10–20% reservation to uplift historically disadvantaged communities is one thing.
But when nearly 75% of seats are reserved and only 25% is left for open competition, stop calling it “upliftment.”
It’s institutionalized exclusion.
You don’t build equality by making merit the exception instead of the rule. You weaken competition, discourage excellence, and hold India back in the global race.
That’s not social justice.
That’s discrimination by design.
मध्यप्रदेश 73% आरक्षण करने के पक्ष में OBC वकील के तर्क सुनिए-
इंदिरा साहनी जजमेंट संवैधानिक नहीं है!
धर्मग्रंथों में जातिवाद है इसलिए आज 73% आरक्षण दो!
इन महानुभाव को ये तक नहीं पता कि अवसरों की समानता मौलिक अधिकार है! आरक्षण नहीं!तो GC के मौलिक अधिकार का हनन करके ये आरक्षण नहीं दे सकते!
दूसरे, संविधान में साफ साफ लिखा है कि सिर्फ उन्हीं को आरक्षण मिल सकता है जो पिछड़े हैं और जिनके पास पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है!
अब न तो ये पिछड़े हैं, और प्रतिनिधित्व भी अच्छा खासा लेकर बैठे हैं जोकि डेटा भी कोर्ट में हमने दिखा दिया है, तब भी इनको आरक्षण चाहिए!
और चूंकि इनके पास कोई डेटा है नहीं, तो अब धर्मग्रंथों को लेकर बैठ गए हैं!
इसको कहते हैं लालच की पराकाष्ठा!!
ये हमारे मोदी जी का पिट्ठू , जोकर इतने साल मंत्री रहने के बाद भी अभी दलित बना हुआ है ये अयोगता को पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ाना चाहता है, वर्गीकरण भी नहीं होने देता है क्योंकि उससे महारों और जाटवों के अलावा जो हजारों प्रकार के दलित हैं उनको लाभ मिल जाएगा , ये उनका शोषण करता है उनके उपेक्षित होने देता है , कभी उनके लिए आवाज़ नहीं उठाता है ।
पूना समझौता के अनुसार 10 वर्ष के लिए प्राप्त आरक्षण को आज 76 वर्ष बाद भी जारी रखना चाहता है ।
देश की योग्य युवा पीढ़ी को अमानवीय आरक्षण की बेड़ी डाल कर उनका जीवन खराब कर रहा है , बात समानता की करता है लेकिन यह भेदभाव को जस्टिफाई कर रहा है ।
एससी एसटी जैसे काले कानून जो धन उगाही एक हथियार के अलावा किसी को उससे न्याय नहीं मिल रहा है उस पर कभी चर्चा नहीं करता ।
मिस्टर अठावले और मिस्टर चंदू कान खोल कर सून लो अब ये आरक्षण , एससी एसटी और यूजीसी एक्ट जैसे काले कानून इस देश में नहीं रहेंगे और तुम कुछ नहीं उखाड़ पाओगे , अब तूफ़ान चल चुका है ।
इस महा आंदोलन में सवर्ण , पिछड़े, अति पिछड़े , अति दलित सभी समवेत स्वर में बोलेंगे और इन काले कानूनों को समाप्त करेंगे ।
CJP आंदोलन के समय मुँह में दही जमाकर बैठे इन नेताओं को आरक्षण के खिलाफ बोलने वाले सभी लोगों का सोशल मीडिया हैंडल बंद कर देना है!
वाह रे दोगलापन!
जय भीम बोलने के बाद CJP को सब अराजकता करने दे दी, और यहां लोगों को बस अपनी राय भी रखने देने से इनको ऐतराज है कि सीधा धमकी दे रहे हैं?
Just remember: many upper-caste people are BJP voters, not BJP supporters. They vote for it because they don't have better alternative.
Don't push them to the point where they stop being even voters.
यह लाल झा हैं
जाति से ब्राह्मण हैं
मधुबनी के रहने वाले हैं
नारियल बेचकर अपना जीवन यापन करते हैं
लेकिन इन्हें जातिगत आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा
क्योंकि सरकार के अनुसार ब्राह्मण जन्म से राजा होता है
क्या समानता लाने के लिए जातिगत आरक्षण खत्म नही होना चाहिए? आरक्षण को जड़ से मिटाना होगा
आरक्षण मिटाओ अभियान का हिस्सा बनें 🤟
The suffering of our people in the last hundred years, was due to Savarnas saving Shudras & Dalits from British & Islam.
It was a lesson from God. Our Gods punished us for having empathy for those who don't deserve it.
Same God has already ended you.
You just don't know it.
आरक्षण कोई अधिकार नहीं है। आरक्षण एक कोढ़ है, कैंसर है जो समाज और राष्ट्र को खाए जा रहा है। एक ही जाति को सारा लाभ मिल रहा है, बाकी जातियाँ पीछे हैं।
इसकी समीक्षा करवाइए, नहीं तो जनता स्वयं अपने नेता चुनेगी।
@neetusi86329772@SurajKrBauddh आठवले के ट्वीट की भाषा देखिए , रावण की भाषा देखिए , जैसे ही मुफ्तखोरों को लगा की अब उनका झूठ नहीं चलेगा उनकी भाषा का स्तर अपनी औकात पे पहुंच गया
एक सांसद खुल कर धमकियाँ दे रहा है। कॉकरोच के सामने बिछने वाली सरकार तार्किक आंदोलनों को धमकियाँ तो देगी ही। वामपंथियों के दो ट्वीट तो तुमसे हटते नहीं। कोर्ट से पलटवा लेते हैं। आप ये अकाउंट हटवा कर देख लो, पता चल जाएगा कि जनता का मूड क्या है।