पटना उच्च न्यायालय में हाल ही में सात नए जजों की नियुक्ति और उनमें सामाजिक प्रतिनिधित्व के पूर्ण अभाव ने एक बार फिर न्यायपालिका में व्याप्त संरचनात्मक असमानता को उजागर कर दिया है। यह अत्यंत गंभीर विषय है कि बहुजन समाज (अनुसूचित जाति,अनुसूचित जनजाति, ओबीसी और धार्मिक अल्पसंख्यक समुदायों) से योग्य एवं अनुभवी अधिवक्ता उपलब्ध होने के बावजूद नियुक्तियों में उनकी भागीदारी नहीं है।
पटना उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय के कॉलेजियम में तथाकथित सवर्ण वर्चस्ववादी तंत्र पर उठ रहे सवालों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। न्यायपालिका यदि समाज की विविधता का प्रतिनिधित्व नहीं करेगी, तो सामाजिक न्याय और संवैधानिक समानता के दावे कमजोर पड़ जाएंगे।
कॉलेजियम व्यवस्था को लेकर लंबे समय से पारदर्शिता, जवाबदेही और सामाजिक बहिष्करण के आरोप लगते रहे हैं। इसलिए न्यायिक नियुक्तियों की प्रक्रिया की समीक्षा कर एक ऐसी पारदर्शी और जवाबदेह व्यवस्था लागू की जानी चाहिए, जिसमें समाज के सभी वर्गों को न्यायपूर्ण अवसर मिले।
हम @mygovindia से मांग करते हैं कि ऑल इंडिया ज्यूडिशियल सर्विस कमीशन का गठन कर न्यायिक नियुक्तियों में सामाजिक प्रतिनिधित्व, पारदर्शिता और समान अवसर सुनिश्चित किए जाएं। देश का संविधान 140 करोड़ भारतीयों का है, इसलिए न्यायपालिका में भी भारत की सामाजिक विविधता का प्रतिबिंब दिखाई देना चाहिए।
This government excels in creating panic and helplessness among ordinary citizens. By declaring that even a Passport doesn’t certify one’s citizenship, they are laying the groundwork to arbitrarily deny citizenship rights to Indians who they disagree with.
We are well aware of their clandestine measures to remove names of people from certain communities from the voter rolls, to suit their political agenda. The day is not far when purely out of political vendetta, this fascist regime will strip you of your citizenship - even if you have a passport or any other document proving that you are Indian.
Hey dear Goverment,
rather than telling me every year which of my document is not my citizenship proof,
You can just tell me, WHICH DOCUMENT IS THE PROOF OF MY CITIZENSHIP?
and we'll be done.
@PMOIndia@MEAIndia
खण्डीप की धरती पर किसानों की एकता, संघर्ष और जनशक्ति की ऐतिहासिक जीत।
विगत 20 दिनों से पांचना बाँध का पानी कमांड एरिया की नहरों में छोड़े जाने की मांग को लेकर खण्डीप गाँव में चल रहा धरना (महापंचायत) आज राजस्थान सरकार की ओर से आए कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा जी के 6 दिन के 1/5
पीएम, चीफ जस्टिस और ज्ञानेश गुप्ता बतायें कि भारत की नागरिकता साबित करने के लिये इनके पास कौन सा दस्तावेज़ है?
कभी पासपोर्ट तो कभी CAA और SIR सरकार अलग अलग तरीकों के नागरिकता का सवाल केवल ध्रुवीकरण के लिये उठाती है.
सुप्रीम कोर्ट के जज SIR में नागरिकता के सवाल पर साल भर सेमिनार नुमा सुनवाई कर के एक बेतुका फैसला सुनाते हैं.
भारत में नागरिकता प्रमाण कौन सा है?
🔎 आधार कार्ड?
🔎 राशन कार्ड?
🔎 Passport?
🔎 ड्राइविंग लाइसेंस?
🔎 वोटर आईडी?
🔎 बैंक पासबुक?
🔎 जन्म प्रमाण पत्र? (जो आज सबके पास है ही नहीं)
🔎 फॉर्मर किसान आईडी?
🔎 मार्कशीट? (जो ये भी सबके पास है ही नहीं)
आखिर कौन कौन सा मान्य है??
Image: AI Generated Image
'पासपोर्ट नागरिकता का सबूत नहीं!' MEA के बयान पर भड़के कपिल सिब्बल और जावेद अख्तर
विदेश मंत्रालय ने बताया है कि पासपोर्ट यात्रा दस्तावेज है, नागरिकता का प्रमाण नहीं. इस बयान पर कपिल सिब्बल ने सवाल उठाया कि फिर नागरिकता का सबूत क्या है और इसे वोट के अधिकार से जोड़ते हुए सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कही. जावेद अख्तर ने भी इस बयान को बेतुका बताया और सरकार की मंशा पर सवाल उठाए.
पूरी खबर : https://t.co/61gofLqrxJ
#PassportRow #CitizenshipDebate
#MEA #KapilSibal #JavedAkhtar
अब मोदी सरकार को बताना चाहिए 👇
• वो कौन से कागजात हैं, जिन्हें बनवाकर हम भारत के नागरिक रह सकते हैं.
• उसकी एक लिस्ट जारी की जाए, ताकि जनता उन्हें बनवाने में जुटे.
MEA
June 24, 2026 :
“A passport is a travel document, and not a document of citizenship.”
Which document then is proof of citizenship?
BLO can doubt my citizenship
Deprive me of my vote
Result
BJP wins the election
Over to Supreme Court !
सत्ता के अहंकार में डूबी मोदी सरकार अब इस मुकाम पर पहुँच गई है कि अपने अधिकारों, निष्पक्ष परीक्षाओं और सुरक्षित भविष्य की मांग करने वाले छात्रों को ही शिक्षा मंत्री “आतंकवादी” कह रहे हैं।
ज़रा सोचिए - जिसकी नाकामी से इतने पेपर लीक हुए, जिसके राज में 20 बच्चों ने जान दे दी, जिसने करोड़ों युवाओं का भविष्य अंधेरे में धकेल दिया - वो आज पीड़ित बच्चों और उनकी आवाज़ उठाने वालों को “दहशतगर्द” बता रहा है।
पर यह कोई नई बात नहीं: अन्नदाता किसानों को "आंदोलनजीवी और परजीवी" कहा। सवाल पूछने वाले को “Anti-National” कहा। और अब युवाओं को “दहशतगर्द।”
जो भी सरकार से सवाल पूछे - उसे देशद्रोही बता दो, यही इनकी पूरी राजनीति है।
धर्मेंद्र प्रधान जी, देश के करोड़ों युवाओं से तुरंत माफ़ी माँगिए और अपनी नाकामियों के लिए इस्तीफ़ा दीजिए।
और रही मेरी बात - आप मुझ पर जितने चाहें हमले कर लीजिए। मैंने कोटा में कहा था, और फिर कहता हूँ: यह शिक्षा व्यवस्था आज सिर्फ़ एक वसूली तंत्र बन गई है। मैं इसे ऐसे ही नहीं रहने दूँगा।
हर बच्चे को सस्ती, अच्छी शिक्षा और निष्पक्ष परीक्षा मिले - इस आवाज़ को उठाना मैं कभी बंद नहीं करूँगा।
#ChhatronKiGoonj
#ChhatraJodo
मोदी सरकार का कहना है कि पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं है
क्या हिंदुस्तान का पासपोर्ट ग़ैर हिंदुस्तानियों को भी दिया जाता है?
पासपोर्ट जारी करने से पहले पुलिस क्या जाँच करने आती है?
• आधार नागरिकता का प्रमाण नहीं है
• पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं है
• PAN नागरिकता का प्रमाण नहीं है
• Voter Id नागरिकता का प्रमाण नहीं है
तो फिर नागरिकता का प्रमाण है क्या?
मोदी का चरणवंदन?
BJP का आईडी?
RSS की टोपी?
I have a VOTER ID card, but NO, it is not proof of citizenship.
I have a AADHAR card but NO, it is not proof of citizenship
I have a PAN Card, but NO, it is not proof of citizenship.
I have a PASSPORT but NO, it is not proof of citizenship.
So who will give me a CITIZENSHIP CERTIFICATE? A govt bureaucrat?
My question is simple: is the problem with the citizen, or with the Mai Baap State itself?😡
अगर पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं,
आधार नागरिकता का प्रमाण नहीं,
वोटर कार्ड नागरिकता का प्रमाण नहीं,
राशन कार्ड नागरिकता का प्रमाण नहीं,
तो फिर नागरिकता का प्रमाण है क्या?
जिस सरकार ने खुद ये दस्तावेज़ जारी किए,
उसी सरकार के दौर में नागरिक अपने ही देश में अपनी पहचान साबित करने की कतार में खड़ा है।
सवाल सिर्फ़ दस्तावेज़ों का नहीं है।
सवाल यह है कि क्या अब हर भारतीय को बार-बार अपनी नागरिकता साबित करनी पड़ेगी?
पहले कहा गया आधार बनवाइए।
फिर कहा गया वोटर कार्ड बनवाइए।
फिर पासपोर्ट बनवाइए।
फिर राशन कार्ड बनवाइए।
आज कहा जा रहा है कि इनमें से कोई भी नागरिकता का प्रमाण नहीं है।
तो आखिर नागरिक ने इतने सालों तक क्या बनवाया?
दस्तावेज़ या भ्रम?
देश का नागरिक अपनी नागरिकता साबित करे,
या सरकार अपनी नीयत?
सबसे बड़ा सवाल यह नहीं कि नागरिकता का प्रमाण क्या है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब सरकार के ही जारी किए हुए पासपोर्ट, आधार, वोटर कार्ड और राशन कार्ड पर भरोसा नहीं है,
तो फिर सरकार पर भरोसा कैसे किया जाए?
दस्तावेज़ों पर अविश्वास दरअसल नागरिकों पर अविश्वास है।
और लोकतंत्र में इससे बड़ा संकट कोई नहीं।
Passport is a travel document not a proof of citizenship - MEA.
To kya hai proof citizenship ka?
Hum hai bhi citizen ya nhi?
Kaun bna rha hai hamare ye documents?
Kis baat ka tax cut rha hai?
#amitkilhor#kilhor#passport#citizenship#mea
भारत का पासपोर्ट अधिनियम, 1967 स्पष्ट रूप से कहता है कि भारतीय नागरिक के अलावा कोई अन्य व्यक्ति भारतीय पासपोर्ट प्राप्त नहीं कर सकता। अगर कोई करता है तो दंडनीय अपराध है।
————————————————-
“जो कोई भारत का नागरिक न होते हुए भी पासपोर्ट के लिए आवेदन करता है, या अपनी राष्ट्रीयता के संबंध में जानकारी छिपाकर पासपोर्ट प्राप्त करता है, अथवा जाली भारतीय पासपोर्ट या यात्रा दस्तावेज़ अपने पास रखता है, उसे पाँच वर्ष तक के कारावास या 50,000 रुपये तक के जुर्माने, या दोनों से दंडित किया जा सकता है।”