@SSaritacha42388 मुझे तो गुनाहो का देवता पढ़कर चन्दर से नफरत ही हो गई।उसके पास इतने सारे तो मौके थे वो चाहता तो हालात बदल सकते थे लेकिन वो अपने नैतिक मूल्य पर ही टिका रहा मेरे हिसाब से इतनी नैतिकता भी ठीक नहीं है।ये समाज ये चार लोगों ��े चक्कर में अपनी जिंदगी ही खत्म कर ली।
@प्रोबेशन में पूर्ण वेतन मीले
📲 आज आप शेयर करेंगे, तभी कल हजारों लोग हमारी मांगों से जुड़ेंगे।
✅एक व्यक्ति की आवाज़ अनसुनी हो सकती है, लेकिन 53,749 कर्मचारियों की एकजुट आवाज़ को नजरअंदाज करना आसान नहीं! ✊🔥
“खुद भी आवाज़ बनिए—दूसरों तक भी आवाज़ पहुँचाइए!” 📢📈 @HANUMANKISAN
लाखों कर्मचारी… एक जैसी परेशानी।
सरकारी नौकरी मिलना किसी भी युवा के लिए बड़ी उपलब्धि होती है।
लेकिन नौकरी मिलने के बाद प्रोबेशन की अवधि में कम पारिश्रमिक के कारण लाखों कर्मचारी खुद को आर्थिक दबाव और उपेक्षा से प्रताड़ित महसूस कर रहे हैं।
नौकरी वही,
काम वही,
जिम्मेदारी वही,
कार्यालय का समय वही…
फिर आर्थिक सुरक्षा में इतना अंतर क्यों?
सबसे बड़ी विडंबना यह है कि जिस व्यवस्था की शुरुआत 2016 की परिस्थितियों में हुई थी, उसे आज 2026 की महंगाई के बीच भी उसी तरह झेलना पड़ रहा है।
यह सिर्फ वेतन का विषय नहीं है।
यह उन परिवारों का विषय है जो नई नौकरी से बेहतर भविष्य की उम्मीद करते हैं।
सरकार से आग्रह है कि लाख��ं प्रोबेशनर कर्मचारियों की इस पीड़ा को गंभीरता से समझते हुए प्रोबेशन में पूर्ण वेतन देने की दिशा में सकारात्मक निर्णय लिया जाए।
नई नौकरी की शुरुआत आर्थिक प्रताड़ना से नहीं, सम्मान और सुरक्षा से होनी चाहिए।
✊ प्रोबेशन में पूर्ण वेतन — अब समय की मांग है।
#प्रोबेशन_में_पूर्ण_वेतन
#ProbationFullSalary
#बाबू_संघ_राजस्थान
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#fourthgrade
#फोर्थग्रेड
@digigoldind Do NOT use the Gold SIP feature on this app! 🚫 They set the minimum quantity to 1g (around ₹15,000), making regular investing almost impossible. I accidentally invested ₹3,000 and now my money is trapped because I can't sell until I reach 1g. Completely user-unfriendly.
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जाट समाज पतन की राह पर...?
‘जाट महान’ का प्रमाणपत्र आखिर किसने दिया?
जाट महान, जाट स्वाभिमानी, जाट सबसे बहादुर! आखिर इस आत्ममुग्धता का प्रमाणपत्र किसने जारी किया है? किसी भी समुदाय के कुछ अच्छे लोगों की उपलब्धियों को पूरी जाति के सिर पर स्थायी महानता का ताज पहना देना इतिहास नहीं, आत्मप्रवंचना है।
जिस तरह “विश्वगुरु” जैसे खोखले नारों से किसी देश की वास्तविक समस्याएं छिपाई न���ीं जा सकतीं, उसी तरह “जाट महान” का राग अलापने से किसी समुदाय की कमियां समाप्त नहीं हो जातीं। किसी जाति में साहसी भी होंगे, ईमानदार भी, अवसरवादी भी, स्वार्थी भी और चापलूस भी होंगे, क्योंकि जाति 'चरित्र' का प्रमाणपत्र नहीं होती।
इसलिए हर उपलब्धि को जाति की महानता और हर कमी को अपवाद बताने का खेल बंद होना चाहिए। समुदाय पर गर्व करने से पहले यह पूछना ज्यादा जरूरी है कि हम अपने व्यक्तिगत आचरण में उस गर्व के योग्य हैं भी या नहीं।
सबसे दिलचस्प विडंबना यह है कि जो लोग दिन-रात स्वाभिमान और महानता का ढोल पीटते हैं, मैने देखा है कि वही सत्ता के सामने अपने सिद्धांतों की कीमत लगाने में सबसे आगे दिखाई देते हैं तो फिर यह महानता किस काम की? जिस स्वाभिमान को सत्ता की एक थपकी, पद के एक टुकड़े और फेंके गये सिक्कों की खनक की आवाज़ पर गिरवी रखा जा सके, मेरी नज़र में वह स्वाभिमान नहीं, सुविधा है।
दरअसल जातीय गौरव का सबसे ब���़ा मजाक तब बनता है जब व्यक्ति अपने समुदाय के नाम पर गर्व करता है, लेकिन अपने कर्मों की जिम्मेदारी लेने से बचता है। इसलिए “जाट महान” का झूठा प्रमाणपत्र छापने के बजाय अपने गिरेबान में झांकिए क्योंकि महानता किसी गोत्र, जाति या उपनाम की जागीर नहीं होती। महान वही है जिसका चरित्र उसके दावे से बड़ा हो; बाकी सब सिर्फ जातीय आत्ममुग्धता की चमकदार पैकेजिंग है।
और अंत में एक बात और कि किसी ��मुदाय की वास्तविक ताकत उसके नारों, सोशल मीडिया की डींगों या इतिहास की चुनिंदा घटनाओं में नहीं, बल्कि उसके वर्तमान आचरण में दिखाई देती है। यदि हम सचमुच अपने समुदाय को मजबूत और सम्मानित देखना चाहते हैं तो हमें अपने बच्चों को केवल जातीय गौरव की कहानियां सुनाने के बजाय ईमानदारी, शिक्षा, संवेदनशीलता, वैज्ञानिक सोच, कानून के सम्मान और अन्य समुदायों के प्रति सम्मान की सीख देनी होगी।
भाइयों, अपन��� समुदाय की गलतियों पर पर्दा डालना प्रेम नहीं, बल्कि उसके भविष्य के साथ धोखा है। जिस दिन हम यह कहने का साहस पैदा कर लेंगे कि “हमारी जाति में भी गलत लोग हैं और गलतियां भी होती हैं”, उसी दिन हमारा आत्मसम्मान वास्तविक होगा; क्योंकि अंधा गौरव व्यक्ति को महान नहीं बनाता बल्कि आत्मालोचना बनाती है।
- के. पी. मलिक (पत्रकार एवं आलोचक)
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आज पिंक सिटी प्रेस क्लब जयपुर में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में कृषि पर्यवेक्षक भर्ती 2026 के गड़बड़ी के संदेहास्पद दस्तावेज़ उजागर किए !
RSSB कृषि पर्यवेक्षक भर्ती 2026 के परिणाम पर उठ रहे सवालों की निष्पक्ष जाँच की मांग !
18 अप्रैल 2026 को 1100 पदों पर आयोजित कृषि पर्यवेक्षक भर्ती 2026 का परिणाम 23 जून को जारी किया गया। परिणाम जारी होने के बाद कुछ अभ्यर्थियों और युवाओं की ओर से गंभीर सवाल और संदेहास्पद ���रिणाम सामने आए हैं, जिनकी निष्पक्ष जाँच आवश्यक है।
गड़बड़ी के प्रमुख तथ्य:
• एक ही परिवार/रिश्तेदारी से लगभग 40 ऐसे परिवार के अभ्यर्थियों के एक साथ चयनित होने व जिसमें कईयोंकी रैंक समान के दावे सामने आए हैं।
• कुछ मामलों में चयनित अभ्यर्थियों की रैंक समान या बेहद करीब होने की बात है।
• 3 पूर्व सैनिक अभ्यर्थियों के अंक समान होने और उनकी रैंक भी क्रम से होने की बात संदेह के घेरे में है।
• बूंद��� की एक कोचिंग संस्था तथा हाड़ौती क्षेत्र के एक सेंटर से असामान्य रूप से अधिक चयन होने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
• RSSB द्वारा जारी अंतिम परिणाम PDF में कुछ नाम, पिता के नाम और माता के नाम के फ़ॉन्ट साइज में अंतर दिखाई देने के मामले है।
• कुछ मामलों में परिणाम में अभ्यर्थी का नाम और पिता का नाम तो है, लेकिन माता का नाम नहीं होने की बात भी सामने आई है।
• एक अभ्यर्थी के अनुसार उत्तर-कुंजी के आधार पर उसके अंक 219.95 बनते हैं, जबकि जारी परिणाम में 215.86 अंक दर्शाए गए हैं। लगभग 4 अंकों के अंतर को लेकर अभ्यर्थी ने OMR की दोबारा जाँच की मांग की, जिस पर उसे बताय�� गया कि RSSB में OMR की revaluation/rechecking का प्रावधान नहीं है।
इन सभी बिंदुओं को केवल आरोप मानकर खारिज करने के बजाय उपलब्ध दस्तावेजों और साक्ष्यों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जाँच कराना जरूरी है। यदि सभी आरोप गलत हैं तो जाँच से स्थिति स्पष्ट हो जाएगी, और यदि कहीं अनियमितता हुई है तो उसका भी पता चल सकेगा।
हम RSSB अध्यक्ष श्री आलोक राज जी, मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा जी तथा राजस्थान सरकार से विनम्र निवेदन करते हैं कि सामने आए सभी साक्ष्यों की SIT से निष्पक्ष जाँच करवाकर युवाओं के मन में उठ रहे संदेह दूर किए जाएँ।
युवाओं को केवल निष्पक्षता चाहिए।
जाँच हो, सच्चाई सामने आए — दूध का दूध और पानी का पानी हो।
#RSSB #कृषि_पर्यवेक्षक #कृषि_पर्यवेक्षक_भर्ती_2026 #RSSBResult #राजस्थान #युवा #निष्पक्ष_जाँच
@BhajanlalBjp @RajCMO @alokrajRSSB @hanumanbeniwal
बालपन की मासूमियत भरी ये अदाएं देखकर तो पत्थर भी पिघल जाए..तो फिर मैडम क्या चीज हैं..! ❣️
आखिर छोरे ने रो रो कर मैडम को प्रे�� स्व���कारने पर मजबूर कर ही दिया..!
ये वीडियो बालपन की यादें ताजा कर देगी..🔥🔥