आज सवेरे से मैं और मेरी बेटी “एग्जाम वॉरियर” बने हुए हैं!
सवेरे 9 से 12 तक दिल्ली-हरियाणा बॉर्डर पर IISER की परीक्षा दी।
और फ़िर दोपहर 3 से 5 के बीच यूपी-दिल्ली बॉर्डर पर CUET परीक्षा!
दोनों के बीच की दूरी थी मात्र 61 किलोमीटर!
जैसे ही 12 बजे पहली परीक्षा खत्म हुई, मेरी बेटी उसी तत्परता से भीड़ को चीरते हुए बाहर आई, जैसे हवाई जहाज़ लैंड होने पर कनेक्टिंग फ्लाइट वाले बाहर निकलते हैं!
फिर भी परीक्षा केंद्र से बाहर निकलकर, ट्रैफिक जाम से जूझते हुए, मेन रोड तक आते आते 12:55 हो गए थे!
और अभी हमें 59 किलोमीटर की दूरी तय करनी थी, जो कि उस वक़्त धरती के दूसरे छोर पर जाने जैसी लग रही थी!
गूगल नेविगेटर अगले सेंटर पर पहुँचने का समय 2:18 बता रहा था। 2:30 बजे के बाद एंट्री नहीं हो सकती थी।
ऐसे में, सड़क पर हर रेड लाइट, हर एक रुका हुआ ट्रैफिक दिल की धड़कन बढ़ा रहा था।
ख़ैर, ऊपर वाले की कृपा से हम CUET सेंटर पर 2:12 बजे पहुँच गए, और जब मेरी बेटी सेंटर के अंदर चली गई तब जा के जान में जान आई!
इस सारे घटनाक्रम के बीच मुझे मोदी जी की किताब “एग्जाम वॉरियर” की बड़ी याद आई।
इस किताब में मोदी जी ने बच्चों को टिप्स दिए हैं कि परीक्षा की तैयारी कैसे करें, परीक्षा के दौरान क्या करें, इत्यादि।
पर मोदी जी ने अपनी किताब में ये नहीं बताया, कि जब देश की दो प्रमुख परीक्षा लेने वाली संस्थाएं एक ही दिन में, मात्र चंद घंटों के अंतराल पर, शहर के दो अलग अलग छोर पर परीक्षा लें, तो उसकी तैयारी कैसे करें!!
जिस पैरेंट के पास ख़ुद का ट्रांसपोर्ट न हो, जिसे पब्लिक ट्रांसपोर्ट के ज़रिए दोनों एग्जाम सेंटर पर पहुँचना हो, वो इस सिचुएशन से कैसे डील करे, ये भी मोदी जी ने अपनी किताब में नहीं बताया है!!
यही नहीं, सालों से देश में “डिजिटल इंडिया” की हवा चल रही है, इसी साल सरकार ने "AI" पर अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस भी करा ली,
पर आवेदक बच्चों के डेटा के आधार पर, आपसी कोआर्डिनेशन के ज़रिए देश की दो राष्ट्रीय संस्थाएं बिना ओवरलैप के परीक्षा की तारीख तय कर सकें, क्या इतनी टेक्नोलॉजी देश में नहीं है?
IISER Aptitude Test यानि #IAT भारत सरकार की एक संस्था करवाती है, देश की 7 प्रीमियर साइंस रिसर्च संस्थाओं के UG कोर्स में दाखिले के लिए।
इसकी परीक्षा पहले से ही 7 जून निर्धारित थी।
इस बीच @NTA_Exams , जो कि भारत सरकार का ही उपक्रम है, उसने #CUET की परीक्षा जो कि 28 मई को होनी थी, उसे बदलकर 31 मई, 6 और 7 जून को कर दिया!
इन दोनों ही संस्थाओं के पास एप्लिकेंट छात्रों का सारा डेटा मौज़ूद है!
ऐसे में अगर भारत सरकार के ये दोनों “सूरमा” आपस में बात करके एक “ओवरलैप डिटेक्ट” करने का प्रोग्राम कंप्यूटर पर चला लेते, तो NTA को 5 मिनट में पता चल जाता कि किस बच्चे का टेस्ट 7 जून को नहीं कराना है!
ऐसे बच्चों की परीक्षा 31 मई या 6 जून वाले समूह के साथ हो सकती थी!
पर नहीं, इंडिया भले डिजिटल बन जाये, पर ये डिजिटल नहीं बनेंगे!
इन्हें तो बस देश भर के बच्चों और उनके पैरेंट्स को “एग्जाम वॉरियर” बनाना है!!
ख़ैर, और कुछ हो या न हो, मोदी जी को अब “एग्जाम वॉरियर” का अगला संस्करण जल्द निकालना चाहिए,
बहुत सारे "मुद्दे" इकट्ठा हो गए हैं, मोदी जी की "टिप्स" के लिए…
@hridayeshjoshi अफसोस की बात है कि पेड़ों के लगाने के मामले में सरकारें कभी गंभीर हुई ही नहीं! कल एक विडियो देख रहा था. अमेरिका का कोई शहर था. उस शहर में पेड़ों और उसकी हरियाली तो गजब की थी. उससे बड़ी बात ये थी कि जिस तरह से पेड़ों की कटाई-छटाई की हुई थी वो काबिले तारीफ थी. रोड़ गजब के सुंदर थे.
आदमी जिंदगी में ना जाने कितने भ्रम पाले बैठा रहता है. लेकिन जैसे-जैसे वक्त गुजरता जाता है. ये भी धीरे-धीरे टूटते जाते हैं. वहीं ये भी है कि ये ना हों तो जिंदगी जीना भी थोड़ा मुश्किल-सा हो जाता है.