.. हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में SC/ST/OBC समाज के जज का न होना सिर्फ कजेजियम की गलती नहीं हैं। इसमें केन्द्र और राज्य सरकारें भी ज़िम्मेदार हैं.
कारण यह है कि ज़्यादातर वही वकील जज बनाए जाते हैं, जोकि एडिशनल सॉलिसिटर जनरल, एडीशनल एडवोकेट जनरल रहे होते हैं। इन पदों पर नियुक्तियाँ सरकार करती है।
BJP, Congress को तो छोड़िए, समाजिक न्याय की पार्टियाँ इन समाज के वकीलों को इन पदों पर नियुक्त नहीं कर रही हैं। @SanjayAzadSln को यह भी बताना चाहिए कि जिन राज्यों में उनकी सरकार है, वहाँ इन समुदायों के कितने लोग एडिसनल एडवोकेट जनरल हैं?
क्या भारत का 52% ओबीसी “बुद्धू” हैं, जिनको आरक्षण देने से देश का नुक़सान हो जाएगा?
- राहुल गांधी के पिता राजीव गांधी तो यही कहा करते थे।
🚨सनसनीख़ेज़। सोशल मीडिया में पहली बार।🚨
माननीय राजीव गांधी ने प्रधानमंत्री रहते हुए मंडल कमीशन की 1980 में दी गई रिपोर्ट नहीं लागू की, ये तो पूरा देश जानता है। पर उस दौरान उन्होंने उस समय के हिंदी के सबसे बड़े समाचार पत्र नवभारत टाइम्स के पत्रकार और चर्चित संपादक आलोक मेहता जी को एक इंटरव्यू दिया था।
इस इंटरव्यू में राजीव गांधी ने ओबीसी आरक्षण के बारे में कहा था कि - “आरक्षण के नाम पर बुद्धुओं को बढ़ावा नहीं!” और कि आरक्षण के नाम पर बुद्धुओं को बढ़ावा देने से “पूरे देश का नुक़सान होगा।”
ये संयोग नहीं है कि राजीव गांधी के बाद कांग्रेस की देश में कभी पूर्ण बहुमत की सरकार नहीं बनी। ओबीसी के बिना कौन सी सरकार बन सकती है? संभव ही नहीं है। कोशिश करना बेकार है।
तो मैटर ये है कि मंडल कमीशन लागू होने पर इसके ख़िलाफ़ राजीव गांधी ने अपने जीवन का सबसे लंबा भाषण लोक सभा में दिया था। कभी वह भी पढ़वाऊँगा आपको। बहुत ज़ोरदार है।
उनके जीवन का यह एक पक्ष था। मेरा विरोध रहेगा।
पर राजीव जी बेहद प्रगतिवादी और देशभक्त नेता थे। नवोदय स्कूल से लेकर भारत की कंप्यूटर क्रांति में उनका सर्वाधिक योगदान है। मेरा विनम्र नमन। मेरा उनके प्रति अनादर का कोई भाव नहीं है। वे महान थे। देश के लिए उन्होंने बलिदान दिया। 🙏🏽
बहरहाल, राजीव गांधी के कार्यकाल में बिना ओबीसी आरक्षण के जो IAS अफ़सर बने वे अब भारत में शासन के टॉप पर सेक्रेटरी पद पर हैं। वही बजट बना रहे हैं और राजीव गांधी के पुत्र राहुल जी उनमें ओबीसी खोज रहे हैं। आज लोकसभा में उन्होंने यही किया।
कहां से ओबीसी मिलेगा राहुल बाबू?
आपके पापा और उससे पहले आपकी दादी ने ओबीसी को आने ही नहीं दिया। वे सत्ता का कोई और सामाजिक-धार्मिक समीकरण चला रहे थे।
खैर, “जो हुआ सो हुआ!” अब जो अफ़सर आ रहे हैं उनको सेक्रेटरी बनने में समय लगेगा। पर हो जाएगा। भारत तथागत गौतम बुद्ध के समय से क्रमिक बदलाव का देश है। यहाँ क्रांति नही, क्रमिक विकास होता है।
यही भारत 🇮🇳 है। यही भारत का मिज़ाज है। यही हमारा तरीक़ा है। सब कुछ शांतिपूर्ण होगा। रुको जरा। थोड़ा सब्र करो।
फ़िलहाल राहुल गांधी अराजकतावाद से मुक्ति पाएँ। ऐसी मेरी मंगलकामना है। वे भारतीय समाज को जोड़ने का काम करें। चाहें तो वे ऐसा कर सकते हैं। सरकारें आती जाती रहती हैं। देश सबसे ऊपर है।
इस फोटो में मौजूद पाँचों IAS राजीव गांधी के समय सिविल सर्विस में आए थे। राजीव और उससे पहले इंदिरा ने अगर 1980 से पड़ी मंडल रिपोर्ट को लागू किया होता तो आज राहुल को इन जातियों के IAS खोजने न पड़ते।
अमेरिका में, पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप पर हमले के बाद यूएस सिक्रेट सर्विस की चीफ़ का करियर समाप्त हो गया।
यह प्रक्रिया सीधी और निर्णायक थी: सुरक्षा में चूक हुई थी, और संस्थान की प्रमुख के रूप में, चीफ़ को जाना पड़ा।
सपष्ट और सीधा, बिना किसी बहाने के। उन्होंने इस्तीफा दे दिया।
भारत अलग तरीके से काम करता है। 😔
1962 में, भारत ने चीन के साथ युद्ध में अपनी सबसे बड़ी सैन्य हार का सामना किया।
उस समय के सेना प्रमुख, जनरल पी.एन. थापर से कभी नहीं पूछा गया कि सेना इस युद्ध के लिए तैयार क्यों नहीं थी या इस तैयारी की कमी को राजनीतिक नेतृत्व को क्यों नहीं बताया गया।
हार के बावजूद, जनरल थापर को उनके पद से नहीं हटाया गया। इसके बजाय, उन्होंने पूरे सम्मान के साथ अपनी सेवा पूरी की, अपने पदक रखे और पेंशन प्राप्त की।
यही नहीं, सेवानिवृत्ति के बाद, थापर को अफगानिस्तान में भारत का राजदूत भी नियुक्त किया गया। 😳
इस प्रकार उन्हें वास्तव में हार के लिए पुरस्कृत किया गया।
उनके डिप्टी, जनरल बी.एम. कौल, को भी कोई गंभीर परिणाम नहीं भुगतना पड़ा।
थापर और कौल दोनों का शीर्ष परिवार से व्यक्तिगत, पारिवारिक और अन्य संबंध थे।
यह भारत में व्यापक समस्या को दर्शाता है, जहां शीर्ष नेतृत्व और सिविल सेवकों, जिसमें आईएएस और आईपीएस अधिकारी शामिल हैं, की जिम्मेदारी अक्सर नहीं ली जाती।
इस परंपरा को बदलने की जरूरत है। @narendramodi
नौकरशाहों को जनता का सच्चा "सेवक" माना जाना चाहिए और उनके कार्यों और विफलताओं के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए, जिसमें आवश्यक होने पर उनके पदों से बर्खास्तगी भी शामिल है।
जब भी कुछ बहुत गलत हो जाए, तो किसी शीर्ष व्यक्ति को जिम्मेदार ठहराना चाहिए।
ये ⬇️ भारत की सबसे ताकतवर फ़ैमिली है। इसमें कई प्रधानमंत्री, आर्मी चीफ़, इतिहासकार, बॉलीवुड के सबसे चमकते सितारे, भारत के सबसे बड़े बिल्डिंग ठेकेदार, कामयाब वकील, साहित्यकार, सबसे बड़े संपादक, पत्रकार सब हैं।
आप लोग सीखिए। जलन मत कीजिए। जलो, मगर 🪔 की तरह। बुरी नज़र वाले….
आप 2019 बैच के #532वी रैंक के साथ IAS बने प्रफुल देशाई हैं। आप जब ट्रैनिंग के लिए LBSNAA गए तो आपने जाते ही 25KM ट्रैकिंग की और 30KM साइक्लिंग की।
जबकि आप ऑर्थोपेडिकल हैंडिकैप्ड है। आपने ट्रेनिंग के दौरान ऐसा क्या खा लिया कि आप एकदम पहाड़ चढ़ने लगे?
#UPSCscam
उत्तर प्रदेश में #व्यापारियों के हितों के लिए अगर कोई सरकारी संस्थान हैं तो उनकी समीक्षा होनी आवश्यक है ।एक मज़बूत,संवेदनशील और सक्रिय “उत्तर प्रदेश व्यापारी निगम “स्थापित हो जिसकी एक प्रमुख ज़िम्मेदारी प्रदेश के व्यापारियों और उनके परिवारजनों की #सुरक्षा भी हो। @myogiadityanath
कपिल सिब्बल बहुत बड़े और कनेक्शन वाले वकील हैं।
बाबरी मस्जिद - हारे
ट्रिपल तलाक़ - हारे
लालू यादव - हारे
हिजाब - हारे
शरद यादव - हारे
संजय दत्त - हारे
कपिल मिश्रा बनाम हर्ष मांदर- केस वापस लिया
मुख़्तार अंसारी- हारे
सोनिया गांधी हेराल्ड केस- नहीं जीते। लिस्ट बड़ी लंबी है…
EWS आरक्षण लागू करने की सरकार को इतनी जल्दबाजी थी की 103 वां संविधान संशोधन करके आर्टिकल 15, 16 में खंड 6 जोड़कर तत्काल लागू कर दिया !
अब ओबीसी के लिए संविधान संशोधन करने में क्या समस्या है दरअसल ओबीसी के अधिकारों को लेकर आपकी नियत खराब है। सिर्फ ओबीसी को वोट बैंक सेआगे कुछ नहीं
मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण बचाने के नाम पर बंदर की तरह कूदने से कुछ नहीं होगा। वह सिर्फ दिखावा है। नीयत साफ़ है तो संविधान संशोधन कीजिए। जैसे EWS के लिए किया था। @ChouhanShivraj@narendramodi
ओबीसी आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट को अधूरी रिपोर्ट देकर @ChouhanShivraj ने ओबीसी वर्ग के विभीषण की भूमिका निभाई है। इस कारण हज़ारों-हज़ार ओबीसी पंच और सरपंच नहीं बन पाएँगे। इस बात को दुनिया को बताने के लिए @DainikBhaskar के पत्रकार राहुल शर्मा का आभार।
चंदौली की घटना बेहद भयावह है। मानवता के खिलाफ अत्याचार है। निशा यादव मामले में न्याय होना चाहिए। इससे फ़र्क़ नहीं पड़ना चाहिए कि जिस पर आरोप है वह किस जाति का है। राजदंड को निष्पक्ष होना चाहिए। @myogiadityanath इस बात को समझें कि वे एक जाति के नहीं, प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं।