शिक्षकों का आज का डिजिटल आंदोलन न्यूज 18 में प्रमुखता से .....
सातवें वेतनमान की मांग को लेकर 11 बजे से X पर जोरदार आंदोलन करेंगे शिक्षक
#BiharTeachersNeed7thPay
हमारे छात्र बिहार के भविष्य हैं। उनकी हर वाजिब मांग को हम पूरा करेंगे। संवाद के द्वार खुले हैं। अब उन्हें आंदोलन की राह पकड़ने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
-माननीय शिक्षा मंत्री श्री मिथिलेश तिवारी
#BiharEducationDept
गयाजी जिले में आयोजित ‘छात्र-युवा संसद’ में बड़ी संख्या में छात्र-युवाओं के साथ संवाद हुआ।
बदहाल शिक्षा व्यवस्था, पेपर लीक, भर्तियों में अनियमितता और बढ़ती बेरोज़गारी के खिलाफ नई पीढ़ी अब चुप बैठने वाली नहीं है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और न्यायपूर्ण बहाली के सवाल पर बिहार के छात्र-युवा एकजुट हो रहे हैं।
सत्ताधारियों याद रखो कि यह आवाज़ जितनी दबाई जाएगी, उतनी ही मजबूत होकर उठेगी। शिक्षा और रोज़गार के अधिकार की लड़ाई जारी रहेगी!
#ChhatraYuvaSansad #SchoolThikKaro #ShikshaSudharo #NyaypurnaBahali
रक्षाबंधन आज संपन्न हो गया
मेरी प्यारी बहना ने मुझे राखी बांध
मेरे लिए ईश्वर से कामना की!
मेरा सभी भाइयों से निवेदन है
रक्षाबंधन को सिर्फ एक दिन का
रस्म नहीं बनाइए।अपनी बहन की तरह
हर बहन के सम्मान, प्रतिष्ठा और हक़ के लिए
हर दिन तत्परता से प्रयत्न कीजिए।
रक्षाबंधन का स्नेह वचन!
जब तक सामाजिक - आर्थिक गैर बराबरी कायम है, तब तक आरक्षण की व्यवस्था की किसी प्रकार की समीक्षा उचित नहीं है ..
आरक्षण की वर्तमान व्यवस्था केवल एक कल्याणकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारत में सदियों से चले आ रहे सामाजिक भेदभाव और असमानता को दूर करने का एक संवैधानिक तथा संरचनात्मक माध्यम है। जब भी 'आरक्षण की समीक्षा' की बात उठती है, तो इसे केवल प्रशासनिक या आर्थिक नजरिए से देखने की बजाय इसके पीछे के सामाजिक न्याय के सिद्धांत को समझना आवश्यक है।
आरक्षण का प्राथमिक उद्देश्य सिर्फ गरीबी दूर करना नहीं, बल्कि उन समुदायों की शासन, प्रशासन, शिक्षा और लोकतांत्रिक व्यवस्था की मुख्यधारा में भागीदारी (प्रतिनिधित्व) सुनिश्चित करना है , जिन्हें मुख्यधारा से रूप से दूर रखा गया। जब तक सभी वर्गों का आनुपातिक प्रतिनिधित्व हासिल नहीं होता, सामाजिक व् आर्थिक समरसता कायम नहीं होती, गैर बराबरी की खाई पाटी नहीं जाती , तब तक इसके स्वरूप को बदलना अनुचित होगा।
कागजी प्रगति के बावजूद जमीनी स्तर पर जातिगत भेदभाव और सामाजिक - आर्थिक असमानता देश में आज भी मौजूद है। आरक्षण वंचित वर्गों को सुरक्षात्मक कवच प्रदान करता है , ताकि वे बिना किसी पक्षपात एवं अवरोध के आगे बढ़ सकें।
देश का संविधान (विशेष रूप से अनुच्छेद 15 और 16) अवसरों की समता और सामाजिक न्याय की गारंटी देता है। वर्तमान आरक्षण व्यवस्था बाबा साहेब डॉक्टर बी.आर. अंबेडकर जी और संविधान सभा के उस दृष्टिकोण का परिणाम है जो वंचितों के सशक्तिकरण को राष्ट्र निर्माण की पहली शर्त मानता है।
आरक्षण की समीक्षा के किसी भी प्रयास से अक्सर वंचित वर्गों की सामाजिक सुरक्षा और अधिकारों में कटौती किए जाने की संभावना बनी ही रहती है । अतः आरक्षण के वर्तमान प्रावधानों को बिना किसी उप - वर्गीकरण व् समीक्षा के यथावत बनाए रखना सामाजिक संतुलन, न्याय और लोकतंत्र की समावेशी भावना को सुदृढ़ रखने के लिए अत्यंत आवश्यक है।
बिहार सरकार शिक्षको को सिर्फ बातों से ही क्यों
सम्मान देती हैं।
अन्य राज्यकर्मी कर्मचारियों कि तरह वेतन, ग्रेड पे,7th pay का लाभ राज्यकर्मी शिक्षकों को क्यों नहीं ?
आज लगातार बेतहाशा बढ़ती महंगाई में बिहार का कोई राज्यकर्मी शिक्षक अपना घर परिवार भविष्य की बचत नेपाली वेतनमान से कैसे करें।
आखिर बिहार में शिक्षा विभाग में कार्यरत राज्यकर्मी शिक्षकों को ही क्यों दोयम दर्जे का राज्यकर्मी बनाया गया हैं अन्य विभागों में कार्यरत राज्यकर्मी कर्मचारियों को शिक्षकों से क्यों सुप्रियर बनाया गया हैं...ये एक ही राज्य में कार्यरत राज्यकर्मी कर्मचारियों में दो फाड़ क्यों सरकार बनाई हैं।
@samrat4bjp@officecmbihar@BiharEducation_@mkrtiwari_bjp@narendramodi@iChiragPaswan@jitanrmanjhi@UpendraKushRLM@yadavtejashwi@PrashantKishor
#BiharTeachersNeed7thPay
#BiharTeachersNeed7thPay
लड़की - भैया बिहार से सम्राट चौधरी को हटा दो उसने अनपढ़ गवार ने हमारे बिहार को बर्बाद कर रखा है
अभिजीत दीपके - मैं बहुत पहले से कह रहा हूं यहां से खत्म करने के बाद मेरा पहला जो इवेंट होगा बिहार के पटना गांधी मैदान में होगा।
बिहार के छात्र का छलका दर्द!
"अगर पैसा होता तो मैं भी सीट खरीद लेता!
आज मैं Blinkit में 10 घंटे काम करता हूं उसके बाद जाकर पढ़ता हूं!
मैं मेहनत कर के घर भी चलाता और पढ़ाई भी करता हूं!
उसके बाद भी पेपर लीक हो जाता!
जिसके पास पैसा है वो सीट खरीद लेते है"
मेहनत करने वाले कहां जायेंगे??