
फर्जी डिग्री धारकों को सेवा से बाहर करना न केवल न्याय होगा, बल्कि भविष्य में ऐसी जालसाजी करने वालों के लिए एक कड़ा संदेश भी होगा।
@BhajanlalBjp
REET 2016 और 2018 की भर्ती प्रक्रियाओं में 70:30 (REET स्कोर : स्नातक अंक) के अनुपात ने वास्तव में एक ऐसा "लूपहोल" तैयार किया था, जिसका फायदा उठाकर कई लोगों ने बाहरी राज्यों या संदिग्ध विश्वविद्यालयों से फर्जी डिग्रियां हासिल कीं।
समस्या की जड़: 70/30 का वेटेज था उस समय चयन प्रक्रिया में स्नातक (Graduation) के अंकों को 30% वेटेज दिया गया था। इसका दुष्परिणाम यह हुआ कि जिन अभ्यर्थियों के REET में कम अंक थे, उन्होंने फर्जी तरीके से स्नातक में 90% से अधिक अंक वाली डिग्रियां बनवाईं और वास्तविक रूप से योग्य उम्मीदवारों को मेरिट से बाहर कर दिया।
पारदर्शिता के लिए आवश्यक कदम
सरकार और शिक्षा विभाग को इस दिशा में निम्नलिखित कड़े कदम उठाने चाहिए।
सभी चयनित अभ्यर्थियों की स्नातक की अंकतालिकाएं और विश्वविद्यालय का नाम एक सार्वजनिक पोर्टल पर अपलोड किया जाना चाहिए। इससे 'सोशल ऑडिट' संभव हो सकेगा।
बाहरी राज्यों की डिग्रियों का गहन सत्यापन: राजस्थान से बाहर की यूनिवर्सिटीज, विशेषकर जो 'ब्लैकलिस्टेड' या संदिग्ध रही हैं, उनकी डिग्रियों की जांच के लिए विशेष टीमों को फिजिकल वेरिफिकेशन के लिए भेजा जाए।
DEO स्तर पर सख्त निर्देश देकर प्रत्येक जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) को पाबंद किया जाए कि वे अपने जिले में कार्यरत शिक्षकों के दस्तावेजों की पुनः जांच करें और संदिग्ध पाए जाने पर तुरंत FIR दर्ज कराएं।
जब तक डिग्रियां सार्वजनिक नहीं होंगी, तब तक फर्जीवाड़ा पकड़ना मुश्किल है। यदि सरकार इन आंकड़ों को सार्वजनिक करती है, तो स्थानीय स्तर पर लोग पहचान पाएंगे कि किस व्यक्ति ने कभी कॉलेज देखे बिना ही डिग्री हासिल कर ली।
भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता केवल एक सिस्टम नहीं, बल्कि उन लाखों युवाओं का हक है जो दिन-रात मेहनत करके परीक्षा की तैयारी करते हैं।
निष्कर्ष
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा जी के नेतृत्व वाली सरकार से यह उम्मीद की जाती है कि वे "जीरो टॉलरेंस" की नीति अपनाते हुए इन पुरानी भर्तियों की भी जांच कराएंगे या इन सबकी डिग्रियां सार्वजनिक करवा दो सब समझ में आ जाएंगे।
फर्जी डिग्री धारकों को सेवा से बाहर करना न केवल न्याय होगा, बल्कि भविष्य में ऐसी जालसाजी करने वालों के लिए एक कड़ा संदेश भी होगा।
@BhajanlalBjp
माननीय मुख्यमंत्री श्री @BhajanlalBjp जी
2016 गणित विज्ञान जैसे महत्वपूर्ण विषय में 927 में से 450+ पद खाली पड़े हैं, योग्य युवा रोजगार की तलाश में दर दर की ठोकर खा रहा है। उच्च न्यायालय के अंतिम पद भरने के आदेश के बावजूद अभी पद खाली पड़े हैं।।
पिछली सरकार ने पद भरने के लिए SLP विड्रॉल कर वाहवाही लूटी थी लेकिन सही तरीके से पद नहीं भरे थे जिसकी वजह से अभी तक योग्य युवा अभी वंचित है।।
सबसे महत्वपूर्ण विषय पर खाली पड़े पदों को भरना बहुत आवश्यक है।
शिक्षा मंत्री @madandilawar जी आप संज्ञान लेकर युवाओं को राहत प्रदान कीजिए..
REET 2016 और 2018 की भर्ती प्रक्रियाओं में 70:30 (REET स्कोर : स्नातक अंक) के अनुपात ने वास्तव में एक ऐसा "लूपहोल" तैयार किया था, जिसका फायदा उठाकर कई लोगों ने बाहरी राज्यों या संदिग्ध विश्वविद्यालयों से फर्जी डिग्रियां हासिल कीं।
समस्या की जड़: 70/30 का वेटेज था उस समय चयन प्रक्रिया में स्नातक (Graduation) के अंकों को 30% वेटेज दिया गया था। इसका दुष्परिणाम यह हुआ कि जिन अभ्यर्थियों के REET में कम अंक थे, उन्होंने फर्जी तरीके से स्नातक में 90% से अधिक अंक वाली डिग्रियां बनवाईं और वास्तविक रूप से योग्य उम्मीदवारों को मेरिट से बाहर कर दिया।
पारदर्शिता के लिए आवश्यक कदम
सरकार और शिक्षा विभाग को इस दिशा में निम्नलिखित कड़े कदम उठाने चाहिए।
सभी चयनित अभ्यर्थियों की स्नातक की अंकतालिकाएं और विश्वविद्यालय का नाम एक सार्वजनिक पोर्टल पर अपलोड किया जाना चाहिए। इससे 'सोशल ऑडिट' संभव हो सकेगा।
बाहरी राज्यों की डिग्रियों का गहन सत्यापन: राजस्थान से बाहर की यूनिवर्सिटीज, विशेषकर जो 'ब्लैकलिस्टेड' या संदिग्ध रही हैं, उनकी डिग्रियों की जांच के लिए विशेष टीमों को फिजिकल वेरिफिकेशन के लिए भेजा जाए।
DEO स्तर पर सख्त निर्देश देकर प्रत्येक जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) को पाबंद किया जाए कि वे अपने जिले में कार्यरत शिक्षकों के दस्तावेजों की पुनः जांच करें और संदिग्ध पाए जाने पर तुरंत FIR दर्ज कराएं।
जब तक डिग्रियां सार्वजनिक नहीं होंगी, तब तक फर्जीवाड़ा पकड़ना मुश्किल है। यदि सरकार इन आंकड़ों को सार्वजनिक करती है, तो स्थानीय स्तर पर लोग पहचान पाएंगे कि किस व्यक्ति ने कभी कॉलेज देखे बिना ही डिग्री हासिल कर ली।
भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता केवल एक सिस्टम नहीं, बल्कि उन लाखों युवाओं का हक है जो दिन-रात मेहनत करके परीक्षा की तैयारी करते हैं।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा जी के नेतृत्व वाली सरकार से यह उम्मीद की जाती है कि वे "जीरो टॉलरेंस" की नीति अपनाते हुए इन पुरानी भर्तियों की भी जांच कराएंगे या इन सबकी डिग्रियां सार्वजनिक करवा दो सब समझ में आ जाएंगे।
फर्जी डिग्री धारकों को सेवा से बाहर करना न केवल न्याय होगा, बल्कि भविष्य में ऐसी जालसाजी करने वालों के लिए एक कड़ा संदेश भी होगा।
@BhajanlalBjp
REET 2016 और 2018 की भर्ती प्रक्रियाओं में 70:30 (REET स्कोर : स्नातक अंक) के अनुपात ने वास्तव में एक ऐसा "लूपहोल" तैयार किया था, जिसका फायदा उठाकर कई लोगों ने बाहरी राज्यों या संदिग्ध विश्वविद्यालयों से फर्जी डिग्रियां हासिल कीं।
समस्या की जड़: 70/30 का वेटेज था उस समय चयन प्रक्रिया में स्नातक (Graduation) के अंकों को 30% वेटेज दिया गया था। इसका दुष्परिणाम यह हुआ कि जिन अभ्यर्थियों के REET में कम अंक थे, उन्होंने फर्जी तरीके से स्नातक में 90% से अधिक अंक वाली डिग्रियां बनवाईं और वास्तविक रूप से योग्य उम्मीदवारों को मेरिट से बाहर कर दिया।
पारदर्शिता के लिए आवश्यक कदम
सरकार और शिक्षा विभाग को इस दिशा में निम्नलिखित कड़े कदम उठाने चाहिए।
सभी चयनित अभ्यर्थियों की स्नातक की अंकतालिकाएं और विश्वविद्यालय का नाम एक सार्वजनिक पोर्टल पर अपलोड किया जाना चाहिए। इससे 'सोशल ऑडिट' संभव हो सकेगा।
बाहरी राज्यों की डिग्रियों का गहन सत्यापन: राजस्थान से बाहर की यूनिवर्सिटीज, विशेषकर जो 'ब्लैकलिस्टेड' या संदिग्ध रही हैं, उनकी डिग्रियों की जांच के लिए विशेष टीमों को फिजिकल वेरिफिकेशन के लिए भेजा जाए।
DEO स्तर पर सख्त निर्देश देकर प्रत्येक जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) को पाबंद किया जाए कि वे अपने जिले में कार्यरत शिक्षकों के दस्तावेजों की पुनः जांच करें और संदिग्ध पाए जाने पर तुरंत FIR दर्ज कराएं।
जब तक डिग्रियां सार्वजनिक नहीं होंगी, तब तक फर्जीवाड़ा पकड़ना मुश्किल है। यदि सरकार इन आंकड़ों को सार्वजनिक करती है, तो स्थानीय स्तर पर लोग पहचान पाएंगे कि किस व्यक्ति ने कभी कॉलेज देखे बिना ही डिग्री हासिल कर ली।
भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता केवल एक सिस्टम नहीं, बल्कि उन लाखों युवाओं का हक है जो दिन-रात मेहनत करके परीक्षा की तैयारी करते हैं।
निष्कर्ष
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा जी के नेतृत्व वाली सरकार से यह उम्मीद की जाती है कि वे "जीरो टॉलरेंस" की नीति अपनाते हुए इन पुरानी भर्तियों की भी जांच कराएंगे या इन सबकी डिग्रियां सार्वजनिक करवा दो सब समझ में आ जाएंगे।
फर्जी डिग्री धारकों को सेवा से बाहर करना न केवल न्याय होगा, बल्कि भविष्य में ऐसी जालसाजी करने वालों के लिए एक कड़ा संदेश भी होगा।
@BhajanlalBjp
REET 2016 और 2018 की भर्ती प्रक्रियाओं में 70:30 (REET स्कोर : स्नातक अंक) के अनुपात ने वास्तव में एक ऐसा "लूपहोल" तैयार किया था, जिसका फायदा उठाकर कई लोगों ने बाहरी राज्यों या संदिग्ध विश्वविद्यालयों से फर्जी डिग्रियां हासिल कीं।
समस्या की जड़: 70/30 का वेटेज था उस समय चयन प्रक्रिया में स्नातक (Graduation) के अंकों को 30% वेटेज दिया गया था। इसका दुष्परिणाम यह हुआ कि जिन अभ्यर्थियों के REET में कम अंक थे, उन्होंने फर्जी तरीके से स्नातक में 90% से अधिक अंक वाली डिग्रियां बनवाईं और वास्तविक रूप से योग्य उम्मीदवारों को मेरिट से बाहर कर दिया।
पारदर्शिता के लिए आवश्यक कदम
सरकार और शिक्षा विभाग को इस दिशा में निम्नलिखित कड़े कदम उठाने चाहिए।
सभी चयनित अभ्यर्थियों की स्नातक की अंकतालिकाएं और विश्वविद्यालय का नाम एक सार्वजनिक पोर्टल पर अपलोड किया जाना चाहिए। इससे 'सोशल ऑडिट' संभव हो सकेगा।
बाहरी राज्यों की डिग्रियों का गहन सत्यापन: राजस्थान से बाहर की यूनिवर्सिटीज, विशेषकर जो 'ब्लैकलिस्टेड' या संदिग्ध रही हैं, उनकी डिग्रियों की जांच के लिए विशेष टीमों को फिजिकल वेरिफिकेशन के लिए भेजा जाए।
DEO स्तर पर सख्त निर्देश देकर प्रत्येक जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) को पाबंद किया जाए कि वे अपने जिले में कार्यरत शिक्षकों के दस्तावेजों की पुनः जांच करें और संदिग्ध पाए जाने पर तुरंत FIR दर्ज कराएं।
जब तक डिग्रियां सार्वजनिक नहीं होंगी, तब तक फर्जीवाड़ा पकड़ना मुश्किल है। यदि सरकार इन आंकड़ों को सार्वजनिक करती है, तो स्थानीय स्तर पर लोग पहचान पाएंगे कि किस व्यक्ति ने कभी कॉलेज देखे बिना ही डिग्री हासिल कर ली।
भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता केवल एक सिस्टम नहीं, बल्कि उन लाखों युवाओं का हक है जो दिन-रात मेहनत करके परीक्षा की तैयारी करते हैं।
निष्कर्ष
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा जी के नेतृत्व वाली सरकार से यह उम्मीद की जाती है कि वे "जीरो टॉलरेंस" की नीति अपनाते हुए इन पुरानी भर्तियों की भी जांच कराएंगे या इन सबकी डिग्रियां सार्वजनिक करवा दो सब समझ में आ जाएंगे।
फर्जी डिग्री धारकों को सेवा से बाहर करना न केवल न्याय होगा, बल्कि भविष्य में ऐसी जालसाजी करने वालों के लिए एक कड़ा संदेश भी होगा।
@BhajanlalBjp
माननीय मुख्यमंत्री श्री @BhajanlalBjp जी
2016 गणित विज्ञान जैसे महत्वपूर्ण विषय में 927 में से 450+ पद खाली पड़े हैं, योग्य युवा रोजगार की तलाश में दर दर की ठोकर खा रहा है। उच्च न्यायालय के अंतिम पद भरने के आदेश के बावजूद अभी पद खाली पड़े हैं।।
पिछली सरकार ने पद भरने के लिए SLP विड्रॉल कर वाहवाही लूटी थी लेकिन सही तरीके से पद नहीं भरे थे जिसकी वजह से अभी तक योग्य युवा अभी वंचित है।।
सबसे महत्वपूर्ण विषय पर खाली पड़े पदों को भरना बहुत आवश्यक है।
शिक्षा मंत्री @madandilawar जी आप संज्ञान लेकर युवाओं को राहत प्रदान कीजिए..
REET 2016/2018 में रीट के अंक और डिग्री के अंक का अनुपात 70/30 रखने पर बहुत सारे फर्जी लोगों ने इन फर्जी यूनिवर्सिटी से डिग्रियां ली थी जो आज भी नौकरी कर रहे हैं।। सरकार को इन सब की डिग्रियां जांच करनी चाहिए तथा सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दे कि इनकी डिग्रियां सार्वजनिक करनी चाहिए तथा जिससे युवा इनकी डिग्री देख सके।।
@BhajanlalBjp@RPS_DharmaGila
REET 2016/2018 में रीट के अंक और डिग्री के अंक का अनुपात 70/30 रखने पर बहुत सारे फर्जी लोगों ने इन फर्जी यूनिवर्सिटी से डिग्रियां ली थी जो आज भी नौकरी कर रहे हैं।। सरकार को इन सब की डिग्रियां जांच करनी चाहिए तथा सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दे कि इनकी डिग्रियां सार्वजनिक करनी चाहिए तथा जिससे युवा इनकी डिग्री देख सके।।
@BhajanlalBjp@RPS_DharmaGila
OPJS का फर्जीवाड़ा बहुत पुराना है.
2016 और 2018 की रीट भर्ती में स्नातक के अंकों का वेटेज का प्रावधान था.
@RajCMO से आग्रह है की इन दोनों शिक्षक भर्ती में opjs की डिग्री की वैधता Sog के माध्यम से चेक करवाये
@vinodmittal9@vijaysharmahnd@Lalitverma510@rajeduofficial
माननीय मुख्यमंत्री श्री @BhajanlalBjp जी
2016 गणित विज्ञान जैसे महत्वपूर्ण विषय में 927 में से 450+ पद खाली पड़े हैं, योग्य युवा रोजगार की तलाश में दर दर की ठोकर खा रहा है। उच्च न्यायालय के अंतिम पद भरने के आदेश के बावजूद अभी पद खाली पड़े हैं।।
पिछली सरकार ने पद भरने के लिए SLP विड्रॉल कर वाहवाही लूटी थी लेकिन सही तरीके से पद नहीं भरे थे जिसकी वजह से अभी तक योग्य युवा अभी वंचित है।।
सबसे महत्वपूर्ण विषय पर खाली पड़े पदों को भरना बहुत आवश्यक है।
शिक्षा मंत्री @madandilawar जी आप संज्ञान लेकर युवाओं को राहत प्रदान कीजिए..