MScAgPBGमैं किसी राष्ट्रीय,क्षेत्रीय,धार्मिक,जातीय,त्वचा रंग लिंग आदि के भेदभाव में क़तई विश्वास नहीं करता…जो करते हैं उनमें मनुष्य के सम्पूर्ण गुण नहीं हो सकते
अदालत की सुनवाई के दौरान एक जज का 79 सेकंड का संदेश....
जज साहब ने कहा कि -पद और ताकत हमेशा स्थायी नहीं होते, लेकिन इंसानियत, विनम्रता और न्याय की कीमत हमेशा बनी रहती है।
उन्होंने यह भी याद दिलाया कि कानून के सामने सभी बराबर हैं और घमंड किसी का स्थायी सहारा नहीं।
जज के ये प्रेरक शब्द इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहे हैं और लोग इसे समाज के लिए एक बड़ी सीख मान रहे हैं।
बुद्ध धम्म है धर्म नहीं
बुद्ध मार्ग है धर्म कांड नहीं
बुद्ध मानव है देवता नहीं
बुद्ध करुणा है सजा नहीं
बुद्ध शुद्ध है पाखंड नहीं
बुद्ध विचार है दुराचार नहीं
बुद्ध समानता है भेदभाव नहीं
बुद्ध शांति है अहिंसक नहीं
बुद्ध प्रबुद्ध है युद��ध नहीं
जय भीम नमो बुद्धाय
��ेश के 8 IITs और 7 IIMs में 80 प्रतिशत से अधिक फैकल्टी सामान्य वर्ग से है, फिर भी इसे जातिवाद नहीं बल्कि ‘मेरिट’ कहा जाता है।
अब सवाल यह है कि यह जातिवादी व्यवस्था अपनी सच्चाई कब स्वीकार करेगी? और दलितों-पिछड़ों व आदिवासियों के हक़ पर कब्ज़ा कब तक जारी रहेगा?
बाबाओं के पास दो लाख करोड़ की संपत्ति है जो सरकारी सहायता से पैदा की गई है और जिसका प्रोडक्शन अंधविश्वासी भीड़ के रूप में होता है
यदि इस संपत्ति को शिक्षा के लिए तब्दील किया जाए तो देश के सभी बच्चों को फ्री शिक्षा मिल सकती है
लेकिन नेताओं को वोट चाहिए जो बाबाओं से मिलते है
'यूजीसी ने अपने ही नियम को कोर्ट में डिफ़ेंड करने की कोशिश नहीं की'
'जैसे ही ओबीसी आता है, सिंहासन हिलने लगता है'
यूजीसी के नए नियम, उन्हें लेकर हुए विरोध प्रदर्शन पर योगेंद्र यादव ने क्या कहा?
देखिए योगेंद्र यादव (@_YogendraYadav ) के साथ बीबीसी संवाददाता दिलनवाज़ पाशा (@dilnawazpasha ) की यह ख़ास बातचीत.
वीडियो��� अल्ताफ़ (@Al_taf38 )
नाम-विशाल यादव
भुक्तभोगी-JNU के PHD प्रवेश में जातिगत भेदभाव
विशाल यादव JRF क्वालीफाई हैं और उन्होंने PHD में प्रवेश के लिए JNU में 21 दिसंबर 2025 को सुबह 10-12 के बीच में 20 मिनट का इंटरव्यू दिया था, इंटरव्यू बोर्ड का नेतृत्व प्रोफेसर विकाश बाजपेई जी कर रहे थे।
7 जनवरी 2026 को PHD एडमिशन का रिजल्ट आता है जिसमें 20 मिनट इंटरव्यू देने के बावजूद विशाल यादव को Absent दिखाकर बाहर कर दिया गया इसका सिर्फ एक कारण था जातिगत भेदभाव की मानसिकता।
"जमीन पर टिककर फलक तक सवाल पूछने" का दंभ भरने वाले @Abhinav_Pan जी की जुबान इस मामले में उनके हलक में क्यों अटक गई है??
#UGCRules पर गला फाड़कर चिल्ला रहें है @Abhinav_Pan और @shubhankrmishra क्या विशाल यादव के साथ अभी 20 दिन पहले हुए जातिगत भेदभाव पर वीडियो बनाएंगे??
है ���िम्मत की विशाल यादव का इंटरव्यू करते हुए JNU प्रशासन और #UGC से सवाल पूछने की????
अगर हिम्मत नहीं है तो यह साबित हो जाएगा कि आप सभी पत्रकार निहायत जातिवादी मानसिकता से भरे हुए हैं😡
मेरे अपने लोगों, आज बहुत भारी मन और काँपती आवाज़ के साथ आपसे यह बात कह रहा हूँ। यह कोई औपचारिक अपील नहीं है, बल्कि दिल से निकली हुई एक गुहार है।
मेरे प्रिय मित्र, घर के सदस्य जैसे, बहुजन विचार के सच्चे हमसफ़र और बहुजन समाज के शानदार ज़मीनी पत्रकार सुमित चौहान तथा उनकी जीवनसाथी अज़रा आज ज़िंदगी की सबसे कठिन लड़ाई लड�� रहे हैं। यह वह घड़ी है जब इंसान अकेला पड़ सकता है, लेकिन समाज चाहे तो उसे फिर से खड़ा कर सकता है। यह सिर्फ़ शारीरिक नहीं, मानसिक और आर्थिक रूप से भी तोड़ देने वाला संघर्ष है।
सुमित और अज़रा ने इलाज के लिए अपनी पूरी बचत झोंक दी है। हेल्थ इंश्योरेंस भी समाप्त हो चुका है। अब हालात ऐसे हैं कि समाज की मदद के बिना यह लड़ाई आगे बढ़ पाना मुश्किल हो गया है। इलाज के लिए लगभग 30 लाख रुपये की ज़रूरत है, और इसी ���जबूरी में आज हम ��ोशल मीडिया के अपने पूरे परिवार से मदद माँग रहे हैं।
मैं बहुजन समाज को अच्छी तरह जानता हूँ। मैं जानता हूँ कि जिस समाज के लिए सुमित ने अपनी पूरी ज़िंदगी ईमानदारी और साहस के साथ लगा दी, वह समाज अपने साथी को इस अँधेरे में अकेला नहीं छोड़ेगा। आज यह लड़ाई सिर्फ़ सुमित और अज़रा की नहीं है, यह हमारी सामूहिक संवेदना, एकजुटता और इंसानियत की परीक्षा है। पैसा आज दीवार नहीं बनेगा, बल्कि पुल बनेगा—जो ज़िं��गी तक पहुँचाएगा।
आपसे अपील है कि जितनी भी मदद आप कर सकते हैं, अवश्य करें। जिन लोगों तक आप यह अपील पहुँचा सकते हैं, वहाँ तक इसे पहुँचाइए। इसे एक पोस्ट की तरह नहीं, बल्कि एक मिशन और आंदोलन की तरह आगे बढ़ाइए। और यदि आप आर्थिक मदद नहीं कर सकते, तो कम से कम इस अपील को अधिक से अधिक साझा कीजिए—क्योंकि आपका एक शेयर भी किसी की जान बचाने की दिशा में बड़ा कदम हो सकता है।
मैं आपसे पूरे भरोसे के साथ ��ूछ रहा हूँ—आप मुझे, सुमित को और अज़रा को निराश तो नहीं करेंगे न? आइए, इस कठिन घड़ी में साबित करें कि हमारा समाज सिर्फ़ विचारों से नहीं, कर्म से भी खड़ा होता है।
मैं चाहता हूँ कि सुमित की इस अपील को आप भी पढ़ें और मदद करें-
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"जय भीम साथियों, मेरे परिवार के लिए ये मुश्किल घड़ी है। मेरी जीवनसाथी अज़रा इस समय गंभीर बीमारी से जूझ रही हैं। उन्हें दो तरह के रेयर एब्डॉमिनल ट्यूमर हैं और मेदांता अस्पताल (गुरुग्राम) में उनका इलाज चल रहा है।
नवंबर 2022 में इन्हीं ट्यूमर की सर्जरी कराई गई थी लेकिन दुर्भाग्य से ये ट्यूमर फिर लौट आए हैं। इस बार मामला क्रिटिकल है और अज़रा को मल्टीपल सर्जरी और कीमोथेरेपी वग़ैरह से गुज़रना होगा।
हेल्थ इंश्योरेंस और पर्सनल सेविंग्स ख़त्म होने के बाद हमें आपकी मदद की ज़रूरत है। हमें कुल 30 लाख रुपये की ज़रूरत है इसलिए हम आपसे अपील कर रहे हैं।
मैं आपसे ���ुज़ारिश करता हूँ कि ��गर आप हमारी मदद कर सकें तो प्लीज़ करें।
अगर आप मदद नहीं कर सकते तो प्लीज़ इस पोस्ट को ज़्यादा से ज़्यादा शेयर करें। मुझे उम्मीद है कि इस मुश्किल वक़्त में आप हमारा साथ देंगे।
आप से गुज़ारिश है कि अगर UPI काम नहीं करे तो प्लीज़ पोस्टर में दिए गए अकाउंट नंबर पर अपनी मदद भेजें।
Account Holder: SUMIT CHAUHAN
Account Number: 50100037249582
IFSC: HDFC0002649
SWIFT: HDFCINBB
Bank: HDFC Bank
Branch: Sector 62, Noida
UPI - newsbeak@yesbank
UPI - isumitchauhan@ptyes
UPI - sumitchauhaan@icici
UPI - azrasumit@kotak
PhonePe, Paytm - 8595794224
आपका @Sumitchauhaan
मेरे प्रिय मित्र, घर के सदस्य जैसे, ��हुजन विचार के सच्चे हमसफ़र और बहुजन समाज के शानदार ज़मीनी पत्रकार सुमित चौहान तथा उनकी जीवनसाथी अज़रा आज ज़िंदगी की सबसे कठिन लड़ाई लड़ रहे हैं। यह वह घड़ी है जब इंसान अकेला पड़ सकता है, लेकिन समाज चाहे तो उसे फिर से खड़ा कर सकता है। यह सिर्फ़ शारीरिक नहीं, मानसिक और आर्थिक रूप से भी तोड़ देने वाला संघर्ष है।
सुमित और अज़रा ने इलाज के लिए अपनी पूरी बचत झोंक दी है। हेल्थ इंश्योरेंस भी समाप्त ��ो चुका है। अब हालात ऐसे हैं कि समाज की मदद के बिना यह लड़ाई आगे बढ़ पाना मुश्किल हो गया है। इलाज के लिए लगभग 30 लाख रुपये की ज़रूरत है, और इसी मजबूरी में आज हम सोशल मीडिया के अपने पूरे परिवार से मदद माँग रहे हैं।
आपसे अपील है कि जितनी भी मदद आप कर सकते हैं, अवश्य करें। जिन लोगों तक आप यह अपील पहुँचा सकते हैं, वहाँ तक इसे पहुँचाइए। इसे एक पोस्ट की तरह नहीं, बल्कि एक मिशन और आंदोलन की तरह आगे बढ़ाइए। और ���दि आप आर्थिक मदद नहीं कर सकते, तो कम से कम इस अपील को अधिक से अधिक साझा कीजिए—क्योंकि आपका एक शेयर भी किसी की जान बचाने की दिशा में बड़ा कदम हो सकता है।
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