@mlkhattar@BhupinderShooda#haryanaclerk35400
सरकार की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है तभी बौखलाई हुई है बिना किसी तर्क के ऐसे-2 बयान दे रहे है जिनके कोई सिर पैर नहीं है।@Dchautala
जी लिपिकीय वर्ग के बारे में ऐसी बाते बोलना आपको शोभा नही देता 2024 अब ज्यादा दूर नहीं wait and watch👎
हरियाणा प्रदेश में हड़ताल कर रहे क्लर्कों की मांगें मानने की बजाय भाजपा सरकार का अड़ियल रवैया जनता के लिए परेशानी का सबब बन गया है।
सरकार हड़ताल कर रहे क्लर्कों की मांगों को तुरंत स्वीकार करे।
देश के अन्य राज्यों की तरह लिपिकों को दिए जा रहे वेतन के बराबर वेतन अर्जित करना हरियाणा के लिपिकों की मांग नहीं हक़ है। सरकार की अनदेखी का नतीजा है कि सरकारी यंत्र की रीड की हड्डी माने जाने वाला #लिपिक वर्ग कार्यालय की जगह सड़क पर है, जिसका खामियाजा पूरे प्रदेश को भुगतना पड़ेगा।
अगर कोई कर्मचारी संयुक्त परिवार में नही रहता हो तो यकीन जानिए क्लर्क को मिलने वाली तनख्वाह से गुजारा नहीं चलना।
ऐसे ही एक कर्मचारी से उसका एक महीने के खर्च का अनुमान जाना जो साझा किया जा रहा है।
कुछ तो सोचो सरकार
ये आपके बिना पर्ची, बिना खर्ची वाले मेरिट वाले बच्चे है
इनकी मेरिट का सम्मान करो।
ये और इनका परिवार गरिमा से जी सके, कम से कम इतनी व्यवस्था तो हो।
@cmohry
सरकारें विभागों का निजीकरण करना चाहती है तो कदम आगे बढ़ाए।
ये आउटसोर्स, कौशल निगम के माध्यम से न्यूनतम वेतन पर भर्ती कर्मचारी जो आज की महंगाई में बेगार कराने जैसी है, के माध्यम से छिप छिप कर कदम क्यों उठा रही है? बाद में इन्हे भी हटा दिया जाता है।
ये लोग फिर भ्रष्टाचार में क्यों नही संलिप्त होंगे?
क्लर्क ग्रेड भी इतना न्यूनतम है कि एक क्लर्क अपने बच्चो की पढ़ाई लिखाई ठीक से नहीं करा सकता।
हमारी एसोसिएशन क्लेरिकल एसोसिएशन वेलफेयर सोसाइटी द्वारा उनके ग्रेड बढ़ाने के लिए चलाए जा रहे प्रयासों व संघर्ष का समर्थन करती है।
लिपिकों की जायज माँगों को काफी लम्बे समय से नज़रअंदाज़ करके बस आश्वासन ही दिया जा रहा है। मजबूरन उन्हें धरने का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे प्रदेशवासियों को रोजमर्रा के कामों में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। सरकार माँगों का निवारण करें व प्रदेश को सुचारु रूप से चलने दें।